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लैंड पूलिंग योजना: संशोधित पत्र को लेकर भाकिसं नाराज, प्रदेशाध्यक्ष बोले- योजना निरस्त नहीं की तो करेंगे विरोध

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 20 Nov 2025 10:39 PM IST
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सार

उज्जैन सिंहस्थ-2028 के लिए लैंड पूलिंग एक्ट को पूरी तरह निरस्त करने के मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद सरकार ने केवल संशोधन किया। भारतीय किसान संघ ने इसे 'चालाकी' बताकर विरोध जताया, दो दिन का अल्टीमेटम दिया। TDS-8 से 11 और धारा-50(1) हटाने की मांग पर अड़े किसान जल्द बड़ा आंदोलन करेंगे।

Land Pooling Scheme: BKU angry over amended letter, state president says will protest if scheme not cancelled
भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लैंड पूलिंग योजना को लेकर भारतीय किसान संघ और प्रशासन के बीच गतिरोध फिर गहरा गया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने प्रशासन द्वारा जारी किए गए संशोधन पत्र को 'चालाकी' बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। बताया कि 17 तारीख को भोपाल में मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और चीफ सेक्रेटरी की उपस्थिति में हुई बैठक में TDPS 8 से 12 को पूरी तरह निरस्त करने पर सहमति बनी थी। लेकिन बुधवार शाम आए पत्र में TDPS 12 में संशोधन किया गया है, जिस पर किसान संघ की कड़ी आपत्ति है।
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आज भी किसान संघ अपनी मूल मांग पर कायम है कि योजना को पूर्णतः निरस्त किया जाए, न कि संशोधित। आंजना ने कहा कि यदि सरकार अपने वादे से पीछे हटती है, तो वे पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन करेंगे। रणनीति तय करने के लिए भारतीय किसान संघ की टोली एक-दो दिन में बैठेगी, जिसके बाद 8-10 दिनों में सड़कों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकता है। यह कदम सरकार और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दोनों पर सवाल खड़े करता है।
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गोलमाल आदेश स्वीकार नहीं 
भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने बताया कि हमे गोलमाल आदेश स्वीकार नहीं है। किसानों को लेंड पुलिंग योजना में किसी भी तरह उलझाया गया तो दोबारा आंदोलन करेंगे। इसकी रणनीति तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को दो दिन का समय दिया गया है। संशोधन को निरस्त किया जाए और बातचीत में जो वादे किए गए, उनको पूरा करे।

यह है किसानों की मुख्य मांगें 
  • सिंहस्थ क्षेत्र से लैंड पूलिंग एक्ट पूरी तरह खत्म हो।
  • यानी सरकार किसानों की जमीन पर कोई अधिकार न ले सके।
  • नगर विकास स्कीम (TDS)-8, 9, 10, 11 का गजट नोटिफिकेशन रद्द हो। इसी के जरिए जमीन विकास प्राधिकरण के अधिकार में जाती है।
  • सिंहस्थ पहले की तरह, बिना बड़े स्थायी निर्माण के आयोजित किया जाए।
  • किसानों पर दर्ज सभी केस वापस हों।
  • टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) की धारा 50 और 12(क) को हटाया जाए।
  • किसान मानते हैं कि यही धारा जमीन पर सरकारी कब्जे की शुरुआत है।
  • सरकार ने संशोधित आदेश में क्या किया ?
  • लैंड पूलिंग एक्ट खत्म नहीं किया, केवल थोड़ा संशोधन किया।
  • TDS-8, 9, 10, 11 जैसी योजनाएं जस की तस रखीं।
  • धारा 50 (1) हटाने की मांग भी नहीं मानी गई।
  • जो किसान हटवाना चाहते थे, वह हटाया नहीं गया।

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TDS-8, 9, 10, 11 में क्या है? (यही विवाद की जड़)
इन योजनाओं में सरकार कहती है कि सड़क, नाली, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली या पानी की लाइन जैसे विकास कार्यों के लिए सरकार किसानों की जमीन ले सकती है।

किसानों का विरोध क्यों ?
किसान कहते हैं कि TDS योजना लगते ही उनकी जमीन 'पूलिंग या अप्रत्यक्ष अधिग्रहण' के दायरे में चली जाती है। हालांकि कागज पर मालिक वे रहते हैं, लेकिन जमीन का उपयोग सरकार तय करती है।

सिंहस्थ क्षेत्र में लैंड पूलिंग एक्ट समाप्त किया जाए
किसान संघ ने लिखित में कहा है कि यह एक्ट खत्म करना है नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी आदेश पर प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार से बातचीत में संघ ने लिखित में यह स्पष्ट किया था कि सिंहस्थ क्षेत्र में लैंड पूलिंग एक्ट समाप्त किया जाए। उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र से नगर विकास योजना (TDS-8, 9, 10, 11) के तहत आने वाले लैंड पूलिंग एक्ट का गजट नोटिफिकेशन रद्द किया जाए। सिंहस्थ पूर्व की तरह ही आयोजित किया जाए। साथ ही उज्जैन में किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। सिंहस्थ क्षेत्र में कोई भी स्थायी निर्माण न किया जाए। लेकिन नया आदेश उलझाने वाला है। 

प्रतिनिधिमंडल की सरकार से जो बातचीत हुई थी, उसमें लैंड पूलिंग एक्ट निरस्त होना तय था। यानी स्कीम 8, 9, 10 और 11 समाप्त करते हुए धारा 50(1) को हटाया जाना था, लेकिन जारी संशोधन से ऐसा लगता है कि किसानों को उलझाया जा रहा है। ऐसे तो सरकार जमीन पर कब्जा कर सकती है।टीएंडसीपी (TNCP) की धारा 50 और 12 (क) किसानों को स्वीकार नहीं है। इससे प्रतीत होता है कि सरकार की मंशा लैंड पूलिंग कानून को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में साफ नहीं है।
 
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