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JSW Motors: चीन से जुड़े नियम बने रोड़ा, जेएसडब्ल्यू मोटर्स के लिए Jetour T2 की लॉन्च क्यों बना चुनौती?
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 17 Feb 2026 10:31 PM IST
सार
भारत के पैसेंजर गाड़ी मार्केट में JSW मोटर्स की बड़ी एंट्री को शुरुआती झटका लगा है, क्योंकि रेगुलेटरी चिंताओं की वजह से इसकी बहुप्रतीक्षित Jetour T2 प्लग-इन हाइब्रिड SUV के लॉन्च में देरी हो सकती है।
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Jetour T2 hybrid SUV
- फोटो : Jetour
भारत के पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में JSW Motors (जेएसडब्ल्यू मोटर्स) की एंट्री को शुरुआती झटका लगा है। कंपनी की बहुप्रतीक्षित Jetour T2 (जेटौर टी2) प्लग-इन हाइब्रिड एसयूवी अब नियामकीय अड़चनों में फंसती नजर आ रही है। माना जा रहा है कि इस एसयूवी को 2026 के फेस्टिव सीजन में लॉन्च किया जाना था। लेकिन चीन से जुड़े निवेश और टेक्नोलॉजी नियमों के चलते इसकी लॉन्च टाइमलाइन अनिश्चित हो गई है।
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Jetour T2 hybrid SUV
- फोटो : Jetour
Jetour T2 को लेकर नियामकीय जांच क्यों बढ़ी?
Jetour T2 के सामने सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और नियामकीय निगरानी है। हालांकि जेएसडब्ल्यू महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की तैयारी कर रही है। लेकिन इस एसयूवी की सप्लाई चेन में चीनी कंपोनेंट्स और टेक्नोलॉजी की भूमिका अहम बताई जा रही है।
Jetour T2 की जड़ें चीन की ऑटोमेकर कंपनी से जुड़ी हैं। भारत की मौजूदा FDI नीति (प्रेस नोट 3) के तहत, भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से जुड़े निवेश या टेक्नोलॉजी सहयोग के लिए सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होती है।
नीति निर्माताओं को आशंका है कि कहीं घरेलू कंपनियों के जरिए चीनी ब्रांड्स को भारत में अप्रत्यक्ष प्रवेश न मिल जाए। इसी वजह से जेएसडब्ल्यू और उसके तकनीकी साझेदारों के बीच समझौते की गहन समीक्षा की जा रही है।
Jetour T2 के सामने सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और नियामकीय निगरानी है। हालांकि जेएसडब्ल्यू महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की तैयारी कर रही है। लेकिन इस एसयूवी की सप्लाई चेन में चीनी कंपोनेंट्स और टेक्नोलॉजी की भूमिका अहम बताई जा रही है।
Jetour T2 की जड़ें चीन की ऑटोमेकर कंपनी से जुड़ी हैं। भारत की मौजूदा FDI नीति (प्रेस नोट 3) के तहत, भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से जुड़े निवेश या टेक्नोलॉजी सहयोग के लिए सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होती है।
नीति निर्माताओं को आशंका है कि कहीं घरेलू कंपनियों के जरिए चीनी ब्रांड्स को भारत में अप्रत्यक्ष प्रवेश न मिल जाए। इसी वजह से जेएसडब्ल्यू और उसके तकनीकी साझेदारों के बीच समझौते की गहन समीक्षा की जा रही है।
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Jetour T2 hybrid SUV
- फोटो : Jetour
Jetour T2 को खास SUV क्यों माना जा रहा है?
अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो Jetour T2 भारतीय एसयूवी बाजार में एक अलग पहचान बना सकती है। इसे 30-40 लाख रुपये के प्रीमियम सेगमेंट में उतारने की योजना है, जहां फिलहाल पेट्रोल और डीजल मॉडल्स का दबदबा है।
यह एसयूवी प्लग-इन हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के साथ आएगी, जिसमें 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन, इलेक्ट्रिक मोटर और लगभग 26.7 kWh की बड़ी बैटरी होने की संभावना है। इससे 100 किमी से ज्यादा की ऑल-इलेक्ट्रिक रेंज मिलने की उम्मीद है, जो रोजमर्रा की शहर ड्राइविंग के लिए काफी होगी।
अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो Jetour T2 भारतीय एसयूवी बाजार में एक अलग पहचान बना सकती है। इसे 30-40 लाख रुपये के प्रीमियम सेगमेंट में उतारने की योजना है, जहां फिलहाल पेट्रोल और डीजल मॉडल्स का दबदबा है।
यह एसयूवी प्लग-इन हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के साथ आएगी, जिसमें 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन, इलेक्ट्रिक मोटर और लगभग 26.7 kWh की बड़ी बैटरी होने की संभावना है। इससे 100 किमी से ज्यादा की ऑल-इलेक्ट्रिक रेंज मिलने की उम्मीद है, जो रोजमर्रा की शहर ड्राइविंग के लिए काफी होगी।
Jetour T2 hybrid SUV
- फोटो : Jetour
ऑफ-रोडिंग और डिजाइन में क्या होगा खास?
