हाल ही दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनी बजाज ऑटो को अपने पॉपुलर इलेक्ट्रिक स्कूटर बजाज चेतक की बुकिंग बंद करनी पड़ी। चेतक की भारी मात्रा में बुकिंग होने के चलते कंपनी को ये फैसला लेना पड़ा। लेकिन हर कंपनी के इलेक्ट्रिक स्कूटर को जनता से ऐसा रेस्पॉन्स मुश्किल से ही मिलता है। इसकी वजह होती है बिल्ड क्वॉलिटी और फीचर्स, जो इसे जनता में पॉपुलर बनाते हैं। अगर आप भी नया इलेक्ट्रिक स्कूटर लेने की सोच रहे हैं, तो रखें इन बातों का ध्यान...
शॉपिंग टिप्स: नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का है विचार, तो शोरूम विजिट करते वक्त रखें इन जरूरी बातों का ख्याल
डिजाइन
वाहन का डिजाइन ऐसा हो, जो हर किसी मन मोह ले, चाहे वह कार, बाइक या स्कूटर ही क्यों न हो। एक अच्छे डिजाइन वाले स्कूर में न केवल अच्छा लेग स्पेस मिलता है, बल्कि शानदार बूट स्टोरेज भी मिलता है। वहीं उसकी बिल्ड क्वॉलिटी भी अच्छी होती है। अगर आप इलेक्ट्रिक स्कूटर खोज रहे हैं, तो उसकी बिल्ड क्वॉलिटी जरूर चेक करें। साथ ही, देखें कि स्कूटर में बैटरी रखने का स्पेस इस तरह से डिजाइन हो, ताकि पानी की पहुंच वहां तक न हो सके। बैटरी को IP65/67 रेटिंग मिली हो।
फीचर्स
आम पेट्रोल स्कूटरों को मुकाबले इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में काफी फीचर मिलते हैं। इनमें स्पीड लॉकिंग सिस्टम, एप कनेक्टिविटी, साइड स्टैंड इंडीकेटर, ई-एबीएस, डिस्क ब्रेक्स, यूएसबी चार्जिंग पोर्ट जैसे फीचर आते हैं। इसके अलावा गाड़ी की परफॉर्मेंस के साथ, राइडिंग पैटर्न, ट्रिप इंफॉरमेंशन, चार्जिंग परसेंटेज, जियो फेंसिंग और जीपीएस जैसे फीचर भी मिलते हैं।
रेंज
नई इलेक्ट्रिक बाइक या स्कूटर खरीदते समय ध्यान रखें कि वह फुल चार्ज में कितनी दूरी तय करता है। यह रेंज 60 किमी से लेकर 150 किमी तक हो सकती है। वहीं कई इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में स्पोर्ट मोड, इको मोड होते है, हर मोड में परफॉरमेंस का अंतर होता है। वहीं उसका पिकअप भी चेक करें। इलेक्ट्रिक वाहनों में आने वाली मोटर्स जल्दी टॉर्क पकड़ती है, जिससे व्हीकल जल्दी पिकअप पकड़ता है। इसके अलावा कई कंपनियां रीजेनरेटिव ब्रेकिंग का भी फीचर देती हैं, इससे बैटरी के चार्ज और डिस्चार्ज को कंट्रोल करने में मदद मिलती है और वाहन की एफिशिएंसी बढ़ जाती है।
इलेक्ट्रिक बैटरी
सभी लेटेस्ट दोपहिया वाहनों में लीथियम-आयन बैटरी लगी होती है। पुरानी पीढ़ी के वाहनों में लेड-एसिड वाली बैटरियां आती थीं, लेकिन अब उनकी जगह पर लीथियम बैटरियां लाई जा रही हैं। लेड-एसिड वाले वेरियंट 15 से 25 फीसदी तक सस्ते हैं। वहीं लीथियम आयन बैटरी की लाइफ जहां पांच साल तक होती है, तो लेड-एसिड बैटरी की लाइफ दो साल तक होती है। लेड-एसिड बैटरी पर्यावरण के लिए भी घातक है। साथ ही, बैटरी की वारंटी की भी जांच करें। कई कंपनियां बैटरी पैक पर अतिरिक्त वारंटी भी देती हैं। जैसे कंपनियां पांच साल या एक लाख किमी की वारंटी देती हैं। अगर बैटरी पांच साल पहले ही 100 फीसदी चार्ज होने की बजाय 80 फीसदी होती है, तो उसे वारंटी के तहत बदला जा सकता है।