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FASTag: सरकार ला रही है नया ऑटोमैटिक नंबर प्लेट स्कैन सिस्टम, क्या खत्म हो जाएगी फास्टैग की जरूरत?
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 11 Feb 2026 01:54 PM IST
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सार
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने वाले वाहनों के लिए स्वचालित टोल संग्रह शुरू करने की तैयारी कर रहा है। जानें इसका फास्टैग पर क्या होगा असर।
Toll Plaza
- फोटो : PTI
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विस्तार
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ऑटोमैटिक टोल वसूली प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है। यह नई व्यवस्था मार्च 2026 से कुछ चुनिंदा मार्गों पर शुरू हो सकती है। प्रस्तावित सिस्टम के तहत हाईवे पर लगाए गए कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और तय दूरी के आधार पर टोल राशि सीधे ड्राइवर के खाते से काट ली जाएगी।
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वर्तमान में टोल वसूली कैसे होती है?
फिलहाल देश के लगभग 1.5 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे नेटवर्क में से करीब 45,000 किलोमीटर पर टोल वसूला जाता है। देशभर में 1,000 से अधिक टोल प्लाजा हैं, जहां अक्सर लंबी कतारें लग जाती हैं।
खासकर तब जब वाहन में FASTag (फास्टैग) न हो या उसका खाता निष्क्रिय या ब्लॉक हो, तो यात्रियों को अधिक इंतजार करना पड़ता है।
फिलहाल देश के लगभग 1.5 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे नेटवर्क में से करीब 45,000 किलोमीटर पर टोल वसूला जाता है। देशभर में 1,000 से अधिक टोल प्लाजा हैं, जहां अक्सर लंबी कतारें लग जाती हैं।
खासकर तब जब वाहन में FASTag (फास्टैग) न हो या उसका खाता निष्क्रिय या ब्लॉक हो, तो यात्रियों को अधिक इंतजार करना पड़ता है।
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नया सिस्टम कैसे काम करेगा?
सरकार की योजना के अनुसार, भौतिक टोल बैरियर हटाकर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक लागू की जाएगी।
हाईवे पर लगे कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे और तय दूरी के अनुसार टोल राशि की गणना कर लेंगे। इस तकनीक को लागू करने के लिए कुछ स्थानों पर टेंडर भी जारी किए जा चुके हैं। और इसे धीरे-धीरे पूरे देश में विस्तार देने की योजना है।
सरकार की योजना के अनुसार, भौतिक टोल बैरियर हटाकर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक लागू की जाएगी।
हाईवे पर लगे कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे और तय दूरी के अनुसार टोल राशि की गणना कर लेंगे। इस तकनीक को लागू करने के लिए कुछ स्थानों पर टेंडर भी जारी किए जा चुके हैं। और इसे धीरे-धीरे पूरे देश में विस्तार देने की योजना है।
क्या FASTag की जरूरत खत्म हो जाएगी?
नहीं। मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नई कैमरा-आधारित प्रणाली लागू होने के बाद भी फास्टैग की आवश्यकता बनी रहेगी।
टोल की राशि मौजूदा भुगतान व्यवस्था के जरिए ही कटेगी। यानी कैमरा केवल वाहन की पहचान और दूरी का निर्धारण करेगा, जबकि भुगतान प्रक्रिया फास्टैग के माध्यम से ही पूरी होगी।
नहीं। मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नई कैमरा-आधारित प्रणाली लागू होने के बाद भी फास्टैग की आवश्यकता बनी रहेगी।
टोल की राशि मौजूदा भुगतान व्यवस्था के जरिए ही कटेगी। यानी कैमरा केवल वाहन की पहचान और दूरी का निर्धारण करेगा, जबकि भुगतान प्रक्रिया फास्टैग के माध्यम से ही पूरी होगी।
भुगतान प्रक्रिया में क्या बदलाव होगा?
चूंकि कई फास्टैग खाते डिजिटल वॉलेट से जुड़े होते हैं, सीधे बैंक खाते से नहीं, इसलिए मौजूदा कटौती प्रणाली जारी रहेगी। नई तकनीक केवल टोल वसूली को अधिक तेज और बाधारहित बनाने के लिए जोड़ी जा रही है।
आम यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है?
नई व्यवस्था से टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत कम होगी, लंबी कतारों में कमी आएगी और यात्रा समय घटेगा। हालांकि फास्टैग फिलहाल अनिवार्य बना रहेगा, इसलिए वाहन चालकों को अपना फास्टैग सक्रिय और रिचार्ज रखना जरूरी होगा।
चूंकि कई फास्टैग खाते डिजिटल वॉलेट से जुड़े होते हैं, सीधे बैंक खाते से नहीं, इसलिए मौजूदा कटौती प्रणाली जारी रहेगी। नई तकनीक केवल टोल वसूली को अधिक तेज और बाधारहित बनाने के लिए जोड़ी जा रही है।
आम यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है?
नई व्यवस्था से टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत कम होगी, लंबी कतारों में कमी आएगी और यात्रा समय घटेगा। हालांकि फास्टैग फिलहाल अनिवार्य बना रहेगा, इसलिए वाहन चालकों को अपना फास्टैग सक्रिय और रिचार्ज रखना जरूरी होगा।