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Asteroid Showers On Mars: मंगल ग्रह पर करोड़ों साल तक होती रही एस्टेरॉयड की बारिश! रिसर्च में हुआ ये बड़ा खुलासा

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Thu, 27 Jan 2022 12:02 PM IST
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asteroid showers continues 600 million yeas on mars says new research
मंगल ग्रह पर 60 करोड़ साल तक हुई एस्टेरॉयड की बारिश - फोटो : Twitter @NASAMars

मंगल ग्रह को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च में मंगल ग्रह को लेकर बड़ा खुलासा किया है। नए शोध से पता चला है कि मंगल ग्रह पर 60 करोड़ सालों तक एस्टेरॉयड की बारिश (Asteroid Showers) हुई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज के बाद मंगल ग्रह की उत्पत्ति के बारे में फिर से स्टडी करने की जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया के कर्टिन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने यह नया रिसर्च किया है। उन्होंने इससे पहले की गई स्टडी को चुनौती दी है। 



इस रिसर्च के मुताबिक, एस्टेरॉयड की लगातार बारिश की वजह से मंगल ग्रह पर इतने गड्ढे नजर आते हैं। आमतौर पर सतह पर स्थित गड्ढों की वैज्ञानिक गणना के बाद ही ग्रह की उम्र की जानकारी मिलती है। अगर किसी ग्रह पर अधिक गड्ढे नजर आते हैं, तो उसके उम्र की सही जानकारी का पता लगाया जा सकता है। 

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मंगल ग्रह पर 60 करोड़ साल तक हुई एस्टेरॉयड की बारिश - फोटो : Twitter @SPACEdotcom


वैज्ञानिकों ने जांच के बाद निष्कर्ष निकाला है कि किसी ग्रह पर जितने अधिक गड्ढे होते हैं वह ग्रह उतना ही पुराना होता है। वैज्ञानिकों ने नए शोध में मंगल ग्रह पर मौजूद 521 गड्ढों के बारे में न्यू क्रेटर डिटेक्शन एल्गोरिदम की सहायता से रिसर्च किया है जिनमें से हर गड्ढा 20 किलोमीटर व्यास का है। हालांकि इनमें सिर्फ 40 गड्ढे ही 60 करोड़ साल पुराने हैं। खुलासा हुआ है कि मंगल ग्रह पर 60 करोड़ साल तक एक के बाद एक एस्टेरॉयड की बारिश हुई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि गड्ढों की पहचान करने वाले एल्गोरिदम से इसके गिरने के समय और उनकी संख्या की जानकारी मिल सकती है। 

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गल ग्रह पर 60 करोड़ साल तक हुई एस्टेरॉयड की बारिश - फोटो : Twitter @perthobs

वैज्ञानिकों को रिसर्च में यह भी पता चला है कि मंगल ग्रह की सतह से टकारने से पहले एस्टेरॉयड कई भागों में अलग हो गए थे जिसकी वजह से इनके कई जगहों पर टकराने की शंका पैदा हुई। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि इस तकनीक से चंद्रमा पर बने गड्ढों के समय के बारे में पता लगाया जा सकता है। इसके साथ ही चंद्रमा के विकसित होने का अंदाजा भी मिल सकता है। 

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मंगल ग्रह पर 60 करोड़ साल तक हुई एस्टेरॉयड की बारिश - फोटो : Twitter @NASAMars


इस स्टडी में शामिल एंथनी लागेन का कहना है कि मंगल ग्रह के ओर्डोविसियन स्पाइक काल के एक बार फिर शोध की जरूरत है। वैज्ञानिकों को इस काल के बारे में एक बार फिर रिसर्च करना चाहिए। माना जात था ओर्डोविसियन स्पाइक काल में ही सबसे अधिक गड्ढों का निर्माण हुआ। लगभग 47 करोड़ साल पुराना है यह काल। इस स्टडी को ध्यान में रखकर अन्य ग्रहों का अध्ययन करना चाहिए। 

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मंगल ग्रह पर 60 करोड़ साल तक हुई एस्टेरॉयड की बारिश - फोटो : Twitter @SPACEdotcom

जानिए क्या होते हैं एस्टेरॉयड

उल्कापिंड या क्षुद्रग्रह को एस्टेरॉयड कहा जाता है। किसी ग्रह के बनते समय उससे छोटे-छोटे चट्टान के टुकड़े टूटकर बाहर हो जाते हैं और सूरज के चारों ओर चक्कर लगाने लगते हैं। कभी कभी यह अपनी कक्षा से बाहर निकल जाते हैं। आमतौर पर ग्रहों की कक्षा में एस्टेरॉयड जल जाते हैं, लेकिन कभी-कभी बड़े एस्टेरॉयड की ग्रहों से टक्कर हो जाती है। पृथ्वी से भी कई बार एस्टेरॉयड की टक्कर हो चुकी है।

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