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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain: RSS Chief’s Big Statement at Dharma Sansad, Dharma Liberates, Religion Does Not Mean Dharma

उज्जैन में संघ प्रमुख का युवाओं को संदेश: धर्म बांधता नहीं बल्कि मुक्त करता है, बताया रिलीजन से क्यों है अलग

Fri, 18 Sep 2026 01:10 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Fri, 18 Sep 2026 01:10 PM IST
सार

उज्जैन में युवा धर्म संसद के दूसरे दिन RSS प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं को धर्म और रिलीजन के बीच अंतर को समझाया। उन्होंने कहा कि धर्म किसी को बांधता नहीं, बल्कि मुक्त करता है और युवाओं को जीवन की सही दिशा देने का माध्यम है।

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Ujjain: RSS Chief’s Big Statement at Dharma Sansad, Dharma Liberates, Religion Does Not Mean Dharma
युवा धर्म संसद में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उज्जैन के देवास रोड स्थित गीता भवन में आयोजित तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने दीप प्रज्वलन और वंदे मातरम के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान संघ प्रमुख ने युवाओं को धर्म का वास्तविक अर्थ समझाया और जीवन में इसके महत्व पर मार्गदर्शन दिया।

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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने उद्बोधन में रिलीजन और धर्म का अंतर बताते हुए स्पष्ट किया कि रिलीजन का अर्थ धर्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शब्दकोश में धर्म के लिए कोई सटीक शब्द ही नहीं है। रिलीजन शब्द की उत्पत्ति रिलिजियो से हुई है, जो बांधने का संकेत देता है, जबकि धर्म किसी को बांधता नहीं, बल्कि मुक्त करता है। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति इसके कर्मकांड को मिटाना चाहती है, इसलिए इसे रिलीजन का नाम देती है। स्वामी विवेकानंद के विचारों का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि भारत धर्मप्राण देश है। किसी भी नए विचार या जिज्ञासा का समाधान पाने के लिए पहले अपने मन को स्थिर और खाली करना होगा। जब तक पुरानी बातें दिमाग से नहीं हटेंगी, तब तक नया सीखना संभव नहीं है।
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बता दें कि इस धर्म संसद में देशभर से लगभग 1,700 युवा छात्र-छात्राएं तथा 300 से अधिक विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य हिस्सा ले रहे हैं। प्रसिद्ध पटकथा लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा, एआई तथा सूचना-विचार संघर्ष जैसे समसामयिक विषयों पर विस्तृत संवाद और व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं।
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धर्म ही देता है युवाओं को दिशा
कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि धर्म केवल बुजुर्गों के लिए नहीं है बल्कि यह युवाओं को सही दिशा दिखाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि महाभारत के अंत के पांच श्लोक पूरी महाभारत का सार हैं। जीवन में धर्म से ही काम, अर्थ और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि धर्म पर रोते-रोते चलने के बजाय यदि इसे समझकर अपनाया जाए, तो जीवन सार्थक हो जाता है। किसी को पीड़ा न देना ही सबसे बड़ा धर्म है और पीड़ा देना महापाप है।


अगला संस्करण द्वारका में होगा
सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा सिद्धपीठ हनुमत निवास, अयोध्या के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज के मार्गदर्शन में युवा धर्म संसद का यह छठा संस्करण आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और कांचीपुरम में इसके सफल आयोजन हो चुके हैं। अब इसका अगला संस्करण द्वारका में आयोजित किया जाएगा।

उद्घाटन सत्र में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी और सेवाज्ञ संस्थानम् के अध्यक्ष आशीष कुमार आशु उपस्थित रहे। व्याख्यान सत्रों में जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरिजी महाराज, अनादि फाउंडेशन की सह-संस्थापिका स्मृति अनंतलक्ष्मी और प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंद कुमार भी युवाओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

 

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