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Niti Aayog: मिडिल क्लास के लिए खुशखबरी; बाइक से कार पर शिफ्ट होना होगा आसान, नीति आयोग ने सरकार को दी ये सलाह
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुयश पांडेय
Updated Wed, 11 Feb 2026 11:16 AM IST
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सार
NITI Aayog Net Zero Target By 2070: नीति आयोग ने अपनी नई रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि भारत को छोटी और ईंधन-कुशल कारों को बढ़ावा देना चाहिए ताकि मध्यम वर्ग के लिए कार खरीदना आसान हो सके और साथ ही प्रदूषण भी कम हो। आयोग ने CAFE नीति में बदलाव की सिफारिश की है, जिससे कार कंपनियों को कम ईंधन खपत और कम उत्सर्जन वाली गाड़ियां बनाने के लिए प्रोत्साहन मिले।
नेट जीरो भारत लक्ष्य 2070 (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एक्स
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विस्तार
भारत सरकार की योजनाओं को दिशा देने वाली संस्था नीति आयोग अब देश की सड़कों पर छोटी और ईंधन-कुशल कारों की संख्या बढ़ाना चाहती है। हाल ही में आयोग ने 'सनेरियोज टुवर्ड्स विकसित भारत एंड नेट जीरो' नाम से एक खास रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि भारत को भी अब दुनिया के बड़े देशों की राह पर चलना चाहिए और ऐसी छोटी कारों को बढ़ावा देना चाहिए जो पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाती हैं। इसके लिए नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि सरकार को अपनी 'CAFE' (कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) नीति में बदलाव करना चाहिए।
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भारत जैसे देश में, जहां सड़कों पर भारी ट्रैफिक और हवा में बढ़ता प्रदूषण बड़ी समस्याएं हैं, वहां छोटी कारों को बढ़ावा देना एक बहुत ही समझदारी भरा फैसला है। इससे दो बड़े फायदे होंगे: एक तो आम आदमी का अपनी कार होने का सपना सच हो सकेगा, और दूसरा, हमारे पर्यावरण को भी नुकसान कम पहुंचेगा।
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इस योजना के खास मकसद
इसका मकसद केवल गाड़ियों की संख्या बढ़ाना नहीं है बल्कि देश के मध्यम वर्ग की जरूरतों और पर्यावरण के बीच एक संतुलन बनाना है। आयोग चाहता है कि सरकार अपनी CAFE (कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) नीतियों में ऐसे बदलाव करे जिससे कार कंपनियों को छोटी और ईंधन-कुशल कारें बनाने के लिए प्रोत्साहन मिले। नीति आयोग की इस पूरी पहल के पीछे ये तीन सबसे बड़े कारण हैं:
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- आम आदमी के बजट में कार: भारत में अभी भी बहुत कम लोगों के पास अपनी कार है (हर 1,000 में से सिर्फ 33 लोगों के पास)। मध्यम वर्ग के लिए कार खरीदना आज भी एक बड़ी बात है। आयोग चाहता है कि जो लोग पहली बार बाइक छोड़कर कार खरीदने की सोच रहे हैं उनके लिए छोटी कारें इतनी सस्ती हों कि वे उन्हें आसानी से खरीद सकें।
- प्रदूषण से राहत: छोटी और हल्की कारें कम धुआं छोड़ती हैं और पेट्रोल-डीजल की भी बचत करती हैं। भारत ने लक्ष्य रखा है कि 2070 तक देश में प्रदूषण का स्तर 'नेट-जीरो' कर दिया जाए। यह कदम उसी सपने को पूरा करने में मदद करेगा।
- ट्रैफिक और पार्किंग की टेंशन कम: शहरों में बढ़ती भीड़ एक बड़ी समस्या है। छोटी कारें सड़क पर कम जगह घेरती हैं, जिससे ट्रैफिक जाम कम लगेगा और तंग गलियों या छोटी जगहों पर पार्किंग करना भी आसान हो जाएगा।
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प्रदूषण मुक्त भारत का लक्ष्य और भविष्य की योजनाएं
भारत ने वैश्विक मंच पर यह संकल्प लिया है कि साल 2070 तक देश को 'नेट-जीरो' उत्सर्जन वाला राष्ट्र बनाया जाएगा। इसका मतलब है कि हम वातावरण में जितनी ग्रीनहाउस गैसें छोड़ेंगे उतनी ही तकनीक और प्रकृति के जरिए सोख ली जाएंगी। इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए परिवहन क्षेत्र में बदलाव लाना सबसे जरूरी है क्योंकि सड़कों पर दौड़ती गाड़ियां प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा पैदा करती हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में एक साफ रास्ता दिखाया गया है कि आने वाले वर्षों में भारत को प्रदूषण मुक्त कैसे बनाया जाए:- पूरी तरह इको-फ्रेंडली गाड़ियां: ऐसी उम्मीद है कि साल 2055 तक बाजार में बिकने वाली हर नई कार ऐसी होगी जो बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं फैलाती (जैसे इलेक्ट्रिक गाड़ियां)। इससे फायदा यह होगा कि 2070 तक सड़क पर चलने वाली पुरानी गाड़ियां भी धीरे-धीरे हट जाएंगी और प्रदूषण का स्तर शून्य हो जाएगा।
- साफ ईंधन का इस्तेमाल: रिपोर्ट में 'बायोफ्यूल' (जैसे इथेनॉल मिक्स पेट्रोल) के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। साथ ही सुझाव दिया गया है कि सरकार जब कंपनियों को छूट दे तो यह देखे कि गाड़ी बनने से लेकर उसके सड़क पर चलने तक कुल कितना प्रदूषण कम हो रहा है।
- नियमों में सख्ती: आयोग का कहना है कि अभी गाड़ियों को जो ढील दी जा रही है उसे धीरे-धीरे खत्म कर देना चाहिए। भविष्य में नियमों को सख्त किया जाएगा ताकि कार बनाने वाली कंपनियां मजबूर हों कि वे केवल ऐसी ही कारें बनाएं जो पर्यावरण को जरा भी नुकसान न पहुंचाएं।
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भारत जैसे देश में, जहां सड़कों पर भारी ट्रैफिक और हवा में बढ़ता प्रदूषण बड़ी समस्याएं हैं, वहां छोटी कारों को बढ़ावा देना एक बहुत ही समझदारी भरा फैसला है। इससे दो बड़े फायदे होंगे: एक तो आम आदमी का अपनी कार होने का सपना सच हो सकेगा, और दूसरा, हमारे पर्यावरण को भी नुकसान कम पहुंचेगा।
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