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बार-बार नहीं काटने पड़ेंगे RTO के चक्कर: 5 साल और बढ़ जाएगी इन गाड़ियों की उम्र; क्या है सरकार का नया प्लान?

Tue, 18 Aug 2026 02:07 PM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Tue, 18 Aug 2026 02:07 PM IST
सार

EV commercial vehicle permit: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ग्रीन और क्लीन फ्यूल से चलने वाले कमर्शियल वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नेशनल परमिट सिस्टम के तहत इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और नैचुरल गैस से चलने वाले कमर्शियल व्हीकल्स की उम्र सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही नेशनल परमिट रिन्यूअल और टेम्परेरी रजिस्ट्रेशन के नियमों को भी आसान बनाया जा रहा है। इस फैसले से किस तरह के वाहनों को फायदा मिलेगा और परमिट फीस पर क्या असर पड़ सकता है? यहां जानिए सबकुछ विस्तार से।

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Government Proposes 5-Year Extension EV, Hydrogen, CNG Commercial Vehicle Permits
कमर्शियल वाहनों के लिए बदलेंगे नियम - फोटो : amarujala.com

विस्तार

Commercial vehicle age limit India: केंद्र सरकार ने नेशनल परमिट सिस्टम को अधिक सुगम बनाने और देश में क्लीन-फ्यूल कमर्शियल ट्रांसपोर्ट को प्रोत्साहन देने के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें बैटरी, हाइड्रोजन फ्यूल और नेचुरल गैस से चलने वाले कमर्शियल वाहनों की मौजूदा उम्र सीमा में पांच साल की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। यह बदलाव नेशनल परमिट की प्रक्रिया को आसान बनाने, डिजिटल सिस्टम के इस्तेमाल को बढ़ाने और साफ-सुथरे कमर्शियल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने की दिशा में प्रस्तावित किया गया है। इतना ही नहीं मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट पर आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से 30 दिनों के भीतर सुझाव व आपत्तियां मांगी हैं।
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किन वाहनों की बढ़ेगी उम्र?
  • मौजूदा नियमों की बात करें तो नेशनल परमिट सिस्टम के तहत कुछ वाहनों के लिए 12 साल और 15 साल की उम्र सीमा निर्धारित है। लेकिन प्रस्तावित बदलाव के तहत बैटरी, हाइड्रोजन और नेचुरल गैस से चलने वाले पात्र वाहनों के लिए यह सीमा 17 साल और 20 साल की जा सकती है। यानी जो योग्य ग्रीन कमर्शियल वाहन होंगे उनकी मौजूदा व्यवस्था की तुलना में पांच साल अतिरिक्त परिचालन अवधि मिल सकती है।
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  • हालांकि, यहां पर ध्यान देना वाली बात है कि यह बदलाव सभी कमर्शियल वाहनों पर लागू नहीं होगा। प्रस्ताव केवल नेशनल परमिट सिस्टम के तहत आने वाले कुछ विशेष प्रकार के बैटरी, हाइड्रोजन और नेचुरल गैस वाले वाहनों के लिए है।
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क्या अब पांच साल तक का परमिट ऑथराइजेशन चुनने का विकल्प?
  • इसी के साथ सरकार ने नेशनल परमिट धारकों के लिए एक और बदलाव प्रस्तावित किया है। इसके तहत हर साल परमिट रिन्यू कराने के बजाय पांच साल तक के लिए ऑथराइजेशन लेने का विकल्प दिया जा सकता है।
  • हालांकि, शुल्क में किसी प्रकार को कोई बदलाव नहीं किया गया है। मौजूदा प्रस्ताव के मुताबिक सालाना फीस 16,500 ही रहेगी। ऐसे में पांच साल के ऑथराइजेशन के लिए कुल फीस 82,500 हो सकती है। इससे परमिट धारकों को हर साल अलग से रिन्यूअल प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है।

वाहन डेटाबेस से कम होगी कागजी कार्रवाई
  •  इतना ही नहीं प्रस्ताव में डेटाबेस के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात भी कही गई है। इसका उद्देश्य वाहन और परमिट से जुड़ी जानकारी को डिजिटल तरीके से सत्यापित करना और कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करना है। इससे नेशनल परमिट से जुड़ी प्रक्रियाओं को ज्यादा तेज और आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
  • ड्राफ्ट में टेम्पररी रजिस्ट्रेशन के नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव है। यानी बिना बॉडी वाले चेसिस को उसकी जारी होने की तारीख से छह महीने तक का टेम्पररी रजिस्ट्रेशन दिया जा सकता है।
  • अगर चेसिस बॉडी फिटिंग के लिए या मालिक के नियंत्रण से बाहर किसी कारण से छह महीने से ज्यादा समय तक वर्कशॉप में रहता है, तो रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी आवेदन और तय फीस मिलने पर इसकी वैधता को एक बार में 30 दिन तक बढ़ा सकती है।
  • इसके अलावा ड्राफ्ट में पूरी तरह तैयार वाहनों को अडैप्टेड वाहनों में बदलने या डीलर के राज्य से अलग किसी दूसरे राज्य में रजिस्ट्रेशन कराने की स्थिति में टेम्पररी रजिस्ट्रेशन की अवधि 45 दिन रखने का प्रस्ताव है। इससे वाहन को दूसरे राज्य में ले जाकर संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के लिए सीमित समय की सुविधा मिल सकेगी।



क्या जानकारी मांगी जाएगी?

यह भी कहा जा रहा है कि डिजिटल ट्रैकिंग और सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से वाहन रजिस्ट्रेशन और परमिट फॉर्म में अब कुछ अतिरिक्त तकनीकी डेटा और वाहन संबंधी जानकारियां मांगी जाएंगी।


कब से लागू होंगे नियम?
ध्यान रखें कि फिलहाल यह केवल प्रस्तावित नियम है। इन्हें अभी अंतिम नियम नहीं माना जा सकता है। MoRTH ने नोटिफिकेशन सार्वजनिक होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। इस अवधि के दौरान मिले सुझावों के आधार पर ही प्रस्ताव में बदलाव हो सकेंगे और उसके बाद ही अंतिम नियम जारी किए जा सकते हैं।
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