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National Highways: क्या आपको पता है भारत में नेशनल हाईवे का नाम कैसे रखा जाता है, यहां जानें
Sat, 30 Mar 2024 07:21 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 30 Mar 2024 07:21 PM IST
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National Highways
- फोटो : Amar Ujala
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भारत का फैला राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवे) का जाल देश की परिवहन प्रणाली (ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम) की लाइफलाइन है। हर नेशनल हाईवे को एक नबंर दिया गया है, जो उसकी एक अनोखी भौगोलिक कहानी बया करता है। इन नंबरों को तय करने के पीछे के तरीके को समझने से उस जटिल प्लानिंग का पता चलता है जो इस विशाल सड़क नेटवर्क को आकार देता है।
National Highways
- फोटो : For Reference Only
एनएचएआई द्वारा एक भौगोलिक जुगलबंदी
राष्ट्रीय राजमार्गों को नंबर देने का एक तार्किक पैटर्न होता है। सभी महत्वपूर्ण राजमार्गों के लिए, एक या दो अंकों की संख्या का इस्तेमाल किया जाता है।
उत्तर से दक्षिण की ओर जाने वाले राजमार्गों के लिए, सम संख्याएं (ईवन नंबर) प्रमुख होती हैं। और ये संख्याएं पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ते हुए ऊपर की ओर जाती हैं। इसका मतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग 2 (NH-2) पूर्वोत्तर राज्यों में पाया जाता है। जबकि NH-68 राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में स्थित है।
राष्ट्रीय राजमार्गों को नंबर देने का एक तार्किक पैटर्न होता है। सभी महत्वपूर्ण राजमार्गों के लिए, एक या दो अंकों की संख्या का इस्तेमाल किया जाता है।
उत्तर से दक्षिण की ओर जाने वाले राजमार्गों के लिए, सम संख्याएं (ईवन नंबर) प्रमुख होती हैं। और ये संख्याएं पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ते हुए ऊपर की ओर जाती हैं। इसका मतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग 2 (NH-2) पूर्वोत्तर राज्यों में पाया जाता है। जबकि NH-68 राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में स्थित है।
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यह ध्यान दिया जा सकता है कि पूर्व से पश्चिम की ओर जाने वाले राजमार्ग विषम संख्याओं (ऑड नंबर) वाले सिम्फनी का प्रदर्शन करते हैं। इन विषम संख्याओं का क्रम पूर्व से पश्चिम की ओर संरेखित (एलाइन) होता है। जम्मू और कश्मीर के उत्तरी क्षेत्रों में स्थित NH-8, तमिलनाडु के दक्षिणी हिस्से को सुशोभित करने वाले NH-87 के बिल्कुल विपरीत है।
इसके अलावा, पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर, उत्तर से दक्षिण की ओर चलने वाले राजमार्गों के संख्यात्मक मान बढ़ते हैं। उदाहरण के लिए, यदि NH-4 अपनी उत्तर-दक्षिण यात्रा पर किसी पूर्वी राज्य को सुशोभित करता है, तो मध्य य पश्चिमी राज्य में इसका समकक्ष अनिवार्य रूप से चार से ज्यादा संख्या वाला होगा।
इसके अलावा, पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर, उत्तर से दक्षिण की ओर चलने वाले राजमार्गों के संख्यात्मक मान बढ़ते हैं। उदाहरण के लिए, यदि NH-4 अपनी उत्तर-दक्षिण यात्रा पर किसी पूर्वी राज्य को सुशोभित करता है, तो मध्य य पश्चिमी राज्य में इसका समकक्ष अनिवार्य रूप से चार से ज्यादा संख्या वाला होगा।
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सहायक राजमार्ग क्या हैं?
तीन अंकों वाली संख्या वाले राजमार्गों को सहायक राजमार्ग (सब्सिडियरी हाईवे) के रूप में जाना जाता है, जो अपने मूल राष्ट्रीय राजमार्गों की जटिल शाखाएं बनाते हैं।
उदाहरण के लिए, एक्सटेंशन 244, 144, और 344 मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग 44 की शाखाएं हैं। इन सहायक राजमार्ग संख्याओं में पहला अंक उनकी दिशात्मक अभिविन्यास (डायरेक्शनल ओरिएंटेशन) को बताता है। विषम प्रारंभिक अंक पूर्व-पश्चिम प्रक्षेपवक्र (ईस्ट टू वेस्ट ट्रेजेक्ट्री) का इशारा करते हैं। जबकि सम अंक उत्तर-दक्षिण अभिविन्यास (ओरिएंटेशन) को दर्शाते हैं।
तीन अंकों वाली संख्या वाले राजमार्गों को सहायक राजमार्ग (सब्सिडियरी हाईवे) के रूप में जाना जाता है, जो अपने मूल राष्ट्रीय राजमार्गों की जटिल शाखाएं बनाते हैं।
उदाहरण के लिए, एक्सटेंशन 244, 144, और 344 मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग 44 की शाखाएं हैं। इन सहायक राजमार्ग संख्याओं में पहला अंक उनकी दिशात्मक अभिविन्यास (डायरेक्शनल ओरिएंटेशन) को बताता है। विषम प्रारंभिक अंक पूर्व-पश्चिम प्रक्षेपवक्र (ईस्ट टू वेस्ट ट्रेजेक्ट्री) का इशारा करते हैं। जबकि सम अंक उत्तर-दक्षिण अभिविन्यास (ओरिएंटेशन) को दर्शाते हैं।
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पहचान को और सुव्यवस्थित करने के लिए, सहायक राजमार्ग अपनी तीन अंकों की संख्या के भीतर अक्षरों (ए, बी, सी या डी) का इस्तेमाल करते हैं। ये अक्षर सावधानीपूर्वक विभिन्न सेक्शन के बारे में बताते हैं, जिससे इन सहायक सड़क मार्गों के साथ स्पेसिफिक रूट (विशिष्ट मार्गों) के बारे में बताना आसान हो जाता है।