क्या आप कहानी का शीर्षक देखकर ही कहानी पढ़ने आए हैं? अगर हां, तो इस सवाल का उत्तर कहानी में जरूर मिलेगा। लेकिन थोड़ा रुककर। पहले थोड़ा अंडे के बारे में जान लीजिए। अंडे को 'कम्पलीट फूड' कहा जाता है। यानी शरीर के लिए जरूरी सारे पोषक तत्व उसमें मौजूद हैं।
जब अंडा फंस गया 'मांसाहारी' और 'शाकाहारी' के बीच, जानिए कैसे
- एक उबले अंडे में 211 किलो कैलोरी होती है।
- प्रोटीन- 7 ग्राम
- फैट - 22%
- विटामिन A- 16%
- विटामिन C- 0
- आयरन - 9%
- कैल्शियम 7%
कुछ शोध में पाया गया है कि इसे खाने की दूसरी चीजों के साथ मिलाकर खाया जाए, तो आपके शरीर को ज्यादा विटामिन मिलता है। मिसाल के तौर पर सलाद में अंडा मिलाने से विटामिन ई की मात्रा ज़्यादा मिलती है। इसलिए माना जाता है कि अगर खाने की चीजों में 'बेस्ड फूड' की कोई कैटेगरी होगी तो इस प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे 'अंडा' ही होगा। तमाम फायदों के बीच कुछ जानकार मानते हैं कि अंडे में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर पर बुरा प्रभाव डालती है।
जब अंडा फंस गया 'मांसाहारी' और 'शाकाहारी' के बीच
ये समझने के लिए थोड़ा बैकग्राउंड समझना होगा। भारत में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए स्कूलों और आंगनवाड़ी में बच्चों को सरकार की तरफ से एक वक्त का खाना दिया जाता है। आईआईएम अहमदाबाद में एसोसिएट प्रोफेसर रितिका खेड़ा ने इस विषय पर बहुत काम किया है। रितिका खेड़ा बताती हैं कि केंद्र सरकार की तरफ से इसकी शुरुआत मीड डे मिल के तौर पर साल 1995 में हुई। इससे पहले, पका हुआ भोजन देने में तमिलनाडु सबसे आगे रहा। तब वहां के मुख्यमंत्री एमजीआर थे। जग-हंसाई और निंदा के बावजूद वो अपने फैसले पर डटे रहे। इसके साथ ही गुजरात और कुछ अन्य राज्यों (मध्य प्रदेश, ओडिशा शामिल हैं) के कुछ हिस्सों में पका हुआ भोजन दिया जाता है।
केंद्र की पके हुए खाने की योजना के बजाय कई राज्य बच्चों को सूखा अनाज दे दिया करते थे। लेकिन साल 2001 में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद, सभी राज्यों में पका हुआ भोजन देने का फैसला हुआ। आनन-फानन में राज्यों ने इसे लागू भी कर दिया। उसके बाद से साल 2010 तक इस क्षेत्र में काफी सुधार हुआ और काम भी हुआ। मामला आगे बढ़ा तो खाने की गुणवत्ता पर बात हुई, और सरकारें खाने में बच्चों को कितनी कैलरी देना चाहिए, ये सब तय करने लगी। स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था 14 साल के बच्चों के लिए की गई।
ठीक इसी तरह से हर राज्य के आंगनबाड़ी में मांओं और पांच साल के बच्चों को भोजन देने की व्यवस्था है। मिड डे मील और आंगनबाड़ी में भोजन कब और कैसा देना है, इसके लिए केंद्र सरकार की गाइडलाइन का राज्य सरकारें पालन करती हैं। इसके लिए कई राज्य सरकारें, स्वास्थ्य मंत्रालय के अंदर काम करने वाली संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन की मदद लेती है। ये संस्था राज्यों के कहने पर उनके लिए सैंपल मैन्यू तैयार करके देती है। मैन्यू को तय करने का अधिकार अंतत: राज्य सरकारों का ही होता है। लेकिन आंगनबाड़ी और स्कूलों के मैन्यू में बच्चों को अंडा दिया जाए या नहीं, इसको लेकर अब बहस शुरू हो गई है और कुछ हद तक राजनीति भी। पोषण-आहार विशेषज्ञ कहते हैं कि अंडा बच्चों के लिए फायदेमंद होता है।
मध्य प्रदेश सरकार का नया फरमान
Milk and not eggs will be given to children at 'anganwadis' in Madhya Pradesh to tackle malnutrition: CM Shivraj Singh Chouhan
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को फैसला किया है कि राज्य की आंगनबाड़ी में बच्चों को अंडा नहीं दिया जाएगा। इस बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, "हम अंडा नहीं, कुपोषित बच्चों को दूध देंगे। बच्चों में कुपोषण के खिलाफ राज्य में अभियान भी चलाया जाएगा।"
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर प्रदेश बीजेपी कार्यालय में एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करने पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद संवाददातों को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बात कही। शिवराज सिंह चौहान के पिछले कार्यकाल में भी स्कूलों में छात्रों को मिड-डे मील में अंडा नहीं दिया जाता था। लेकिन दोबारा सत्ता में आने के बाद राज्य सरकार में महिला और बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने बच्चों को आंगनबाड़ी में अंडा दिए जाने की वकालत की थी। इस बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, "हम अंडा नहीं, कुपोषित बच्चों को दूध देंगे। बच्चों में कुपोषण के खिलाफ राज्य में अभियान भी चलाया जाएगा।"
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर प्रदेश बीजेपी कार्यालय में एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करने पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद संवाददातों को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बात कही। शिवराज सिंह चौहान के पिछले कार्यकाल में भी स्कूलों में छात्रों को मिड-डे मील में अंडा नहीं दिया जाता था। लेकिन दोबारा सत्ता में आने के बाद राज्य सरकार में महिला और बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने बच्चों को आंगनबाड़ी में अंडा दिए जाने की वकालत की थी।
Food fascism https://t.co/CKzgcW5zuk
नंवबर 2019 में समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में इमरती देवी ने कहा था, "जब हमने राज्य के मुख्यमंत्री से ये बात कही तो उन्होंने कहा कि ये अच्छी बात है। उन्हें आंगनबाड़ी में बच्चों को अंडा देने में कोई दिक्कत नहीं है। हमने डॉक्टरों से भी सलाह ली। उन्होंने भी कहा कि बच्चों को पोषण के लिए अंडा देना चाहिए।"
तब ऐसा लगा मानो शिवराज सरकार बच्चों के पोषण का ध्यान रखते हुए आंगनबाड़ी में अंडा देने पर विचार कर सकती है। लेकिन शिवराज सिंह के ताजा बयान के बाद सारी संभावनाएं धरी की धरी रह गईं। हालांकि, राज्य के मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद इमरती देवी की प्रतिक्रिया नहीं आई है। कांग्रेस जब मध्य प्रदेश में सत्ता में आई थी, तब वो आंगनबाड़ी में अंडा देने पर राजी हो गई थी, जिसकी शुरुआत अगले सत्र से करने का वादा किया था। लेकिन उससे पहले ही उनकी सरकार गिर गई। अब शिवराज सिंह चौहान के फैसले पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्विटर पर तंज कसा है। हालांकि राजस्थान में जहां कांग्रेस की सरकार है, वहां भी अंडा नहीं दिया जा रहा है।