दिल्ली की सड़कों पर दौड़ती हजारों ईवी के लिए चार्जिंग एक बड़ी चुनौती बन गई है। वर्तमान में दिल्ली में 8,998 ईलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी ) चार्जिंग पॉइंट्स हैं, जबकि जरूरत 36,177 की है। यानी करीब 27,000 से ज्यादा पॉइंट्स की कमी, जो 300 प्रतिशत से भी अधिक है। दिल्ली सरकार ने साल के अंत तक संख्या 16,070 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसके बाद भी 20,000 से ज्यादा पॉइंट्स की कमी बनी रहेगी।
EV: दिल्ली में ईवी चार्जिंग की कमी, एनसीआर में और बुरा हाल, क्या समय पर पूरा होगा 16 हजार पॉइंट्स का लक्ष्य?
EV Charging Points Deficiency: दिल्ली-एनसीआर में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। देश की राजधानी में जरूरत से करीब तीन-गुना कम चार्जिंग पॉइंट्स होने का दावा किया जा रहा है, जबकि एनसीआर के कई शहरों में हालात और भी चिंताजनक बताए जा रहे हैं। हालांकि सरकार ने साल के अंत तक संख्या को बढ़ाने का लक्ष्य बनाया, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ संख्या बढ़ाना ही काफी नहीं है।
एनसीआर शहरों की हालत और भी कमजोर
दिल्ली के पड़ोसी शहरों में ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति चिंताजनक है:- गुरुग्राम और फरीदाबाद: आंकड़ो के मुताबिक, यहां वर्तमान में कोई सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट नहीं है, जबकि कम से कम 20 और 26 की तत्काल जरूरत है।
- नोएडा: यहां 150 की जरूरत के मुकाबले केवल 69 पॉइंट्स काम कर रहे हैं। ग्रेटर नोएडा में सिर्फ 3 पॉइंट्स हैं।
- गाजियाबाद: 450 की जरूरत है, पर उपलब्ध सिर्फ 126 हैं। हालांकि, यहां साल के अंत तक 100 नए पॉइंट जोड़ने की तैयारी है।
CAQM का एक्शन प्लान क्या कहता है?
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी (सीएक्सूएम) को सौंपे गए प्लान के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में 7,300 से अधिक नए चार्जिंग पॉइंट्स इस साल के अंत तक जोड़े जाएंगे, जिनमें से अधिकतर दिल्ली में होंगे। दिल्ली मेट्रो स्टेशनों, रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) स्टेशनों और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अधीन पॉइंट्स तेजी से बढ़ाने की योजना है।
- मेट्रो कनेक्टिविटी: दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर 66 और आनंद विहार व न्यू अशोक नगर आरआरटीएस स्टेशनों पर 6-6 नए पॉइंट्स लगाए जाएंगे।
- बैटरी स्वैपिंग: दिल्ली में स्वैपिंग स्टेशनों को 948 से बढ़ाकर 2026 के अंत तक 1,268 करने का लक्ष्य है।
- ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट: प्रस्तावित 7,000 नए पॉइंट्स में से अधिकांश परिवहन विभाग के अंदर ही आएंगे।
बैटरी स्वैपिंग भी पीछे
इतना ही दिल्ली में तो अभी बैटरी स्वैपिंग स्टेशन भी जरूरत के हिसाब से कम हैं। फिलहाल राजधानी में अभी 948 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन हैं, जबकि जरूरत 1606 की है। हालांकि सरकार ने साल के अंत तक इसे 1,268 तक पहुंचाने का लक्ष्य बनाया है।
एक्सपर्ट्स का क्या मानना है?
सीएसई की अनुमिता रॉयचौधरी का कहना है कि सिर्फ चार्जिंग स्टेशन बनाना काफी नहीं है। इन्होंने कहा कि चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी स्वैपिंग और ‘राइट टू चार्ज’ कानून को एक साथ लागू करना जरूरी है। ताकि लोग अपने पार्किंग स्लॉट में बिना किसी बाधा के चार्जर लगा सकें। साथ ही, नई इमारतों को अनिवार्य रूप से ईवी-रेडी बनाना होगा। वहीं आईसीसीटी के अमित भट्ट मानते हैं कि घर और ऑफिस चार्जिंग (डेस्टिनेशन चार्जिंग) पर भी उतना ही ध्यान देना होगा, जितना पब्लिक चार्जिंग पर देने की जरूरत है।