समंदर दिन की रोशनी में जितना खूबसूरत लगता है, उससे कहीं ज्यादा हसीन रात के अंधेरे में लगता है। समुद्र में रहने वाले बहुत से जीव जो दिन में नहीं निकलते, वो रात में बाहर आते हैं। पानी की लहरें जब उफान के साथ उठती हैं तो लगता है वो अपने साथ अनगिनत छोटी-छोटी नीली बत्तियां समेटे हुए हैं। सवाल ये है कि आखिर समुद्र में ये नीली टिमटिम रोशनी आती कहां से है?
आखिर अंधेरा होने पर क्यों बदल जाता है समुद्र का रंग?
असल में ये कुदरती बिजली की चमक होती है। समंदर के बहुत से जीवों में ये खूबी होती है कि उनके शरीर से चमक पैदा होती है। समुद्र में डाइनोफ्लैगलेट्स नाम के जीव पाए जाते हैं। ये रात के अंधेरे में नीले रंग की रोशनी छोड़ते हैं। कैरेबियन देशों पुएर्तो रिको और जमैका के पास के समुद्री इलाकों में ये जीव बड़ी तादाद में पाए जाते हैं। रात के वक्त अक्सर इनकी चमक देखी जाती है। खास तौर से तब, जब कोई बड़ा जीव या जहाज उस इलाके से गुजरता है।
समुद्र के अंदर पाई जाने वाली घास और फफूंद में भी ये रोशनी पैदा करने की क्षमता होती है। जब पानी की लहरें उठती है तो यह घास हिलने लगती है। लगता है कि लहरों के बीच नीले बल्ब टिमटिमा रहे हों। कभी-कभी डाइनोफ्लैगलेट्स की संख्या काफी तेजी से बढ़ती है और ये दिन में भूरे लाल रंग के लगते हैं। इन्हें लाल ज्वार के नाम से भी जाना जाता है। इनमें से कुछ जहरीले भी होते हैं।
रात के अंधेरे में समुद्र कभी-कभी दूधिया सफेद भी नजर आता है। इसे मिल्की-सी कहा जाता है। हालांकि ऐसा बहुत कम देखने को मिला है। 1915 के बाद कुछ बार ही समुद्र का ये नजारा देखा गया होगा। ये मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी हिंद महासागर में, जावा और इंडोनेशिया के पास के समुद्र में देखने को मिलता है।
समुद्र के इस रूप के लिए डाइनोफ्लैगलेट्स जिम्मेदार नहीं होते हैं। बल्कि कहा जाता है कि रोशनी छोड़ने वाले बैक्टीरिया समुद्र की सतह पर जमा हो जाते हैं, जिसके चलते सफेद रंग नजर आता है। जब ये बैक्टीरिया बहुत ज्यादा संख्या में जमा हो जाते हैं, तो समुद्र बर्फ की चादर के समान लगने लगता है। कुदरत के इस फितरी अमल की असल वजह क्या है, वैज्ञानिकों को इसे जानने का मौका कम ही मिल पाया है। 2005 में रिसर्चरों ने मिल्की-सी की कुछ सैटेलाइट इमेज जमा की थी। समुद्र में ये नजारा लगातार तीन रातों तक बना रहा था फिर धीर-धीरे कम होने लगा।
अंधेरे में चमकने वाले जानवर
समुद्र की गहराई में जितने भी जीव पाए जाते हैं, उनमें से बहुतों में नीली रोशनी पैदा करने की क्षमता होती है। कुछ जीवों की दुम चमकती है तो कुछ का पूरा शरीर। बहुत सी मछलियां पूरी तरह से चमकती हैं, तो कुछ की सिर्फ आंखें चमकती है।
रात के अंधेरे में समुद्र की गहराई में रौशनी का ये इकलौता जरिया होती हैं। जिन मछलियों की आंखें चमकती हैं, वो जरूरत के हिसाब से अपनी आंख खोलती और बंद करती हैं। जहां उन्हें रोशनी की जरूरत होती है, वहीं अपनी आंख घुमाती हैं। इनकी रोशनी की मदद से दूसरे बैक्टीरिया भी घूमते हैं। रिसर्च बताते हैं कि जिन जीवों में रोशनी पैदा करने की क्षमता नहीं होती, उनका इस खूबी वाले जीवों से अच्छा रिश्ता होता है।