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भारत में यहां मुर्दों से वसूला जाता है जलने का पैसा, दिलचस्प कहानी दिमाग घुमा देगी
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 13 Dec 2018 02:07 PM IST
भारत में कई ऐसी जगह हैं जिनके बारे में हम में से कई लोग तो जानते ही नहीं है। आज भारत की एक ऐसे ही खास जगह के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। इस श्मशान घाट पर आने वाले हर मुर्दे को चिता पर लिटाने से पहले बाकायदा टैक्स वसूला जाता है। श्मशान घाट पर लाशों से पैसे वसूलने के पीछे की ये कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है।
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Manikarnika Ghat
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वैसे तो काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। काशी को मोक्ष प्राप्ति के लिए सबसे पवित्र जगह माना गया है। मान्यता है कि काशी में जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाता है उसे सीधे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। दुनिया का ये इकलौता श्मशान घाट है जहां लाशों का आना और चिता का जलना कभी नहीं थमता, यहां एक दिन में लगभग 3000 से ज्यादा शवों का रोज अंतिम संस्कार किया जाता है।
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बनारस के मणिकर्णिका श्मशान घाट में मुर्दों से भी टैक्स वसूला जाता है। बनारस के मणिकर्णिका श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार की कीमत चुकाने की यह परम्परा तकरीबन 3000 साल पुरानी है। ऐसी मान्यता है कि श्मशान के रख रखाव का जिम्मा तभी से डोम जाति के हाथ था। दरअसल टैक्स वसूलने के मौजूदा दौर की शुरुआत हुई राजा हरीशचंद्र के जमाने से।
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ऐसा माना जाता है राजा हरीशचंद्र ने एक वचन के कारण अपने राजपाट को छोड़ना पड़ा उस समय उनके पास कुछ भी नहीं था तब उनके बेटे की मृत्यु हो गई। उस समय राजा जब अपने बेटे की लाश को लेकर शमशान घाट पहुंचा तो उस समय अपने बेटे के दाह संस्कार के लिये उन्हें कल्लू डोम से इजाजत मांगी। उस समय बगैर दान दिये अंतिम संस्कार करने की इजाजत नहीं थी।
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जिस कारण से कल्लू ने भी दान मांगा लेकिन उस समय राजा हरीशचंद्र के पास कल्लू को दान देने के लिए कुछ भी नहीं था। लेकिन राजा ने कल्लू को अपनी पत्नी की साड़ी का एक टुकड़ा बतौर दक्षिणा के रूप में दिया। बस तभी से शवदाह के बदले टैक्स मांगने की परम्परा मजबूत हो गई। वही परम्परा जिसका बिगड़ा हुआ रूप मणिकर्णिका घाट पर आज भी जारी है। इसे हरिश्चंद्र घाट भी कुछ लोग कहते हैं।
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