Umaria News: पुल अधूरा, नाव ही सहारा, सोन नदी पार कर जिंदगी और जोखिम के बीच सफर करते ग्रामीण
उमरिया और शहडोल के कई गांवों के ग्रामीण सोन नदी पार करने के लिए जोखिमभरी मोटर बोट पर निर्भर हैं। सुरक्षा इंतजाम नहीं होने से हादसे का खतरा बना रहता है। वर्षों पहले शुरू हुआ पुल निर्माण अब तक अधूरा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द सुरक्षित समाधान की मांग की है।
उमरिया और शहडोल के कई गांवों के ग्रामीण सोन नदी पार करने के लिए जोखिमभरी मोटर बोट पर निर्भर हैं। सुरक्षा इंतजाम नहीं होने से हादसे का खतरा बना रहता है। वर्षों पहले शुरू हुआ पुल निर्माण अब तक अधूरा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द सुरक्षित समाधान की मांग की है।
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उमरिया जिले के मानपुर विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत भोलगढ़ के ग्राम छाप से शहडोल जिले के ग्राम पापोंद, सरसी सहित दर्जनों गांवों के लोगों का रोजमर्रा का जीवन आज भी सोन नदी पर चलने वाली मोटर बोट के भरोसे टिका हुआ है। हालात ऐसे हैं कि एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों के पास नाव के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
ग्रामीणों को रोजाना लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर तक का नदी मार्ग मोटर बोट के सहारे तय करना पड़ता है। इसी रास्ते से लोग बाजार, कामकाज और जरूरी घरेलू जरूरतों के लिए आवागमन करते हैं। कई बार लोग अपनी मोटरसाइकिल तक नाव में रखकर नदी पार करते दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक साधारण सफर नहीं बल्कि हर दिन जान जोखिम में डालकर किया जाने वाला सफर है। नाव में सुरक्षा के नाम पर कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है। ना तो यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट उपलब्ध हैं और ना ही किसी प्रकार की सुरक्षा निगरानी की व्यवस्था दिखाई देती है। इसके बावजूद मजबूरी में लोग इसी रास्ते से आवाजाही कर रहे हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सोन नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ तेज बहाव के बीच नाव से सफर करना खतरे से खाली नहीं रहता। कई बार नाव डगमगाने लगती है, जिससे यात्रियों में डर का माहौल बना रहता है। बावजूद इसके लोगों को अपनी जरूरतों के लिए इसी रास्ते का सहारा लेना पड़ता है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार सोन नदी पर पुल निर्माण का कार्य करीब चार से पांच साल पहले शुरू हुआ था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पुल बनने के बाद वर्षों पुरानी परेशानी खत्म हो जाएगी और सुरक्षित आवागमन का रास्ता मिल सकेगा, लेकिन निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। अधूरा पड़ा पुल लोगों के लिए विकास के अधूरे वादों की कहानी बनकर रह गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि और अधिकारी बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जमीनी हालात आज भी वैसे ही बने हुए हैं। लोगों को आज भी नाव के सहारे अपनी जिंदगी का सफर तय करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि नदी पार करते समय कोई हादसा हो जाए तो बचाव के लिए तत्काल कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी इसी जोखिम भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द पुल निर्माण कार्य पूरा कराने और नाव संचालन में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने की मांग की है।
इस संबंध में मानपुर जनपद पंचायत के सीईओ अंकित सिरोठिया ने कहा कि मामले को दिखवाया जाएगा। हालांकि ग्रामीणों को अब सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि सुरक्षित और स्थायी समाधान का इंतजार है।

नाव के सहारे नदी पार करते ग्रामीण

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