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'उम्र 103 साल तो क्या, जित्तण दा जज्बा होणा चाहिदा', एथलीट मान कौर ने खोले निजी जिंदगी के राज
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 11 Sep 2019 09:09 AM IST
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एथलीट मान कौर
- फोटो : फाइल फोटो
बंदे विच जित्तण दा जज्बा होणा चाहिदा है, उम्र पामे कोई वी हो, कोई फरक नीं पैंदा। गल्ल शुरुआत करण दी ए। यह कहना है 103 वर्षीय वेटरन एथलीट मान कौर का, पढ़ें एक्सक्लूसिव इंटरव्यू...
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एथलीट मान कौर
- फोटो : फाइल फोटो
सुबह पांच बजे उठना। घर के पास ग्राउंड में दौड़ना, फिर एक्सरसाइज करना। इसके बाद घर आकर दही व फलों का जूस लेना। दोपहर को अंकुरित अनाज से बनी रोटी और शाम को चार बजे फल। शाम को फिर सैर पर निकलना और शाम सात बजे खाना खाकर जल्दी सो जाना। यह दिनचर्या है प्राइड ऑफ सिटी वेटरन एथलीट मान कौर की। 103 साल की उम्र में भी मान कौर कितनी फिट हैं, यह बात उनसे मिलते ही समझ में आ जाती है। सोमवार को संवाददाता संजीव पंगोत्रा ने उनसे सफलता का राज पूछा तो उन्होंने ठेठ पंजाबी में अपनी जिंदगी के फलसफे को साफ कर दिया। बोलीं- बंदे विच जित्तण दा जज्बा होणा चाहिदा है, उम्र पामे कोई वी हो, कोई फरक नीं पैंदा। गल्ल शुरुआत करण दी ए।
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एथलीट मान कौर
- फोटो : फाइल फोटो
चंडीगढ़ सेक्टर 40 में मान कौर का परिवार रहता है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें सम्मानित किया। मोदी से मुलाकात के सवाल पर मान कौर ने कहा कि मुझे जब यह सूचना मिली तो मारे उत्साह के रात भर नींद नहीं आई। 29 अगस्त को दिल्ली पहुंची और वो लम्हा आ गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैं रूबरू थे। मुझे फिट देखकर वे न केवल हैरान हुए बल्कि खुशी जताते हुए उनके मुंह से निकला शाबाश। मेरे हाथ बरबस ही जुड़ गए तो मोदी ने तुरंत मेरे हाथों को पकड़ा और कहा कि आप मुझे आशीर्वाद दीजिए। मेरा हृदय स्नेह से भर गया। उम्र के इस पड़ाव पर मिला यह सम्मान मेरे जीवन की अनमोल यादों में शरीक हो गया। यह लम्हा वह कभी नहीं भूल सकतीं। फिट इंडिया के इस कार्यक्रम में शिरकत करके मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं चाहती हूं कि उम्र भले ही कितनी भी हो, लोग अपनी फिटनेस से समझौता न करें।
एथलीट मान कौर
- फोटो : फाइल फोटो
सफलता का सफर जो अभी तक जारी है...
मान कौर का ड्राइंग रूम उनकी तस्वीरों से भरा पड़ा है। उनसे जुड़ी तमाम यादें आज भी उनके जेहन में ताजा हैं। अपने सफर की शुरुआत के बारे में बताती हैं कि बात 2009 की है। मेरा बेटा गुरदेव सिंह रोजाना पंजाब यूनिवर्सिटी में दौड़ लगाने जाता था। मैं भी बेटे के साथ वहां जाने लगी। युवाओं को ग्राउंड में दौड़ते देख मुझे न जाने क्यों यह ख्याल आया कि दौड़ना शुरू करना चाहिए। रोजाना थोड़ा थोड़ा दौड़ने लगी। मेरी अच्छी रनिंग देख बेटे मुझे मास्टर एथलीट टूर्नामेंट में खेलने के लिए प्रेरित किया। 2010 में पहली बार नेशनल एथलीट में हिस्सा लिया और 100 मीटर व 400 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल जीत लिया। इसके बाद हौसला बढ़ गया और दौड़ का यह अंतहीन सिलसिला जारी है।
मान कौर का ड्राइंग रूम उनकी तस्वीरों से भरा पड़ा है। उनसे जुड़ी तमाम यादें आज भी उनके जेहन में ताजा हैं। अपने सफर की शुरुआत के बारे में बताती हैं कि बात 2009 की है। मेरा बेटा गुरदेव सिंह रोजाना पंजाब यूनिवर्सिटी में दौड़ लगाने जाता था। मैं भी बेटे के साथ वहां जाने लगी। युवाओं को ग्राउंड में दौड़ते देख मुझे न जाने क्यों यह ख्याल आया कि दौड़ना शुरू करना चाहिए। रोजाना थोड़ा थोड़ा दौड़ने लगी। मेरी अच्छी रनिंग देख बेटे मुझे मास्टर एथलीट टूर्नामेंट में खेलने के लिए प्रेरित किया। 2010 में पहली बार नेशनल एथलीट में हिस्सा लिया और 100 मीटर व 400 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल जीत लिया। इसके बाद हौसला बढ़ गया और दौड़ का यह अंतहीन सिलसिला जारी है।
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एथलीट मान कौर
- फोटो : फाइल फोटो
योग और सैर हैं मान कौर की फिटनेस के राज
मान कौर के 81 साल के बेटे गुरदेव सिंह बताते हैं कि वह अपनी मां के साथ देश और विदेशों में होने वाली मास्टर्स एथलीट प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से हिस्सा लेते आ रहे हैं। 63 वर्ष की बेटी अमृत कौर बताती है कि अपनी मां को इस उम्र में इतना फिट देखते हुए पूरा परिवार उनसे प्रेरणा लेता है। हमने कितनी ही लड़कियों को उनसे फिटनेस के टिप्स लेते देखा है। वे सबसे यही कहती हैं कि नियमित रूप से सैर और योग ही सेहतमंद रहने के सूत्र हैं।
मान कौर के 81 साल के बेटे गुरदेव सिंह बताते हैं कि वह अपनी मां के साथ देश और विदेशों में होने वाली मास्टर्स एथलीट प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से हिस्सा लेते आ रहे हैं। 63 वर्ष की बेटी अमृत कौर बताती है कि अपनी मां को इस उम्र में इतना फिट देखते हुए पूरा परिवार उनसे प्रेरणा लेता है। हमने कितनी ही लड़कियों को उनसे फिटनेस के टिप्स लेते देखा है। वे सबसे यही कहती हैं कि नियमित रूप से सैर और योग ही सेहतमंद रहने के सूत्र हैं।
