MP: इंदौर-उज्जैन में ही क्यों बनेगा मेडिकल टूरिज्म वेलनेस कॉरिडोर? 2000 करोड़ के निवेश से बदलेगी तस्वीर
इंदौर और उज्जैन के बीच देश का बड़ा मेडिकल टूरिज्म कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 2000 करोड़ रुपये की इस परियोजना में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ योग, आयुर्वेद और वैलनेस सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर
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केंद्र सरकार की देश में पांच विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब इंदौर-उज्जैन के बीच मेडिकल टूरिज्म कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। सिंहस्थ से पहले इस परियोजना को मूर्त रूप देने की दिशा में काम शुरू किया जा रहा है। शुरुआती चरण में इस परियोजना पर लगभग 2000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
इंदौर और उज्जैन के बीच मेडिकल टूरिज्म कॉरिडोर के लिए क्षेत्र का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि इंदौर में बड़े अस्पताल समूहों के साथ सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो इस तरह के कॉरिडोर के लिए जरूरी मानी जाती हैं। वहीं, वर्ष 2024 के बाद मध्य प्रदेश में सबसे अधिक, लगभग 51 प्रतिशत पर्यटक और श्रद्धालु केवल उज्जैन पहुंचे हैं।
एक्सपर्ट्स की राय के बाद तैयार होगी रिपोर्ट
इंदौर और उज्जैन के बीच मेडिकल टूरिज्म कॉरिडोर विकसित करने की कवायद अब तेज हो चुकी है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से चर्चा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे राज्य शासन को भेजा जाएगा।
इस योजना के तहत इंदौर की विशेषज्ञता वाले चिकित्सा क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाएगा और उन सुविधाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो वर्तमान में अन्य शहर उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह कॉरिडोर केवल मेडिकल टूरिज्म तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि योग, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी के माध्यम से स्वास्थ्य सुधार और रिकवरी पर भी फोकस किया जाएगा। परियोजना को “क्वालिटी ऑफ केयर एंड क्रेडिबिलिटी” मॉडल के आधार पर विकसित किया जाएगा।
योजना के तहत क्या होगा?
इंदौर में पहले से रोबोटिक सर्जरी और अंग प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब इस योजना के तहत अस्पतालों द्वारा दी जा रही चिकित्सा सेवाओं और पैकेजों की सूची तैयार की जाएगी, ताकि वैश्विक स्तर पर मरीजों को आकर्षित किया जा सके।
इसके लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल बनाया जाएगा और सभी सेवाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तय की जाएगी। साथ ही इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी और हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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इंदौर-उज्जैन को ही क्यों चुना गया
मेडिकल टूरिज्म कॉरिडोर के लिए इंदौर और उज्जैन को सबसे उपयुक्त स्थान माना गया है। एक ओर महाकालेश्वर और दूसरी ओर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की मौजूदगी के कारण यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिन्हें विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा सकेगा। इंदौर की हवाई और रेल कनेक्टिविटी, आधुनिक एयर एंबुलेंस सुविधा, प्रतिष्ठित अस्पताल समूह और आसपास के पर्यटन स्थल इसे मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स में शीर्ष स्थान दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं। वहीं उज्जैन देश की आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र है, जहां वर्षभर भारत सहित विदेशों से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
गुलावट से महाकाल नगरी तक बनेंगे वैलनेस सेंटर
जानकारी के अनुसार, मेडिकल टूरिज्म कॉरिडोर को ओंकार सर्किट को ध्यान में रखते हुए इंदौर और उज्जैन के बीच विकसित किया जाएगा। गुलावट लोटस वैली जैसे प्राकृतिक स्थलों से लेकर महाकाल नगरी तक वैलनेस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन सेंटरों में पर्यटन के साथ प्रकृति के बीच योग, ध्यान और वैकल्पिक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

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