साधारण परिवार में जन्म लेने वाला सिवानी का लाल अरविंद केजरीवाल एक बार फिर देश की राजधानी दिल्ली में पूर्ण बहुमत के साथ राज करेगा। सिवानी निवासी बेसब्री से इस दिन का इंतजार कर रहे थे और मंगलवार को जैसे ही परिणाम अपेक्षा से भी अधिक आए तो शहर के लोगों मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। आइए जानते हैं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की जिंदगी की कुछ अनसुनी बातें...
जन्माष्टमी को जन्मे, घर का नाम था किशन, बस अड्डे पर चलाई किराने की दुकान, पढ़ें केजरीवाल की कहानी
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दिल्ली की जीत पर अरविंद के चाचा गिरधारी लाल ने कहा कि हमारे लाल को काम का इनाम मिला है। वहीं चाची पिस्ता देवी बोलीं कि हमारा अरविंद एक दिन सीएम के बाद पीएम बनकर लाल किले से तिरंगा भी लहराएगा। गौरतलब है कि सिवानी में जन्म के बाद यहीं पर पले-बढ़े अरविंद केजरीवाल एक सामान्य से परिवार से हैं। अरविंद केजरीवाल की चाची पिस्ता देवी ने बताया कि पिछली बार की तरह इस बार भी पूरा परिवार अरविंद के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेगा। पिस्ता देवी ने कहा अरविंद में अपने दादा मंगल चंद के गुण हैं और वह दिल्ली को देश का शानदार शहर बनाएगा।
16 अगस्त 1968 को सिवानी में हुआ था जन्म
सीएम केजरीवाल मूलरूप से भिवानी जिले के सिवानी के रहने वाले हैं। उनका जन्म 16 अगस्त 1968 को जन्माष्टमी के दिन शहर की अनाज मंडी की दुकान नंबर 30 के ऊपर बने घर में हुआ था। घर पर उन्हें किशन कह कर ही पुकारते हैं। मंगलवार को शहर में दुकानें तो खुली थीं, लेकिन सभी दुकानदार और अन्य लोग टेलीविजन के आगे टकटकी लगाए बैठे रहे। शहर के मुख्य बाजार में केजरीवाल के प्रशंसक कृष्ण फोगला, सुनील धारणिया, सुरेश वर्मा, सुनील बिश्नोई, धर्मवीर भेरा आदि ने आम आदमी पार्टी की टोपी पहनकर बाजार में मिठाई बांटी।
केजरीवाल की चचेरी बहन चिंकी ने कहा कि मुझे अपने भाई पर गर्व है कि राजधानी के लोगों का दिल जीत लिया है। एक दिन पहले रिश्तेदारी में अनहोनी घटना की वजह से परिवार में छायी उदासी दिल्ली में हैट्रिक के साथ ही छूमंतर हो गई। परिजन बोले - उनका लाल कोई आतंकवादी नहीं, बल्कि किंगमेकर हैं।
अरविंद की चाची पिस्ता देवी ने बताया कि अरविंद बचपन से ही सरल स्वभाव का रहा है और पढ़ाई में उसके अच्छे नंबर भी आते थे। जब घर के लोग उन्हें चाय या खाने के लिए बोलते तो वे बाथरूम के बहाने से किताब अंदर लेकर चले जाते थे। वे दुकानदारी में अपने चाचा की बस अड्डे पर किराने की दुकान में भी हाथ बंटाते थे। यूं तो केजरीवाल अकसर यहां आते रहे हैं लेकिन दिल्ली के सीएम बनने के बाद वे यहां दो बार ही आ पाए हैं। उन्होंने अरविंद की जीत के लिए पुरखों के गांव खेड़ा में मनोकामना मांगी थी। देवी मां ने अब उनकी मांग पूरी कर दी है, इसलिए वे जल्द ही कुल देवी के मंदिर जाकर माथा टेकेंगी और प्रसाद भी बांटेगी।