वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की गति धीमी पड़ती नजर आ रही है। तीसरे सप्ताह मार्च तक कुल 8,600 किमी सड़क निर्माण हुआ, जबकि लक्ष्य 10,000 किमी का था। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने YSRCP के राज्यसभा सांसद गोल्ला बाबू राव के एक सवाल का जवाब देते हुए साझा किया।
NH: FY26 में धीमा पड़ा हाईवे निर्माण, 10000 Km लक्ष्य के मुकाबले 8600 Km बने, NHAI का लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 10,000 किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले, मार्च के तीसरे सप्ताह तक 8,600 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया है।
क्या घट गई है हाईवे निर्माण की गति?
ताजा आंकड़ों के अनुसार, निर्माण की औसत रफ्तार घटकर 23.74 किमी प्रतिदिन रह गई है।
यह पिछले वर्षों की तुलना में कम है-
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2024-25 में 29.21 किमी प्रतिदिन
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2023-24 में 33.83 किमी प्रतिदिन
सबसे तेज निर्माण 2020-21 में दर्ज किया गया था, जब 13,327 किमी हाईवे बनाए गए थे।
क्या NHAI ने अपना लक्ष्य पूरा किया?
जहां कुल निर्माण लक्ष्य से पीछे रहा, वहीं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बेहतर प्रदर्शन किया।
NHAI ने 5,313 किमी हाईवे का निर्माण किया, जो उसके 4,640 किमी के लक्ष्य से लगभग 15 प्रतिशत अधिक है।
खर्च और निवेश की स्थिति क्या रही?
NHAI का पूंजीगत व्यय 2,44,362 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो सरकार द्वारा निर्धारित 2,38,384 करोड़ रुपये के बजट से करीब 2.5 प्रतिशत अधिक है।
अतिरिक्त खर्च को NHAI ने अपने संसाधनों से पूरा किया।
हाईवे निर्माण में किन एजेंसियों की भूमिका होती है?
देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, रखरखाव और प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पास है।
इसके अलावा, सीमा और पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण का काम National Highways and Infrastructure Development Corporation Limited (राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड) संभालती है।
कुछ परियोजनाएं Central Public Works Department (केंद्रीय लोक निर्माण विभाग) और राज्य लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा भी पूरी की जाती हैं।
क्या आगे सुधार की उम्मीद है?
हालिया आंकड़े संकेत देते हैं कि कुल निर्माण गति में गिरावट आई है, लेकिन कुछ एजेंसियों के बेहतर प्रदर्शन से संतुलन बना हुआ है।
आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते निवेश और बेहतर समन्वय के साथ निर्माण की गति में सुधार की उम्मीद की जा रही है।