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लव आज कल: बिना इजहार के प्यार वाली नीलिमा और हर्ष की सफल प्रेम कहानी

अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: प्राची प्रियम Updated Wed, 12 Feb 2020 06:17 PM IST
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Amar Ujala Love Aaj Kal contest Kanpur love story of Harsh and Neelima
नीलिमा-हर्ष - फोटो : अमर उजाला
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...तो यहां से शुरू होती है हमारी प्रेम कहानी। बिना प्यार के इजहार की एक सच्ची प्रेम कहानी। मेरा नाम नीलिमा पाण्डेय है और मेरे प्रेमी का नाम है हर्ष प्रताप सिंह। हम दोनों कानपुर से हैं और हमारी मुलाकात एमबीए की पढ़ाई के दौरान हुई थी। हर्ष से मेरा परिचय कॉलेज की फ्रेशर्स पार्टी के दौरान हुआ था। 

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हमने कॉलेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत आयोजित फैशन शो में भाग लिया था। वहीं से हमारा सफर शुरू हुआ और हम एक दूसरे को डेट करने लगे। हमारे बीच नोक-झोंक भी होती थी और एक-दूसरे के साथ समय बिताना भी अच्छा लगता था। और सबसे अच्छी बात तो यह है कि हम दोनों के दिल में एक दूसरे के लिए जुनून था, जिसे हम कभी भी शब्दों में बयां नहीं कर पाए। 
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इसी तरह हम पहले दोस्त बने और फिर हमारी दोस्ती प्रेम संबंध में बदल गई। लेकिन हमारा यह संबंध मेरे अभिभावक और समाज को पसंद नहीं आया। हमें अलग करने की पूरी कोशिश की गई। हम दोनों को एक दूसरे के बारे में तरह-तरह की बातें बोली गईं। एक समय ऐसा आया जब हम लोगों के झांसे में आकर एक-दूसरे से काफी दूर हो गए थे। 

लेकिन जैसा कि मैंने बताया कि हमारे बीच एक अलग ही रिश्ता है, जिसने हमें एक बार फिर साथ ला दिया। इस बीच हमारी पढ़ाई पूरी हो गई और नौकरी के लिए हम दोनों कानपुर से दिल्ली आ गए। अबतक हम एक-दूसरे को समझने की कोशिश ही कर रहे थे। 

दिल्ली आकर सबकुछ बदल गया। नया शहर और नए लोगों के बीच जब मैं पूरी तरह अकेली थी, तो एक हर्ष ही मेरे साथ था। इसी दौरान मुझे समझ आया कि अब मुझे अपनी पूरी जिंदगी इसी के साथ बितानी है। लेकिन इसके बाद भी न तो हमने कभी अपनी भावनाएं एक दूसरे के साथ साझा कीं और न ही कुछ जाहिर होने दिया।

हालांकि मन ही मन हम यह समझ चुके थे कि हम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इन तीन वर्षों के दौरान हम दोनों के पास न जाने कितने लोगों के प्रस्ताव आए, लेकिन न तो मैंने और न ही हर्ष ने इसे स्वीकार किया। इसके बाद आई शादी की बारी। मेरे घरवालों की तरफ से अरेंज मैरेज के लिए बहुत दबाव था। 

उन्होंने मेरे लिए कई रिश्ते भी देख रखे थे। उनमें से एक रिश्ता तय होने ही जा रहा था कि मैंने घरवालों को अपने मन की बात बता दी। अच्छी बात यह थी कि मुझे स्वीकार करने के लिए हर्ष का परिवार पूरी तरह तैयार था, लेकिन मेरे परिवारवालों ने मना कर दिया। मैं अपने परिवार को समझाती रही। 

समाज के लोगों ने भी मेरी बहुत आलोचना की और दबाव डाला। इसके बावजूद हमने बिना अपने प्यार का इजहार किए एक दूसरे का इंतजार किया। फिर एक दिन मेरे परिवारवाले हर्ष के परिवार से बात करने के लिए तैयार हो गए। सभी चीजें तय हुईं और 28 नवंबर, 2019 को हमारी शादी हो गई और अब मैं एक खुशहाल शादीशुदा जीवन जी रही हूं।

दिलचस्प यह है कि हमारी पूरी कहानी में  17 नवंबर की तारीख लकी रही। इस दिन मेरा और हर्ष दोनों का जन्मदिन होता है। हमारे परिवारवालों ने भी इसी दिन एक दूसरे से मुलाकात की थी और हमारी शादी तय हुई थी...।

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