16 दिसंबर से भारत में तीन बड़े बदलाव हुए हैं। इन बदलावों का आपकी जिंदगी पर सीधा असर पड़ेगा। इन नए नियमों से जहां एक ओर आपको राहत मिलेगी, वहीं अगर आपने कुछ बातों का ध्यान नहीं रखा तो आपको आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। इनमें फास्टैग, मोबाइल पोर्ट कराने से जुड़े नए नियम और नेशनल इलेक्ट्रोनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) के नियम शामिल हैं। आइए जानते हैं इन महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में।
जरूरी खबर: बदल गए ये तीन नियम, जान लें वरना हो सकता है नुकसान
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बदलाव नंबर 1: 24 घंटे फ्री में उठाएं NEFT सुविधा का लाभ
16 दिसंबर से सभी बैंकों में 24 घंटे नेशनल इलेक्ट्रोनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) की सुविधा शुरू हो गई है। ऐसा करने का निर्देश भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को दिया है। इससे पहले एनईएफटी सुविधा सुबह आठ बजे से शाम सात बजे तक थी। महीने के पहले और तीसरे शनिवार को इसका वक्त सुबह आठ बजे से दोपहर एक बजे तक रहता था।
डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देना है मकसद
आरबीआई ने देश भर में डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है। आरबीआई ने कहा कि रिटेल डिजिटल ट्रांजेक्शन सालाना 60 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। अक्तूबर 2018 से सितंबर 2019 के बीच यह औसतन 2,846 करोड़ रुपये रहा है। इस दौरान कुल 302 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन हुए हैं। एनईएफटी और यूपीआई के जरिए 1,126 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए। इसमें यूपीआई की ग्रोथ रेट 263 फीसदी है। वहीं एनईएफटी का ग्रोथ रेट 20 फीसदी रहा।
सभी बैंकों में मुफ्त होगी NEFT सुविधा
छह जून को हुई आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक में आरबीआई ने आम जनता को बड़ा तोहफा देते हुए रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और नेशनल इलेक्ट्रिक फंड ट्रांसफर के जरिए होने वाला लेन-देन निशुल्क कर दिया था। मौजूदा समय में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी जैसे बड़े बैंक एनईएफटी के लिए शुल्क नहीं लेते हैं। वहीं आरबीआई के निर्देश के अनुसार, 1 जनवरी 2020 से सभी बैंकों के लिए एनईएफटी सुविधा निशुल्क करना अनिवार्य है।
क्या है NEFT ?
NEFT का मतलब है नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर। इंटरनेट के जरिये दो लाख रुपये तक के लेन-देन के लिए एनईएफटी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिये किसी भी शाखा के किसी भी बैंक खाते से किसी भी शाखा के बैंक खाते को पैसा भेजा जा सकता है।
बस इकलौती शर्त ये है कि भेजने वाले और पैसा पाने वाले, दोनों के पास इंटरनेट बैंकिंग सेवा का होना जरूरी है। अगर दोनों खाते एक ही बैंक के हैं तो सामान्य स्थिति में कुछ सेकेंड्स के अंदर पैसा ट्रांसफर हो सकता है।
बस इकलौती शर्त ये है कि भेजने वाले और पैसा पाने वाले, दोनों के पास इंटरनेट बैंकिंग सेवा का होना जरूरी है। अगर दोनों खाते एक ही बैंक के हैं तो सामान्य स्थिति में कुछ सेकेंड्स के अंदर पैसा ट्रांसफर हो सकता है।
बदलाव नंबर 2: मोबाइल नंबर पोर्ट कराने से जुड़े नए नियम
टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी ट्राई ने मोबाइल पोर्ट कराने से जुड़े नए नियम आज (16 दिसंबर 2019) से लागू कर दिए हैं। नए नियमों के अनुसार, अब उपभोक्ताओं को मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के लिए अलग से यूनीक पोर्टिंग कोड (यूपीसी) जेनरेट कराना होगा। वहीं, मौजूदा सर्कल के यूजर्स का नंबर तीन दिन (वर्किंग डेज) के भीतर पोर्ट हो जाएगा। तो दूसरी तरफ एक सर्कल से दूसरे सर्कल में नंबर पोर्ट कराने में पूरे पांच दिनों का समय लगेगा। तो चलिए जानते हैं मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के नए नियमों को विस्तार से...
