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World's Largest Car Theft: इतिहास की 'सबसे बड़ी कार डकैती' एक सरकार ने करवाई! जानें इसे कैसे दिया गया अंजाम
Sat, 11 Nov 2023 06:54 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 11 Nov 2023 06:54 PM IST
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One of Volvo's sedan cars from 1974
- फोटो : Social Media
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वह साल 1974 था और स्वीडिश सरकार ने उत्तर कोरिया के साथ एक समझौता किया था। जिसमें टैक्सियों के रूप में इस्तेमाल के लिए 1,000 वोल्वो 144 सेडान की खेप के साथ-साथ 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 5 अरब 83 करोड़ रुपये) से ज्यादा मूल्य की भारी मशीनरी भेजने के लिए कहा गया था। यह वह समय था जब उत्तर कोरिया की औद्योगिक अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही थी और उसे अन्य देशों से भी मदद मिल रही थी। हालांकि, उत्तर कोरिया 144 सेडान के लिए वोल्वो के प्रति अपनी वित्तीय देनदारी को पूरा करने में नाकाम रहा। और वास्तव में उनके लिए कभी भुगतान नहीं किया।
A Volvo Car In North Korea
- फोटो : Social Media
स्वीडिश एक्सपोर्ट क्रेडिट एजेंसी के मुताबिक, पिछले 49 वर्षों में 1,000 वोल्वो कारों पर ब्याज और अवैतनिक जुर्माना 322 मिलियन अमेरिकी डॉलर (22,000 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वीडिश सरकार अभी भी उत्तर कोरिया को हर साल दो बार अवैतनिक चालान नोटिस भेजती है। वाहनों का बैच, जो 1974 के समझौते का एक महत्वपूर्ण कंपोनेंट था, अब उस घटना के केंद्र में है जिसे इतिहास में 'सबसे बड़ी कार डकैती' माना जाता है। वोल्वो सेडान के लिए भुगतान का निपटान करने में विफलता ने दशकों से स्वीडन और उत्तर कोरिया के बीच राजनयिक और आर्थिक संबंधों पर तनाव पैदा कर दिया है।
Volvo Car
- फोटो : Volvo
इस मामले पर स्वीडिश सरकार के आधिकारिक बयान फिलहाल लंबित हैं। जिससे अंतरराष्ट्रीय समझौतों की विश्वसनीयता और ऐसे लेनदेन से जुड़े संभावित जोखिमों के बारे में अटकलों और चिंता की गुंजाइश बनी हुई है। यह घटना राजनयिक संबंधों की जटिलताओं पर रोशनी डालती है और अधूरे वित्तीय दायित्वों के नतीजों के बारे में सवाल उठाती है।
Still going strong. One of the Volvo's from yr 1974 still unpaid for by DPRK. Running as taxi in Chongjin w almost half million km on odo! pic.twitter.com/2FaMpnPow7
— Sweden in Pyongyang (@SwedenDPRK) October 21, 2016
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Volvo 144 Sedan Taxi
- फोटो : Volvo
वोल्वो 144 सेडान के बैच का ऑर्डर किम जोंग उन के दादा किम इल सुंग ने दिया था। बाद में, स्वीडिश सरकार ने सार्वजनिक निधि से वोल्वो को पूरा भुगतान किया। लेकिन अभी भी उत्तर कोरिया से पैसा वापस लेने का इंतजार कर रही है। यह घटना उन चुनौतियों और अनिश्चितताओं की याद दिलाती है जो राजनयिक लेनदेन में पैदा हो सकती हैं। जिससे दोनों देशों को 1974 में वोल्वो और उत्तर कोरिया से जुड़े, जिसे अब ग्रैंड थेफ्ट ऑटो ने नाम से जाना जाता है, नतीजों से निपटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।