Elephants Mourning on Death: मौत पर इंसानों की तरह शोक मनाते हैं हाथी, रिसर्च में पहली बार हुए ये नए खुलासे
दोनों बायोलॉजिस्ट हाथियों की इस घटना को लेकर रिसर्च करना चाहते थे। क्योंकि ऐसा नजारा कम देखने को मिलता है। इसकी वजह यह है कि अक्सर घने जंगलों या घास वाले मैदानों में हाथी रहते हैं। रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस जर्नल में डॉ. संजीता पोखारेल और नचिकेता शर्मा की स्टडी प्रकाशित हुई है।
दोनों बायोलॉजिस्ट ने दुनियाभर के लोगों से एक खास अपील की। उन्होंने लोगों से हाथियों के शोक जताने के वीडियो को रिकाॅर्ड कर यूट्यूब के जरिए भेजने को कहा। इसके बाद उनको कई ऐसे वीडियो मिले जिनमें हाथियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली। इनमें देखा गया गया कि शव को हाथी छूते थे, चारों ओर घूमते थे और सुरक्षा प्रदान करते देख गए। इसके अलावा पैर से मारकर उठाने की कोशिश करते हुए और कांपते हुए भी नजर आए।
अगर हाथी के बच्चे की मौत हो जाती है, तो उसकी मां हथिनी जो करती है वह उसके प्यार और दर्द को दिखाता है। हथिनी अपने बच्चे को सूंड़ से उठाकर घूमती है। ऐसी स्टडी को कंपेरेटिव थानाटोलॉजी कहा जाता है जिसमें अलग-अलग जीवों की मौत उनके साथी की उनके प्रति क्या प्रतिक्रिया होती है उस पर रिसर्च किया जाता है।
यूट्यूब पर मिले वीडियो से दोनों बायोलॉजिस्ट को हाथी की मौत पर दूसरे हाथियों की प्रतिक्रिया के 24 मामले मिले। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के रमन कुमार भी इनकी स्टडी में शामिल हैं। तीनों इस नतीजे पर पहुंचे कि हाथी का अपने साथियों की मौत सामान्य प्रतिक्रिया होती है। वह शव को छूते हैं, सूंघते हैं और आमतौर पर चेहरे-कान को छूते और सूंघते हैं। इसके अलावा वह शव को हिलाते भी रहते हैं। वह ऐसा इसलिए करते हैं ताकि वह उठ जाए। हथिनी अपने बच्चे के शव को इसलिए पूरे दिन लेकर घूमिती है ताकि वह जिंदा हो जाए।