अरुण जेटली ने गुमनामी में खो चुके प्रदेश भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष व राज्यसभा के सदस्य श्वेत मलिक को राजनीतिक संजीवनी दी थी। 2007 से 2012 तक अमृतसर के मेयर रहे मलिक जब निगम चुनाव हार गए थे, तो वे गुमनामी में चले गए थे। पांच वर्ष तक मेयर रहने के बाद भी उनकी पार्टी गतिविधियों में भागेदारी लगभग खत्म हो चुकी थी।
श्वेत मलिक को जेटली ने दी थी राजनीतिक 'संजीवनी' रग-रग में बसता था अमृतसरी खाने का स्वाद
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2014 लोकसभा चुनाव में जब जेटली अमृतसर से चुनाव मैदान में उतरे तो उन्होंने मलिक को दो वार्डों में प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी थी। 2016 में जेटली ने ही अमित शाह को मलिक को पंजाब अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने की सिफारिश की थी।
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अमृतसरी कुलचा और लस्सी के थे शौकीन
अरुण जेटली को अमृतसरी कुलचे और चने बहुत पसंद थे। शुगर के मरीज होने के बावजूद वह अमृतसरी लस्सी भी पसंद करते थे। दिल्ली स्थित उनके निवास स्थान पर जितने भी कार्यक्रम होते तो कुलचे के लिए कारीगर अमृतसर से जाते थे।
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बता दें कि देश विभाजन के बाद पाकिस्तान से पलायन करने के बाद अरुण जेटली के पिता महाराजा किशन जेटली अमृतसर में कुछ महीने रुके थे। पुराने शहर के बाजार फुल्लां वाला में जेटली के पिता की बहन का घर था। इसी घर में जेटली के पिता व उनके पांच भाइयों ने कुछ महीने गुजारे थे।