Longest Solar Eclipse Of The Century: साल 2027 में आकाश में एक दुर्लभ और ऐतिहासिक खगोलीय घटना होने जा रही है, जिसका प्रभाव पूरी दुनिया से लेकर 12 राशियों पर देखने को मिल सकता है। ज्योतिषियों के अनुसार, अगले साल लगने वाला सूर्य ग्रहण 21वीं सदी का सबसे लंबा और बेहद प्रभावशाली सूर्य ग्रहण माना जा रहा है। खास बात यह है कि, इस अद्भुत नजारे के समय दिन के उजाले में ही कुछ मिनटों के लिए गहरा अंधकार छा जाएगा। साथ ही कुछ स्थानों पर रात जैसा दृश्य देखने को भी मिल सकता है। बता दें, यह खगोलीय घटना सिर्फ विज्ञान की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी बेहद खास मानी जा रही है। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण को अत्यंत महत्वपूर्ण काल माना जाता है, क्योंकि इस दौरान ग्रहों और नक्षत्रों की ऊर्जा का विशेष प्रभाव पृथ्वी और मानव जीवन पर पड़ता है। ऐसे में आइए इस ग्रहण के समय और प्रभाव को विस्तार से जानते हैं।
Longest Surya Grahan: कब लगेगा सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण ? जानें डेट, समय और कहां-कहां देगा दिखाई
Longest Solar Eclipse Of The Century: कहते हैं कि, जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य की किरणों को ढक देता है, तब सूर्य ग्रहण लगता है। यह अवधि ज्योतिष शास्त्र में बेहद खास मानी जाती है, जिसका असर सभी राशियों पर होता है।
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कब लगता है सूर्य ग्रहण ?
माना जाता है कि, सूर्य ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना होती है, जिसका प्रभाव व्यक्ति के नीजि जीवन से लेकर देश-दुनिया पर नजर आता है। जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाता है और सूर्य की रोशनी को पूरी या आंशिक रूप से ढक लेता है, तब सूर्य ग्रहण लगता है।
कब लगेगा सबसे लंबा सूर्य ग्रहण ?
वैज्ञानिकों के अनुसार, सबसे खास और प्रभावशाली सूर्य ग्रहण 2 अगस्त 2027 को लगने वाला है। इसे 21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जा रहा है। माना जा रहा है कि, इस दौरान चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीध में आएंगे, जिस कारण चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा। ज्योतिषियों के अनुसार, यह ग्रहण बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि इसमें लगभग 6 मिनट 20 सेकंड से लेकर 6 मिनट 23 सेकंड तक पूर्ण अंधकार बना रहेगा।
ज्योतिष में सूर्य ग्रहण का महत्व
ज्योतिषियों के मुताबिक, 2 अगस्त 2027 को लगने वाला दुर्लभ सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। परंतु यह श्रावण मास की अमावस्या तिथि होगी और इसलिए इसे ज्योतिष दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कहते हैं कि, सूर्य ग्रहण एक अशुभ अवधि होती हैं, जिसे परिवर्तन, चेतावनी का प्रतीक माना जाता है। इसके प्रभाव से कुछ लोगों के जीवन में अचानक बदलाव आते हैं, तो कुछ जातकों को नई दिशा मिलने के योग भी बनते हैं। इस दौरान नकारात्मक विचारों और विवादों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
कहां-कहां दिखाई देगा यह दुर्लभ सूर्य ग्रहण?
ज्योतिषियों के अनुसार, यह दुर्लभ सूर्य ग्रहण कई देशों में साफ तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, दक्षिणी यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई हिस्सों में यह अद्भुत नजारा नजर आने वाला है। वहीं इस दिन कुछ क्षेत्रों में दिन के समय ही रात जैसा अंधेरा छा सकता है। आसमान में तारे नजर आ सकते हैं और तापमान में हल्की गिरावट भी महसूस की जा सकती है। बात अगर भारत की करें, तो यह ग्रहण पूर्ण रूप से दिखाई नहीं देगा, लेकिन देश के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखने को मिल सकता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।