कोरोना से जंग में पुलिस संग काशीवासी दिखा रहे दरियादिली, मजदूरों को उपलब्ध कराया भोजन
कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश में आगामी 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है। जाहिर है कि लॉकडाउन के दौरान आर्थिक समस्या भी उत्पन्न होगी और जो शुरू भी हो गई है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित दैनिक मजदूरी करने वाले और उनका परिवार हो रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से ऐसे लोगों की मदद के लिए विशेष इंतजाम करने की बात भी कही गई है। लेकिन सबसे जरूरी पहल लोगों को खुद आगे आकर सतर्कता बरतते हुए प्रशासन के माध्यम से ऐसे जरूरतमंदों के मदद की है। मानवता को जीवंत बनाने वाला ऐसा कार्य मंगलवार देर रात वाराणसी पुलिस की ओर से किया, जब भूखे सोने को मजबूर दिहाड़ी करने वाले लोगों को भोजन का पैकेट दिया गया।
दरअसल, लॉकडाउन के कारण मंगलवार की रात चेतगंज थाना के कालीमहल क्षेत्र में पत्ता बेचने वाले कुछ लोग फंस गए। भूखे पेट सड़क पर समय बिता रहे थे। इस दौरान ड्यटी कर रहे लक्सा इंस्पेक्टर भूपेश कुमार राय ने अपने साथियों और अन्य समाजसेवियों के साथ जरूरतमंदों को भोजन का पैकेट दिया।
बताते चलें कि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए वाराणसी शहर में आठ लोगों सहित कुछ संगठनों ने सहमति भी जताई है। इनमें अस्सी घाट अन्न क्षेत्र, अन्नपूर्णा मंदिर, संजय केशरी, कृष्ण कुमार सोमानी, नीतीश कुमार चितईपुर, डॉ अरविंद सिंह पांडेयपुर, रिजवान अहमद, भेलूपुर, किशन जालान शामिल हैं। इनकी ओर से प्राप्त भोजन का वितरण कल से शुरू होगा। समाजसेवी संजय केशरी ने खाने के सौ पैकेट उपलब्ध कराए हैं, जिनको प्रशासन ने वितरित किया है।
वाराणसी में लॉकडाउन के दौरान अपार्टमेंट और हाउसिंग सोसाइटी में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। लोग अपने फ्लैट के बाहर नहीं निकल रहे और बालकनी भी ज्यादा समय खाली ही नजर आ रही है। मंडुवाडीह और ब्रिज एनक्लेव कॉलोनी इलाके में स्थित अपार्टमेंट में भी लॉकडाउन जैसा माहौल है। अपार्टमेंट में किसी बाहरी व्यक्ति को नहीं जाने दिया जा रहा, जो अंदर भी जा रहा है उसके हाथ साफ कराए कराए जा रहे हैं।
फ्लैट में रहने वाली मधुमिता बताती है कि मेन गेट से लेकर सभी घरों के गेट बंद है दूध के लिए टेट्रापैक का इस्तेमाल किया जा रहा है। बुधवार से नवरात्रि शुरू हो रहे हैं, ऐसे में कोरोना वायरस के चलते फूल वाले को भी माना कर दिया गया है।
हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले अभिनव मित्रा बताते हैं कि लॉक डाउन के चलते हमने अपनी कामवाली बाई को घर आने से मना कर दिया है। घर पर सब मिलकर काम कर लेते हैं, यह सिर्फ कुछ दिन की परेशानी है। अगर हमने अभी सतर्कता बरत ली तो आपातकालीन स्थिति जल्द खत्म हो जाएगी।
अपार्टमेंट में रहने वाली रीति विमल बताती हैं कि पहली बार कालोनी में घंटों तक कोई आवाज नहीं सुनाई दी। लॉकडाउन के दौरान जहां कोरोना से जंग लड़ रही हैं वहीं सतर्कता बरतते हुए बाहर से आने वाले व्यक्ति से मिलना जुलना पूरी तरह बंद है। कौशल पांडेय जिस हाउसिंग सोसायटी में रहते हैं वहां 100 से ज्यादा फ्लैट हैं। सुबह अपार्टमेंट में सबसे पहले दूधिया आते हैं, उन्हें शनिवार को ही माना कर दिया था। सब्जी वालों का भी प्रवेश बंद है।
