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लॉटरी खरीदने के लिए बैंक मैनेजर ने बेचा ईमान, 84 लाख सिक्कों पर हाथ किया साफ
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
Published by: अभिलाषा पाठक
Updated Sun, 16 Dec 2018 04:09 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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पश्चिम बंगाल में बैंक मैनेजर ने लालच में आकर अपने ही बैंक में चोरी करने का जुर्म किया।कोलकाता के एक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा के मैनेजर तारक जयसवाल ने लॉटरी खरीदने के लिए बैंक को 84 लाख रुपए का चूना लगाया है।
35 साल के बैंक प्रबंधक ने कोलकाता से तकरीबन 80 किलोमीटर दूर मेमारी स्थित एसबीआई की ब्रांच में पिछले 17 महीने से बतौर वरिष्ठ असिस्टैंट मैनेजर तैनात है। बैंक के मैनेजर को ही करेंसी चेस्ट को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दी जाती है। बस इसी का फायदा उठाते हुए मैनेजर ने अपने ही बैंक से 84 लाख रुपए उड़ा दिए।
खास बात ये हैं कि चोरी करने के लिए मैनेजर ने पूरा पैसा चिल्लर यानि सिक्कों को चुना।सिक्कों में सबसे बड़े मूल्य का सिक्क 10 रुपए का है ऐसे में 84 लाख रुपए उड़ाने के लिए तकरीबन 840000 सिक्कों को उड़ाने की जरूर थी।इस तरह 17 महीने में उसने इस लिहाज से तारक ने हर महीने बैंक को 50 हजार सिक्के की चपत लगाई ।
जांच में पता चला कि महीने में तकरीबन 25 दिन बैंक खुलते हैं तो तारक ने हर रोज 200 सिक्के अपने साथ चोरी कर ले जाता था। इस बात की किसी को भी भनक नहीं लगी।लेकिन जब संख्या में भारी अंतर आया तो ऑडिटर को पता चला कि बड़ी हेराफेरी की गई है। करेंसी चेस्ट की पूरी जिम्मेदारी तारक जयसवाल पर थी, लिहाजा सबसे पहले उसपर ही शक गया।
जांच के दौरान पूछताछ में बैंक मैनेजर ने अपने जुर्म को कुबूल कर लिया है। लेकिन पुलिस अभी और भी जानकारी जुटा रही है कि तारक ने कहीं और भी घपलेबाजी तो नहीं की।
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35 साल के बैंक प्रबंधक ने कोलकाता से तकरीबन 80 किलोमीटर दूर मेमारी स्थित एसबीआई की ब्रांच में पिछले 17 महीने से बतौर वरिष्ठ असिस्टैंट मैनेजर तैनात है। बैंक के मैनेजर को ही करेंसी चेस्ट को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दी जाती है। बस इसी का फायदा उठाते हुए मैनेजर ने अपने ही बैंक से 84 लाख रुपए उड़ा दिए।
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खास बात ये हैं कि चोरी करने के लिए मैनेजर ने पूरा पैसा चिल्लर यानि सिक्कों को चुना।सिक्कों में सबसे बड़े मूल्य का सिक्क 10 रुपए का है ऐसे में 84 लाख रुपए उड़ाने के लिए तकरीबन 840000 सिक्कों को उड़ाने की जरूर थी।इस तरह 17 महीने में उसने इस लिहाज से तारक ने हर महीने बैंक को 50 हजार सिक्के की चपत लगाई ।
जांच में पता चला कि महीने में तकरीबन 25 दिन बैंक खुलते हैं तो तारक ने हर रोज 200 सिक्के अपने साथ चोरी कर ले जाता था। इस बात की किसी को भी भनक नहीं लगी।लेकिन जब संख्या में भारी अंतर आया तो ऑडिटर को पता चला कि बड़ी हेराफेरी की गई है। करेंसी चेस्ट की पूरी जिम्मेदारी तारक जयसवाल पर थी, लिहाजा सबसे पहले उसपर ही शक गया।
जांच के दौरान पूछताछ में बैंक मैनेजर ने अपने जुर्म को कुबूल कर लिया है। लेकिन पुलिस अभी और भी जानकारी जुटा रही है कि तारक ने कहीं और भी घपलेबाजी तो नहीं की।
