भारतीय सड़कों पर ट्रैफिक नियम लिंग के आधार पर अलग नहीं होते। आम धारणा के विपरीत, किसी महिला द्वारा वाहन चलाए जाने पर पुरुष पुलिसकर्मी के उसे रोकने पर कोई कानूनी रोक नहीं है। मोटर वाहन अधिनियम पूरी तरह जेंडर-न्यूट्रल है और सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य प्राधिकरण ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया है, जो पुरुष पुलिसकर्मियों को महिला ड्राइवर पर ट्रैफिक नियम लागू करने से रोके।
Fact Check: क्या महिला ड्राइवर को पुरुष पुलिसकर्मी रोक नहीं सकता? जानें वायरल मैसेज की सच्चाई
मोटर व्हीकल एक्ट जेंडर-न्यूट्रल है, और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की कोई भी गाइडलाइन पुरुष अधिकारियों को महिला ड्राइवरों पर ट्रैफिक नियम लागू करने से नहीं रोकती है।
कानून क्या साफ तौर पर अनुमति देता है?
भारतीय ट्रैफिक कानूनों के तहत पुरुष ट्रैफिक पुलिस अधिकारी किसी भी वाहन को रोक सकते हैं, चाहे उसे महिला ही क्यों न चला रही हो।
सभी राज्यों की पुलिस गाइडलाइंस में समान और निष्पक्ष प्रवर्तन पर जोर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के वे निर्देश, जिनमें महिला अधिकारी की मौजूदगी की बात की जाती है, गिरफ्तारी या हिरासत से जुड़े मामलों पर लागू होते हैं, रूटीन ट्रैफिक चेक पर नहीं।
यानि वाहन रोकना, कागजात देखना या चालान काटना गिरफ्तारी नहीं माना जाता।
इसके अलावा, ASI रैंक या उससे ऊपर के ट्रैफिक अधिकारी ही ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन के कागज मांग सकते हैं या चालान जारी कर सकते हैं। और यह नियम भी ड्राइवर के लिंग से जुड़ा नहीं है।
क्या रात में महिला ड्राइवर को रोकने पर कोई रोक है?
रात के समय कई राज्यों में जहां संभव हो, महिला पुलिसकर्मी तैनात करने की प्राथमिकता दी जाती है। यह व्यवस्था सुरक्षा और सार्वजनिक सहजता के लिए होती है, लेकिन यह कानूनी बाध्यता नहीं है।रात में भी पुरुष पुलिसकर्मी महिला ड्राइवर को रोक सकते हैं, बशर्ते कार्रवाई कानूनी, पेशेवर और केवल ट्रैफिक प्रवर्तन तक सीमित हो।
नवी मुंबई का मामला जिसने इस मिथक को तोड़ा
साल 2015 में नवी मुंबई पुलिस ने महिला ड्राइवरों द्वारा ट्रैफिक नियम तोड़ने के खिलाफ सख्त अभियान चलाया था। गोल्फ क्लब रोड पर तेज और लापरवाह ड्राइविंग के मामलों में पुरुष पुलिसकर्मियों ने ही चालान काटे, क्योंकि महिला कांस्टेबल कम संख्या में थीं।
पुलिस ने साफ कहा था, "कानून पुरुष और महिला में फर्क नहीं करता। यह भी सही नहीं है कि पुरुष पुलिस महिला द्वारा चलाए जा रहे वाहन को रोक नहीं सकता।"
इस कार्रवाई ने "सॉफ्ट पुलिसिंग" की धारणा को चुनौती दी और समान जवाबदेही का संदेश दिया।
महिला ड्राइवर अपने कौन-से अधिकार जानें?
जहां महिला ड्राइवरों को वैध ट्रैफिक चेक में सहयोग करना होता है, वहीं उनके अधिकार भी स्पष्ट हैं:
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अधिकृत अधिकारी मांगे तो शालीनता से कागज दिखाएं
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धारा 160 CrPC के तहत आपको अकेले थाने नहीं बुलाया जा सकता
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रात में महिला पुलिसकर्मी के बिना गिरफ्तारी नहीं हो सकती
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ट्रैफिक चालान और ई-चालान नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं
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यदि कोई अधिकारी बदसलूकी करे, तो विवरण नोट करें और 112 या राज्य पुलिस के शिकायत पोर्टल पर रिपोर्ट करें
ट्रैफिक कानून लिंग-तटस्थ हैं
भारत में ट्रैफिक कानून लिंग-तटस्थ हैं। पुरुष पुलिसकर्मी का महिला ड्राइवर को रोकना पूरी तरह कानूनी है। अहम यह है कि कार्रवाई नियमों के अनुसार, सम्मानजनक तरीके से और ट्रैफिक प्रवर्तन की सीमा में की जाए।