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EV: इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से भारत तेल आयात बिल पर बचा सकता है 9.17 लाख करोड़ रुपये! रिपोर्ट में दावा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 29 Apr 2025 08:46 PM IST
सार
अगर भारत के 44 सबसे बड़े शहरों में, जिनकी आबादी 10 लाख या उससे ज्यादा है, पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल या डीजल) से चलने वाली गाड़ियों की जगह पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपना लिए जाएं, तो इससे देश को करीब 106.6 अरब डॉलर यानी 9.17 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम तेल आयात बिल की बचत हो सकती है।
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Delhi Traffic
- फोटो : PTI
अगर भारत के 44 सबसे बड़े शहरों में, जिनकी आबादी 10 लाख या उससे ज्यादा है, पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल या डीजल) से चलने वाली गाड़ियों की जगह पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपना लिए जाएं, तो इससे देश को करीब 106.6 अरब डॉलर यानी 9.17 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम तेल आयात बिल की बचत हो सकती है। ये दावा किया गया है TERI (टेरी) (द एनर्जी एंड रिपोर्स इंस्टीट्यू) के एक नए अध्ययन में।
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प्रदूषण में जबरदस्त कमी
इस बदलाव से न सिर्फ पैसे की बचत होगी, बल्कि वातावरण में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। अध्ययन में बताया गया है कि अगर ऐसा ट्रांजिशन हो जाता है, तो 2035 तक हर दिन 11.5 टन PM2.5 जैसे खतरनाक प्रदूषक कम हो जाएंगे, और 61 मिलियन टन CO₂ (ग्रीनहाउस गैस) के बराबर उत्सर्जन भी घटेगा। यानी हवा साफ, सांसें आसान।
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पेट्रोल-डीजल की भारी बचत
TERI की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ट्रांजिशन करीब 51 अरब लीटर पेट्रोल और डीजल की खपत बचा सकता है। फिलहाल देश के इन 44 बड़े शहरों में करीब 49 लाख पुरानी गाड़ियां हैं, और 2030 तक इनकी संख्या बढ़कर 75 लाख तक पहुंच सकती है। यानी जितनी जल्दी बदलाव होगा, उतना अच्छा।
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इस बदलाव से न सिर्फ पैसे की बचत होगी, बल्कि वातावरण में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। अध्ययन में बताया गया है कि अगर ऐसा ट्रांजिशन हो जाता है, तो 2035 तक हर दिन 11.5 टन PM2.5 जैसे खतरनाक प्रदूषक कम हो जाएंगे, और 61 मिलियन टन CO₂ (ग्रीनहाउस गैस) के बराबर उत्सर्जन भी घटेगा। यानी हवा साफ, सांसें आसान।
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पेट्रोल-डीजल की भारी बचत
TERI की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ट्रांजिशन करीब 51 अरब लीटर पेट्रोल और डीजल की खपत बचा सकता है। फिलहाल देश के इन 44 बड़े शहरों में करीब 49 लाख पुरानी गाड़ियां हैं, और 2030 तक इनकी संख्या बढ़कर 75 लाख तक पहुंच सकती है। यानी जितनी जल्दी बदलाव होगा, उतना अच्छा।
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Traffic in Delhi
- फोटो : PTI
पुरानी डीजल बसें सबसे बड़ा खतरा
अध्ययन में ये भी सामने आया कि सबसे ज्यादा प्रदूषण डीजल से चलने वाली पुरानी बसें करती हैं। केवल इन्हीं पर उम्र की पाबंदी लगाने से ही PM2.5 का उत्सर्जन 50 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन 80 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इसलिए TERI ने एक स्टैंडर्ड प्लान सुझाया है, जिसमें 2030 से 2035 के बीच लगभग 1.14 करोड़ पुरानी गाड़ियों को हटाने की सिफारिश की गई है। इनके बदले या तो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स लाई जाएं या फिर ईवी और सीएनजी का कॉम्बिनेशन अपनाया जाए।
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अध्ययन में ये भी सामने आया कि सबसे ज्यादा प्रदूषण डीजल से चलने वाली पुरानी बसें करती हैं। केवल इन्हीं पर उम्र की पाबंदी लगाने से ही PM2.5 का उत्सर्जन 50 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन 80 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इसलिए TERI ने एक स्टैंडर्ड प्लान सुझाया है, जिसमें 2030 से 2035 के बीच लगभग 1.14 करोड़ पुरानी गाड़ियों को हटाने की सिफारिश की गई है। इनके बदले या तो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स लाई जाएं या फिर ईवी और सीएनजी का कॉम्बिनेशन अपनाया जाए।
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Electric Car Charging
- फोटो : Freepik
बेरोजगारी नहीं, रोजगार मिलेगा
इस बदलाव से लोगों को नौकरी भी मिल सकती है। अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि ईवी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में करीब 3.7 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। लेकिन अगर आधे पुराने वाहनों को सीएनजी में बदला गया, तो जरूरी 2,655 नए सीएनजी स्टेशन बनवाने होंगे, लेकिन उस स्थिति में सिर्फ 45,000 नौकरियां ही बन पाएंगी।
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इस बदलाव से लोगों को नौकरी भी मिल सकती है। अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि ईवी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में करीब 3.7 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। लेकिन अगर आधे पुराने वाहनों को सीएनजी में बदला गया, तो जरूरी 2,655 नए सीएनजी स्टेशन बनवाने होंगे, लेकिन उस स्थिति में सिर्फ 45,000 नौकरियां ही बन पाएंगी।
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Electric Car
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जरूरी है बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर
इतना बड़ा बदलाव तभी संभव है जब आधारभूत ढांचा मजबूत हो। TERI ने बताया कि इन 44 शहरों में कम से कम 45,000 पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन और 130 स्क्रैपिंग सेंटर्स बनाने होंगे। जिससे लोग आसानी से पुरानी गाड़ियों से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर शिफ्ट कर सकें।
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इतना बड़ा बदलाव तभी संभव है जब आधारभूत ढांचा मजबूत हो। TERI ने बताया कि इन 44 शहरों में कम से कम 45,000 पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन और 130 स्क्रैपिंग सेंटर्स बनाने होंगे। जिससे लोग आसानी से पुरानी गाड़ियों से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर शिफ्ट कर सकें।
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