अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोपीय देशों में मनाया जाने वाला हैलोवीन डे खास त्यौहार है। अक्टूबर महीने के आखिरी दिन मनाए जाने वाले इस त्यौहार में लोग घर को डरावने तरीके से सजाने के साथ-साथ 'हैलोवीन थीम ड्रेसेस' भी पहनते हैं। आयरलैंड और स्कॉटलैंड से इस त्यौहार की शुरुआत हुई थी। पश्चिम देशों के इस त्यौहार का ट्रेंड अब भारत में भी देखने को मिल रहा है। हैलोवीन डे को आल हेलोस इवनिंग, आल हैलोवीन, आल होलोस ईव और आल सैंट्स ईव भी कहा जाता है। यह दिन सेल्टिक कैलेंडर का आखिरी दिन होता है। इसलिए सेल्टिक लोगों के बीच यह नए वर्ष की शुरूआत के रूप में मनाया जाता है। इस त्यौहार में लोग कई तरह के मेकअप व ड्रेस के साथ ‘भूत’ बनते हैं। आप भी जानिए 'हैलोवीन डे' आखिर मनाया क्यों जाता है और क्या है इसकी खास कहानी।
बड़ा रोचक है हैलोवीन डे का इतिहास, नहीं जानते होंगे ये बातें
दरअसल हैलोवीन की शुरुआत बहुत पहले ही हुई थी।आयरिश कथाओं के अनुसार किसानों की मान्यता थी कि बुरी आत्माएं धरती पर आकर उनकी फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में उन्हें भगाने के लिए वह खुद डरावना रूप अख्तियार कर लेते थे, मगर आधुनिक युग में यह एक मौज-मस्ती और छुट्टी मनाने का अच्छा तरीका बन गया है। यूरोप में सैल्टिक जाति के लोग मानते थे कि इस समय मृत लोगों की आत्माएं आकर संसारिक प्राणियों से साक्षात्कार करती हैं। वे सोचते थे कि उनके पुरखों की आत्मा धरती पर आएंगी, जिससे उनका फसल काटना आसान हो जाएगा। इसीलिए वे चुड़ैलें बनते और जानवरों के मौखटे, उनकी चमड़ी, उनके सिर पहनकर अलाव के आसपास नाचते -गाते थे। वे मानते थे कि कोई विशिष्ट सर्वोच्च प्राकृतिक शक्ति है।
हैलोवीन डे पर इन्हीं आत्माओं से बचने और भगाने के लिए भूतों, राक्षसों, कंकालों और पिशाचों जैसे कपड़े पहने जाते हैं और जानवरों की हड्डियां जलाई जाती हैं। साथ ही इस दिन आग अलाव भी जलाते हैं। ये हैलोवीन की सबसे पुराने प्रतीकों में से एक हैं। इसमें कद्दू को काटकर एक चेहरे का आकार दिया जाता है और उसमें मोमब्बती जलाई जाती है। इससे कई बार डरावना चेहरा बनाकर लोगों को डराते भी हैं। बाद में इसे एक साथ दफना दिया जाता है।
इस दिन बच्चे कद्दू जैसे आकार का बैग लेकर लोगों के घर-घर जाते हैं और घर के मालिक से पूछते हैं कि ट्रिक या ट्रीट। इसके दौरान कुछ लोग भूत बनकर डराते हैं तो कुछ कैंडीज बांटकर खुशियां मनाते हैं। आयरिश लोक कथाओं के अनुसार हेलोवीन पर जैक ओ-लैंटर्न बनाने का रिवाज है। लोग खोखले कद्दू में आंख, नाक और मुंह बनाकर अंदर मोमबत्ती रखते हैं। इसके बाद इसे जमा कर दफना दिया जाता है। कई जगह लोग हैलोवीन डे पर कई तरह के खेल खेलते हैं। इस दिन सबसे ज्यादा खेले जाना वाला गेम डंकिंग या एप्पल बोबिंग है, जिसे स्कॉटलैंड में डूंकिंग कहा जाता है। इसमें सेब में एक टब या पानी के बड़े बेसिन में तैरते है और फिर प्रतिभागियों को अपने दातों से इसे निकालना होता है।
अक्टूबर की आखिरी तारीख को अक्सर सोशल मीडिया पर भूतों और डरावनी आत्माओं की तरह दिखने वाले लोगों की तस्वीरें लोगों को डराते हुए दिख जाती हैं।आपको बता दें कि यूरोप में सेल्ट्स नाम के लोग रहते थे जो पूरे यूरोप में बसे थे। ये सभी सेल्टिक कैलेंडर के हिसाब से साल के अखिरी दिन को सेलीब्रेट करते हैं। लेकिन वक्त के साथ सेल्ट्स लोग सिर्फ आयरलैंड, वैल्स, स्कॉटलैंड और ब्रिटनी और कॉर्नवाल शहरों तक ही सीमित रह गए। ये त्यौहार सिल्टिक लोगों को सैम्हन से जुड़ा है। ये फसल के आखिरी दिन होता है और ठंड के मौसम की शुरुआत होती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूर्वजों और मरे हुए लोगों की आत्माएं धरती पर आती हैं।