Jetour T2 को सिर्फ शहरों के लिए नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल ऑफ-रोडर के रूप में पेश किया जाना है। इसमें करीब 220 mm ग्राउंड क्लीयरेंस, 700 mm वॉटर वेडिंग कैपेसिटी और एडवांस फोर-व्हील ड्राइव सिस्टम मिलने की संभावना है।
इस तरह यह SUV उन ग्राहकों को टारगेट करेगी जो दमदार डिजाइन, टेक्नोलॉजी और एडवेंचर क्षमता चाहते हैं।
JSW की बड़ी रणनीति में Jetour T2 की क्या भूमिका है?
जेएसडब्ल्यू मोटर्स के लिए Jetour T2 अकेला मॉडल नहीं, बल्कि प्रीमियम एसयूवी सेगमेंट में मजबूत पहचान बनाने का जरिया है। दूसरी ओर, एमजी ब्रांड भी अपने बड़े एसयूवी पोर्टफोलियो को बढ़ाने की तैयारी में है।
रणनीति यह दिखती है कि फीचर्स, हाइब्रिड एफिशिएंसी और बड़े साइज वाली एसयूवी के जरिए स्थापित ब्रांड्स को चुनौती दी जाए।
Jetour T2 को सिर्फ शहरों के लिए नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल ऑफ-रोडर के रूप में पेश किया जाना है। इसमें करीब 220 mm ग्राउंड क्लीयरेंस, 700 mm वॉटर वेडिंग कैपेसिटी और एडवांस फोर-व्हील ड्राइव सिस्टम मिलने की संभावना है।
इस तरह यह SUV उन ग्राहकों को टारगेट करेगी जो दमदार डिजाइन, टेक्नोलॉजी और एडवेंचर क्षमता चाहते हैं।
JSW की बड़ी रणनीति में Jetour T2 की क्या भूमिका है?
जेएसडब्ल्यू मोटर्स के लिए Jetour T2 अकेला मॉडल नहीं, बल्कि प्रीमियम एसयूवी सेगमेंट में मजबूत पहचान बनाने का जरिया है। दूसरी ओर, एमजी ब्रांड भी अपने बड़े एसयूवी पोर्टफोलियो को बढ़ाने की तैयारी में है।
रणनीति यह दिखती है कि फीचर्स, हाइब्रिड एफिशिएंसी और बड़े साइज वाली एसयूवी के जरिए स्थापित ब्रांड्स को चुनौती दी जाए।
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- फोटो : Jetour
लॉन्च टाइमलाइन पर कितना असर पड़ेगा?
2026 का त्योहारी सीजन, खासकर दिवाली, लॉन्च के लिए अहम माना जा रहा था। लेकिन अगर कंपोनेंट इंपोर्ट या टेक्नोलॉजी अप्रूवल में देरी होती है, तो लॉन्च 2027 तक टल सकता है।
यह देरी न सिर्फ बिक्री अनुमान को प्रभावित करेगी, बल्कि तेजी से बदलते एसयूवी सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा का समीकरण भी बदल सकती है।
आगे का रास्ता क्या है?
भारतीय ग्राहकों के लिए यह स्थिति दो पहलू दिखाती है। एक तरफ एडवांस हाइब्रिड एसयूवी के आने में देरी, और दूसरी ओर सरकार की 'मेक इन इंडिया' और निवेश जांच पर सख्ती।
जेएसडब्ल्यू मोटर्स के लिए आने वाले महीने निर्णायक होंगे। नियामकीय अपेक्षाओं और ग्लोबल सोर्सिंग के बीच संतुलन बनाना तय करेगा कि Jetour T2 भारत में हकीकत बनेगी या फिलहाल एक अधूरी महत्वाकांक्षा ही रह जाएगी।
2026 का त्योहारी सीजन, खासकर दिवाली, लॉन्च के लिए अहम माना जा रहा था। लेकिन अगर कंपोनेंट इंपोर्ट या टेक्नोलॉजी अप्रूवल में देरी होती है, तो लॉन्च 2027 तक टल सकता है।
यह देरी न सिर्फ बिक्री अनुमान को प्रभावित करेगी, बल्कि तेजी से बदलते एसयूवी सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा का समीकरण भी बदल सकती है।
आगे का रास्ता क्या है?
भारतीय ग्राहकों के लिए यह स्थिति दो पहलू दिखाती है। एक तरफ एडवांस हाइब्रिड एसयूवी के आने में देरी, और दूसरी ओर सरकार की 'मेक इन इंडिया' और निवेश जांच पर सख्ती।
जेएसडब्ल्यू मोटर्स के लिए आने वाले महीने निर्णायक होंगे। नियामकीय अपेक्षाओं और ग्लोबल सोर्सिंग के बीच संतुलन बनाना तय करेगा कि Jetour T2 भारत में हकीकत बनेगी या फिलहाल एक अधूरी महत्वाकांक्षा ही रह जाएगी।