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Type 2 Electric Vehicle: टाइप 2 इलेक्ट्रिक वाहन क्या होता है? ईवी चार्जिंग स्टैंडर्ड की आसान जानकारी

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sat, 03 Jan 2026 06:15 PM IST
सार

अगर आपने कभी 'टाइप 2 इलेक्ट्रिक व्हीकल' शब्द सुना है और सोचा है कि इसका क्या मतलब है, तो यहां आपको इसके बारे में विस्तार से बात रहे हैं।

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What Is a Type 2 Electric Vehicle Charging Standard Explained for EV Buyers
Electric Car Charging - फोटो : Freepik
क्या आपने इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े शब्द "टाइप 2 ईवी" के बारे में सुना है। इसका मतलब होता है कि उस वाहन में टाइप 2 या CCS2 चार्जिंग कनेक्टर दिया गया है। यह आज सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला चार्जिंग स्टैंडर्ड बन चुका है। जिसे भारत समेत कई देशों में अपनाया गया है। इस कनेक्टर की मदद से इलेक्ट्रिक कारें AC और DC दोनों तरह के चार्जर्स से जुड़ सकती हैं। जिससे फास्ट चार्जिंग संभव होती है और यूजर्स को ज्यादा विकल्प मिलते हैं।


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What Is a Type 2 Electric Vehicle Charging Standard Explained for EV Buyers
Electric Vehicles - फोटो : Freepik
यूरोप में हुई थी टाइप 2 चार्जिंग की शुरुआत
टाइप 2 या CCS2 चार्जिंग सिस्टम की नींव यूरोप में 2012 के आसपास रखी गई थी। उस समय लक्ष्य था कि अलग-अलग कार कंपनियों और चार्जिंग नेटवर्क्स के लिए एक समान कनेक्टर तय किया जाए। इससे ईवी यूजर्स को किसी भी चार्जिंग स्टेशन पर अपनी कार चार्ज करने में आसानी हो सके। धीरे-धीरे यह स्टैंडर्ड यूरोप के कई देशों में लोकप्रिय हो गया और बाद में अन्य बाजारों ने भी इसे अपनाना शुरू कर दिया।

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EV Charging Stations - फोटो : Freepik
भारत में कैसे बना टाइप 2 चार्जर स्टैंडर्ड
भारत में 2017 के बाद टाइप 2 चार्जिंग को औपचारिक रूप से स्टैंडर्ड के तौर पर अपनाया गया। इसका मकसद देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सरल बनाना था। आज टाटा मोटर्स, महिंद्रा, एमजी मोटर और अन्य प्रमुख कंपनियों की ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारें टाइप 2 या CCS2 चार्जिंग पोर्ट के साथ आती हैं। जिससे देशभर में चार्जिंग अनुभव एक जैसा बनता है।

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Electric Vehicles Charging Station - फोटो : Freepik
तेज चार्जिंग और बेहतर सुरक्षा
टाइप 2 चार्जर की बड़ी ताकत इसकी तेज चार्जिंग क्षमता है। यह सिंगल-फेज और थ्री-फेज दोनों चार्जिंग को सपोर्ट करता है और 22 किलोवाट तक की पावर दे सकता है। इसका मतलब है कि कार को चार्ज करने में कम समय लगता है और रोजमर्रा के इस्तेमाल में ईवी ज्यादा व्यावहारिक बन जाती है। इसके साथ ही इसमें सेफ्टी लॉक, ऑटोमैटिक कम्युनिकेशन सिस्टम और अन्य सुरक्षा फीचर्स दिए जाते हैं, जो चार्जिंग को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाते हैं।

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Electric Car - फोटो : Freepik
चार्जिंग पोर्ट की सही देखभाल क्यों जरूरी है
लंबे समय तक बिना परेशानी ईवी चलाने के लिए चार्जिंग पोर्ट की देखभाल बेहद अहम है। टाइप 2 या CCS2 पोर्ट को साफ रखना चाहिए, क्योंकि धूल, नमी या गंदगी चार्जिंग कनेक्शन में रुकावट डाल सकती है। जब पोर्ट इस्तेमाल में न हो, तो उसे कवर से ढककर रखना बेहतर होता है, ताकि पानी या मिट्टी अंदर न जा सके।

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