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Electric Vehicles: वायु प्रदूषण संकट को सुलझाने में ईवी क्यों हैं अहम, दिवाली के मौके पर विशेषज्ञों की राय
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 22 Oct 2022 06:49 PM IST
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air pollution
- फोटो : istock
हर साल उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में, खासतौर से दिल्ली एवं आसपास के इलाकों में त्योहारी सीजन का स्वागत वायु की खराब होती गुणवत्ता के साथ होता है। हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण 317 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के एक अध्ययन के मुताबिक, 2019 में दिल्ली में कुल वायु प्रदूषण में 23 प्रतिशत हिस्सेदारी परिवहन क्षेत्र की रही थी। इस स्थिति को देखते हुए टेरी, इंटरनेशनल काउंसिल फॉर क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) और अर्बन वर्क्स इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों से ही वायु प्रदूषण के संकट का टिकाऊ समाधान हो सकता है।
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Electric Vehicles
- फोटो : For Reference Only
आईसीसीटी के इंडिया मैनेजिंग डायरेक्टर अमित भट्ट ने कहा, "इस साल बारिश एवं अन्य अनुकूल परिस्थितियों ने सितंबर और अक्तूबर में अब तक वायु की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखा, लेकिन अब स्थिति फिर रेड जोन की तरफ बढ़ रही है। समय-समय पर पराली जलने और पटाखों के कारण होने वाले प्रदूषण से, खास तौर पर सर्दियों में, उत्तर भारत की वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है। हालांकि दिल्ली की वायु गुणवत्ता को ध्यान से देखें तो पता चलता है कि वायु प्रदूषण यहां एक सतत समस्या है। एआरएआई और टेरी द्वारा 2018 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया था कि दिल्ली में गाड़ियां वायु प्रदूषण का प्राथमिक स्रोत हैं और करीब 40 प्रतिशत पीएम 2.5 उत्सर्जन इनसे होता है। इसलिए दिल्ली की हवा को स्वच्छ रखने के लिए परिवहन व्यवस्था को स्वच्छ करने की जरूरत है।"
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Electric Car
- फोटो : Unsplash
टेरी के सीनियर विजिटिंग फेलो आईवी राव का कहना है कि खराब होती वायु गुणवत्ता और दिवाली के आसपास बढ़ता प्रदूषण इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ने की जरूरत को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, "दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता बहुत खराब है। विशेष रूप से सर्दियों में स्थिति और खराब हो जाती है। इस दौरान पीएम 2.5 का स्तर साल के औसत स्तर से तीन से चार गुना हो जाता है। टेरी की सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडी के अनुसार, दिल्ली में 2019 में कुल वायु प्रदूषण में 23 प्रतिशत हिस्सेदारी परिवहन क्षेत्र की थी। दिवाली के दौरान फूटने वाले पटाखे इस प्रदूषण को बढ़ाकर वायु गुणवत्ता को और खराब कर देते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों में ऐसा कोई उत्सर्जन नहीं होता है और दिल्ली जैसे शहरों को इसी की जरूरत है।"
इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन
- फोटो : अमर उजाला
हालिया अध्ययन के अनुसार, 2030 तक 30 प्रतिशत दोपहिया वाहन इलेक्ट्रिक होंगे। आईसीसीटी की रिसर्चर (कंसल्टेंट) शिखा रोकड़िया ने कहा, "भारत दुनिया का सबसे बड़ा दोपहिया वाहन बाजार है और इसे देखते हुए यहां दोपहिया वाहनों को बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक करना ऐसे उत्सर्जन को जीरो के करीब पहुंचाने के लिए लागत के हिसाब से सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।"
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Ather 450X Gen 3 Electric Scooter
- फोटो : Ather Energy
भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बाजार के बारे में टेरी के राव का कहना है कि, "भारत में कुल वाहन बिक्री में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी दोपहिया वाहनों की है। इनकी लागत और सरकार की फास्टर एडोप्शन ऑफ मैन्यूफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाइब्रिड व्हीकल (FAME) स्कीम के तहत मिलने वाले इंसेटिव के कारण इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन ग्राहकों के बड़े वर्ग को आकर्षित कर रहे हैं। आगे चलकर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री को और रफ्तार मिलेगी, जिससे 2030 तक इनकी हिस्सेदारी संभवत: 30 प्रतिशत से ज्यादा हो जाएगी।"