Dharavi Slum: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्थित एशिया की सबसे बड़ी स्लम एरिया धारावी का अडाणी ग्रुप रिडेवलपमेंट करेगा। इस स्लम एरिया को संवारने का काम दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख्स गौतम अदाणी को दिया गया है। अगर आप मुंबई में कम खर्च में रहना चाहते हैं, तो धारावी रहने के लिए सबसे अच्छी जगह है। यहां पर लाखों दिहाड़ी मजदूर और छोटे कारोबारी रहते हैं।
Dharavi Slum: जानिए क्या है मुंबई के दिल धारावी की कहानी, अंग्रेजों ने एशिया की सबसे बड़ी बस्ती को बसाया था
अंग्रेजों ने 1882 में बसाया
अंग्रेजों ने एशिया की सबसे बड़ी बस्ती धारावी को मजदूरों को किफायती ठिकाना देने के मकसद से बसाया था। यहां धीरे-धीरे लोग आकर बसने लगे और यहां झुग्गी-बस्तियां बनती गईं। सबसे बड़ी बात यह है कि धारावी की जमीन सरकारी है, लोगों ने अपने पैसे खर्चे करके झुग्गी और बस्ती बनाई है।
550 एकड़ में फैली धारावी में झुग्गी-बस्तियों की संख्या इतनी है कि दूर से देखने पर जमीन नजर नहीं आती है। यहां पर एक किलोमीटर के क्षेत्र में दो लाख से अधिक लोग रहते हैं। आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां आबादी कितनी घनी होगी। इस बस्ती में एक 100 वर्ग फीट की झुग्गी में करीब 8 से 10 लोग एक साथ रहते हैं। कुछ झुग्गियों में घर और कारखाने भी हैं। सबसे हैरान वाली बात यह है कि यहां पर 80 फीसदी लोग पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं।
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धारावी की झुग्गी-बस्ती में दिहाड़ी मजदूर के अलावा अपना कारोबार करने वाले लोग भी रहते हैं। इस बस्ती के दोनों तरफ रेलवे स्टेशन हैं। एक तरफ माहिम और दूसरी तरफ सायन रेलवे स्टेशन है। यहां से लाखों लोग आते-जाते हैं। मुंबई शहर में लोग फ्लैट और सभी सुविधाओं से लैस घरों में रहते हैं और यहां पर लोग तंग और गंदी बस्तियों में रहने को मजबूर हैं।
फिल्म से बढ़ी लोकप्रियता
साल 2008 में 'स्लमडॉग मिलियनेयर' फिल्म रिलीज हुई थी जिसके बाद इस इलाके की लोकप्रियता बढ़ गई। 'स्लमडॉग मिलियनेयर' फिल्म ने कई पुरस्कार भी जीते हैं। इसके बाद फिल्म गली बॉय में भी इस इलाको को दिखाया गया है। एशिया की सबसे बड़ी बस्ती को देखने के लिए कई टूरिस्ट आते हैं।