Cloudburst: देश के लिए बारिश का मौसम खुशाहली लेकर आता है। किसानों के लिए बारिश किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि भारत में 50 फीसदी से ज्यादा कृषि भूमि बारिश पर निर्भर है। बारिश होने से लोगों को गर्मी से राहत मिलती है, लेकिन दूसरी तरफ बारिश के मौसम में बाढ़, लैंडस्लाइड और बादल फटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इस मौसम में कहीं अचानक बादल फटने से, तो कहीं बाढ़ की वजह से तबाही मचती है। आइए जानते हैं कि आखिर अचानक क्यों बादल फटता है?
Cloudburst: अचानक क्यों और कैसे फटता है बादल? जानिए आखिर क्या है वजह
Cloudburst: बारिश के मौसम में अक्सर बादल फटने की घटनाएं सामने आती हैं। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की घटनाएं हुई हैं। आइए जानते हैं आखिर क्यों बादल फटते हैं।
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क्यों फटते हैं बादल?
अगर किसी जगह पर 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश होती है, तो उसे बादल फटना कहा जाता है। बादलों को नमी न पहुंचने की वजह से यह घटना होती है। बादलों को नमी नहीं पहुंचती है या पहुंचनी बंद हो जाती है, तो ठंडी हवा इसमें प्रवेश कर जाती है, जिसके सफेद बादल काले बादलों में बदल जाते हैं और तेजी से बारिश होती है।
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वातावरण में नमी और गर्मी का स्तर दोनों काफी बढ़ने पर बादल फटता है। अक्सर पहाड़ी इलाकों में ऐसी स्थिति बन जाती है। बादल फटने की पूरी प्रक्रिया विज्ञान से जुड़ी है। जब गर्म हवाएं बादल को ऊपर ले जाती हैं, तो बादल ठंडी हवा के संपर्क में आकर ठंडा हो जाता है। यह बादल नमी से भरा होता है और ठंडी हवा के संपर्क में आने से बादल में जमी नमी या वाटर वेपर तेजी से पानी की बूंद में बदल जाते हैं और भारी बारिश होती है।
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पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान की वजह से तेजी से हवा ऊपर जाती है और बादल बन जाता है। इसके बाद ठंडी हवा के संपर्क में आते ही बारिश होने लगती है। बारिश के मौसम में जिस स्थान पर कम का हवा का दबाव होता है, उस इलाके में गर्म और नमी वाली हवा तेजी से ऊपर जाती है। इससे बादल फटने की संभावना ज्यादा होती है। इसके साथ ही अगर ठंडी और गर्म हवाएं आपस में टकराती हैं तो भी बादल फट जाता है। बादल फटने से होने वाली बारिश 100 किलोमीटर/घंटा होती है।
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बादल फटने के कारण अचानक बाढ़ आती है, जिसे कुमुलोनिम्बस बादल (Cumulonimbus Clouds) कहा जाता है, क्योंकि इसके कारण भारी बारिश होती है। बादल फटने की प्रक्रिया में पानी की छोटी छोटी बूंदें आपस में टकराती हैं और एक विकराल रूप धारण कर लेती हैं। इस प्रक्रिया को लैंगमुइर प्रेसिपिटेशन कहते हैं, जिसमें बारिश की बड़ी बूंदें छोटी बूंदों के साथ मिलकर तेजी से नीचे आती हैं।