Shani Mahadasha: जब चल रही हो शनि महादशा, फिर बाकी ग्रहों की अंतर्दशा पर आप पर कैसा प्रभाव?
शनि की महादशा के दौरान शनि की अंतर्दशा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की महादशा को बहुत ही प्रभावी माना जाता है। शनि की महादशा जातक पर शुभ और अशुभ दोनों तरह का प्रभाव रहता है, क्योंकि ज्योतिष में शनि को न्यायाधीश और दंडाघिकारी माना गया है। ये व्यक्ति को उनके कर्मो के आधार पर शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। शनि की महादशा कुंडली में 19 वर्षों तक रहती है। शनि की महादशा के दौरान शनि की अंतर्दशा 3 वर्ष की होती है। जातकों की कुंडली में एक समय में दोनों स्थानों पर शनि का होना मिलाजुला परिणाम देखने को मिलता है। इसमें जातक को जमीन से संबंधित मसलों में फायदा मिलता है। घर परिवार में सुख शांति रहती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। वहीं अगर अशुभ फल की बात करें तो यह समय जातक के लिए नौकरी और बिजनेस के नजरिए से परेशानी भरा रहता है। सेहत में गिरावट भी देखने को मिलता है।
शनि की महादशा के दौरान चंद्रमा की अंतर्दशा 1 साल 7 महीने की होती है। ऐसे में ज्योतिष के नजरिए से यह संयोग अशुभ फल देने वाला माना गया है। इस दौरान धन अधिक खर्च होता है। शत्रुओं की संख्या बढ़ने लगती है। वैवाहिक जीवन में तनाव और सेहत में गिरावट होती है।
शनि की महादशा के दौरान मंगल की अंतर्दशा
शनि की महादशा के दौरान मंगल की अंतर्दशा 1 साल 1 महीने और 9 दिनों की होती है। मंगल और शनि दोनों ही उग्र स्वभाव होने के कारण इसका प्रभाव जातकों पर भारी पड़ता है। ऐसे में इस दौरान जातकों का स्वभाव उग्र हो जाता है। गुस्सा अधिक आने के कारण परिवार के सदस्यों और बाहरी दुनिया के लोगों से तनाव व टकराहट बढ़ जाती है। करियर में गिरावट और परेशानियां बढ़ने लगती है।
शनि की महादशा के दौरान बुध की अंतर्दशा
शनि की महादशा चलने के दौरान बुध की अंतर्दशा 2 वर्ष 8 महीने और 9 दिनों की मानी गई है। ज्योतिष शास्त्र में बुध को शुभ फल देने वाला ग्रह माना गया है। ऐसे में बुध की अंतर्दशा के कारण शनि का जातक की कुंडली में नकारात्मक असर कम हो जाता है। जातक को इस दौरान धन लाभ और करियर में कई अच्छे मौके मिलने आरंभ हो जाते हैं। समाज में मान सम्मान बढ़ जाता है। इसके अलावा बुध का व्यापार में अच्छा प्रभाव देखने को मिलता है।