Ujjain: मेडिकल का छात्र कर रहा था वन्यजीव के अंगों का अवैध कारोबार, जानें कैसे खुला राज? आरोपी हुआ गिरफ्तार
उज्जैन में तंत्र-मंत्र के नाम पर प्रतिबंधित वन्यजीवों के अंगों की कथित तस्करी का वन विभाग ने भंडाफोड़ किया है। हरसिद्धि मंदिर के सामने दुकान चलाने वाले एक युवक को गिरफ्तार कर उसके पास से 7 हठ जोड़ी और मोबाइल जब्त किया गया है।
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तंत्र-मंत्र के नाम पर प्रतिबंधित वन्यजीवों के अंगों की तस्कीर का खेल खत्म हो गया। अंधविश्वास की आड़ में वन्यजीवों के अंगों का अवैध कारोबार करने वाले एक युवक को वन विभाग ने गिरफ्तार किया है। आरोपी उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर के सामने दुकान चलाकर हठ जोड़ी बेच रहा था।
ग्राहक बनकर पहुंची वन विभाग की टीम ने दबिश देकर 7 हठ जोड़ी जब्त कीं और आरोपी का मोबाइल भी जब्त किया, जिसमें तस्करी से जुड़े अहम सबूत मिले हैं। जिला वन मंडल को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि हरसिद्धि क्षेत्र में तंत्र-मंत्र के नाम पर प्रतिबंधित वन्यजीवों के अंग बेचे जा रहे हैं। इसके बाद वन विभाग ने जाल बिछाया और एक व्यक्ति को ग्राहक बनाकर यश शर्मा की दुकान पर भेजा। सौदा तय होते ही टीम ने दबिश देकर कार्रवाई की।
सात हठ जोड़ी बरामद हुईं
35 वर्षीय आरोपी यश शर्मा, निवासी हरसिद्धि की पाल, की दुकान से सात हठ जोड़ी बरामद हुईं। वन मंडल अधिकारी अनुराग तिवारी ने बताया कि आरोपी का मोबाइल भी जब्त किया गया है। मोबाइल में वन्यजीवों से जुड़े प्रतिबंधित आर्टिफैक्ट्स की तस्वीरें, व्हाट्सएप चैट और लेन-देन से जुड़े शुरुआती सबूत मिले हैं। इससे स्पष्ट है कि आरोपी लंबे समय से इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।
बरामद हठ जोड़ी को जांच के लिए जबलपुर स्थित वन्यजीव फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। रिपोर्ट से पता चलेगा कि ये संरक्षित मॉनिटर छिपकली (गोह) के पंजे हैं या नहीं। पुष्टि होने पर आरोपी के खिलाफ और गंभीर धाराएं जोड़ी जाएंगी।
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मोबाइल की जांच से हाथ लगा सुराग
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी डॉक्टरी की पढ़ाई के साथ-साथ यह अवैध धंधा भी कर रहा था। वन विभाग अब मोबाइल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट के आधार पर सप्लायर और खरीदारों की पूरी चेन खंगाल रहा है। आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
डीएफओ अनुराग तिवारी ने लोगों से अपील की है कि तंत्र-मंत्र के नाम पर बेचे जाने वाले ऐसे सामानों के झांसे में न आएं। यह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग को दें।
