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Republic Day 2023: कहीं आपने गाड़ी में गलत तरीके से तो नहीं लगाया तिरंगा? जाना पड़ सकता है जेल, जानें नियम
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 26 Jan 2023 09:40 AM IST
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तिरंगा
- फोटो : i stock
Republic Day 2023: देश 26 जनवरी को अपना 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। वर्ष 1950 में इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था और देश एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बन गया था। एक लोकतंत्रिक देश में नागरिकों को कई अधिकार मिलते हैं और साथ ही नागरिकों की कुछ जिम्मेदारी भी होती है। आजादी का दिन हो या गणतंत्र दिवस निजी वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज लगा होने का नजारा सड़कों पर आमतौर पर देखा जा सकता है। वैसे तो संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत राष्ट्र ध्वज तिरंगे को फहराने का अधिकार देश के हर नागरिक को है। लेकिन वाहन में इसे गलत तरीके से लगाना उन्हें बड़ी मुसीबत में भी डाल सकता है।
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तिरंगा रैली
- फोटो : अमर उजाला
देशभक्ति के उत्साह के बीच, लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि तिरंगे के बारे में कुछ नियम हैं, और इसे कहीं भी नहीं लगाया जा सकता है। शायद ही किसी को याद हो कि इस तरह का कार्य भारत के नेशनल फ्लैग कोड (राष्ट्रीय ध्वज संहिता) के तहत एक दंडनीय अपराध है, और अगर अपराध के लिए मामला दर्ज किया जाता है तो वह जेल में भी जा सकते हैं और उनको तीन साल तक की सजा हो सकती है। यहां हम आपको उन वजहों के बारे में बता रहे हैं कि आखिर यह क्यों एक दंडनीय अपराध है।
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संसद
- फोटो : ANI
तिरंगा लगाने का इन्हें है विशेषाधिकार
भारत ध्वज संहिता नियम कहता है कि सिर्फ कुछ संवैधानिक प्रमुखों को अपने वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का विशेष विशेषाधिकार है। इन गणमान्य व्यक्तियों में भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, राज्यपाल और उपराज्यपाल, प्रधान मंत्री और अन्य कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्य के कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। अन्य लोगों में लोकसभा और राज्यसभा के स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, विधान सभाओं और परिषदों के स्पीकर, भारत के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश और विदेशों में भारतीय मिशन पदों के अध्यक्ष शामिल हैं।
भारत ध्वज संहिता नियम कहता है कि सिर्फ कुछ संवैधानिक प्रमुखों को अपने वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का विशेष विशेषाधिकार है। इन गणमान्य व्यक्तियों में भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, राज्यपाल और उपराज्यपाल, प्रधान मंत्री और अन्य कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्य के कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। अन्य लोगों में लोकसभा और राज्यसभा के स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, विधान सभाओं और परिषदों के स्पीकर, भारत के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश और विदेशों में भारतीय मिशन पदों के अध्यक्ष शामिल हैं।
तिरंगा झंडा
- फोटो : अमर उजाला
यहां नहीं फहरा सकते तिरंगा
नागरिकों को घर पर तिरंगा फहराकर या हाथ में लेकर अपने राष्ट्रवादी उत्साह का प्रदर्शन करने की अनुमति है। लेकिन निजी वाहनों पर गलत तरीके से तिरंगा फहराना अपराध है। भारत ध्वज संहिता का उल्लंघन राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 के अपमान की रोकथाम के तहत दंडनीय है। धारा 3.23 राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शन का कैसे दुरुपयोग हो जाता है उसके बारे में बताता है, इसमें कहा गया है कि, "झंडे को वाहन, ट्रेन या नाव के ऊपर, किनारे और पीछे नहीं लपेटा जाएगा।"
नागरिकों को घर पर तिरंगा फहराकर या हाथ में लेकर अपने राष्ट्रवादी उत्साह का प्रदर्शन करने की अनुमति है। लेकिन निजी वाहनों पर गलत तरीके से तिरंगा फहराना अपराध है। भारत ध्वज संहिता का उल्लंघन राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 के अपमान की रोकथाम के तहत दंडनीय है। धारा 3.23 राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शन का कैसे दुरुपयोग हो जाता है उसके बारे में बताता है, इसमें कहा गया है कि, "झंडे को वाहन, ट्रेन या नाव के ऊपर, किनारे और पीछे नहीं लपेटा जाएगा।"
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national flag
- फोटो : For Reference Only
वाहन में ऐसे फहराएं तिरंगा
धारा 3.12 के तहत जो राष्ट्रीय ध्वज के सही प्रदर्शन के तरीकों के बारे में बताता है, में कह गया है कि, "जब एक मोटर कार पर झंडा अकेला प्रदर्शित किया जाता है, तो उसे एक डंडे (स्टाफ) से फहराया जाना चाहिए, जिसे या तो बोनट के सामने बीचो-बीच पर या कार के सामने दाहिनी ओर मजबूती से लगा हुआ होना चाहिए।"
धारा 3.12 के तहत जो राष्ट्रीय ध्वज के सही प्रदर्शन के तरीकों के बारे में बताता है, में कह गया है कि, "जब एक मोटर कार पर झंडा अकेला प्रदर्शित किया जाता है, तो उसे एक डंडे (स्टाफ) से फहराया जाना चाहिए, जिसे या तो बोनट के सामने बीचो-बीच पर या कार के सामने दाहिनी ओर मजबूती से लगा हुआ होना चाहिए।"