करवा चौथ के व्रत के बाद कार्तिक मास की कृष्णपक्ष की अष्टमी को अहोई अष्टमी मनाई जाती है। इस दिन का संबंध भगवान शिव की पत्नी मां पार्वती से है। अहोई अष्टमी के दिन मां पार्वती के अहोई स्वरुप की पूजा की जाती है। इस दिन सभी निसंतान महिलाएं संतान की प्राप्ति के लिए और जिन महिलाओं की संतान है, वे उनकी मंगल कामना हेतु व्रत रखती हैं।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार पंचम भाव बलिष्ठ होने से जातक के संतान संबंधी कष्ट दूर हो जाते हैं। वही जिनका पंचम भाव या पंचमेश निर्बल है, उन्हें या तो संतान प्राप्ति में कष्ट होता है या भविष्य में संतान संबंधी कष्ट रहता है। मां पार्वती के अहोई स्वरुप की पूजा करने से पंचम भाव बलिष्ठ हो जाता है और संतान संबंधी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। आइए, जानते हैं राशि अनुसार किन उपायों को करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
ढ़लते सूर्य को अपने हाथ से बना कर पूर्ण भोजन अर्पित करें।
मां अहोई की पूजा से पहले सवा किलो मसूर की दाल खेत या निर्जन स्थान पर डाल दें।
तारों की पूजा करते समय 11 दिये प्रज्जवलित करें।
भोजन करने से पूर्व कुछ भोजन अपने पुरखों के लिए निकाल कर दान करें।
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