यूपीसी कोड के जरिए नंबर होगा पोर्ट
ट्राई के मुताबिक, यूजर्स को नंबर पोर्ट कराने के लिए यूनीक कोड जेनरेट कराना होगा और यह कोड तभी जेनरेट होगा, जब उपभोक्ता सभी नियमों का पालन करेंगे। आपको बता दें कि पोस्टपेड ग्राहक अपने नंबर को किसी अन्य नेटवर्क पर तभी पोर्ट करा सकेंगे, जब उनके पेंडिंग बिल क्लियर होंगे।
पुराने बिल का करना होगा भुगतान
इसके अलावा उन ही नंबर को पोर्ट किया जाएगा, जो मौजूदा टेलीकॉम कंपनी के साथ 90 दिनों (तीन महीने) तक जुड़े रहे हैं। साथ ही दूसरी कंपनी के साथ जुड़ने से पहले उपभोक्ता को पुरानी कंपनी के नियम और शर्तों को पूरा करना होगा। वहीं, नई कंपनी नंबर पोर्ट करने से पहले यूजर्स को सारे नियम और शर्तों की जानकारी देगी।
यूपीसी कोड चार दिन तक रहेगा एक्टिव
नए नियम के अनुसार, यूनीक पोर्टिंग कोड यानी यूपीसी पूरे चार दिन तक एक्टिव रहेगा। हालांकि, जम्मू-कश्मीर, असम और नॉर्थ-ईस्ट में इस कोड की समय सीमा 30 दिन की होगी।
ऐसे करें मोबाइल नंबर पोर्ट
1. मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के लिए यूजर्स को यूनीक पोर्टिंग कोड यानी यूपीसी की जरूरत होगी।
2. यूपीसी जेनरेट करने के लिए यूजर्स को मोबाइल में पोर्ट लिखकर स्पेस देना होगा और इसके बाद नंबर लिखकर 1900 पर मैसेज करना होगा।
3. अब यूजर्स को यूपीसी कोड मिल जाएगा, जो पूरे चार दिन तक एक्टिव रहेगा।
4. अब यूजर्स को जिस टेलीकॉम कंपनी की सेवाएं इस्तेमाल करनी है, तो उनको यूपीसी के साथ कस्टमर केयर सर्विस सेंटर पर जाना होगा।
5. इसके बाद यूजर्स को ऐक्वजिशन फॉर्म (CAF) और पोर्टिंग फॉर्म में अपनी जानकारी भरनी होगी। इसके साथ ही पेमेंट के बाद केवाईसी दस्तावेज को भी जमा कराना होगा।
6. यूजर्स को इसके बाद नई सिम के साथ एक एसएमएस मिलेगा।
7. इस मैसेज में यूजर्स को नंबर पोर्ट के समय और दिन की जानकारी मिलेगी।
मोबाइल नंबर पोर्ट के लिए इतना देना होगा चार्ज
उपभोक्ताओं को मोबाइल नंबर पोर्ट के लिए 6.46 रुपये का चार्ज देना पड़ेगा।
बदलाव नंबर 3: देशभर में लागू हुआ फास्टैग
देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ईटीसी) के जरिए टोल वसूली की व्यवस्था 15 दिसंबर सुबह 8 बजे से लागू हो गई। राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों पर टोल नाके पर लगने वाली लंबी कतारों से छुटकारा दिलाने के लिए फास्टैग सिस्टम लागू किया गया है। फिलहाल टोल प्लाजा पर 100 फीसदी के बजाय 75 फीसदी टोल लेन पर ही ईटीसी के जरिये फास्टैग से शुल्क काटा जाएगा। बाकी 25 फीसदी लेन पर वाहन मैनुअल तरीके से टोल चुकाकर यात्रा कर पाएंगे। इससे पहले टोल नाके पर सिर्फ एक नगदी लेन रखने और उससे गुजरने पर दोगुनी टैक्स वसूलने की बात थी।
केंद्र सरकार ने अभी तक सभी वाहनों के रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) आधारित फास्टैग जारी नहीं हो पाने की वजह से थोड़ी राहत दी है। मंत्रालय के शनिवार को जारी आदेश में कहा गया है कि ज्यादा वाहनों की आवाजाही वाले टोल प्लाजा पर कुल टोल लेन के 25 फीसदी को हाइब्रिड मोड में उपयोग किया जा सकता है।
हालांकि बिना फास्टैग वाले वाहनों के ईटीसी लेन में घुसने पर दोगुना टोल वसूले जाने के आदेश में बदलाव नहीं किया गया है। यानी बिना टैग वाली गाड़ी अगर फास्टैग लेन में आती है तो उन्हें दोगुना भुगतान करना पड़ेगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को शनिवार को दिए आदेश में अगले 30 दिन यानी 15 जनवरी तक यह व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहा है।