कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलनरत हैं। इसी कड़ी में आठ दिसंबर यानी आज भारत बंद का आह्वान भी किया गया था। अब किसान विरोध के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। हरियाणा के बहादुरगढ़ में किसानों ने विरोध का दिल जीतने वाला तरीका अपनाया। वहीं कुंडली बॉर्डर पर महिलाओं ने जुलूस निकाला।
तस्वीरें : किसानों का अनोखा विरोध, रक्तदान कर सरकार पर बरसे, महिलाओं ने निकाला मशाल जुलूस
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बहादुरगढ़ में किसानों ने कहा कि हम खून का हर कतरा देने को तैयार हैं, बस हमारी मांगें केंद्र सरकार मान ले। बहादुरगढ़ में टीकरी सीमा से सेक्टर- 9 तक तीन स्थानों पर रक्तदान शिविर लगाए गए थे। किसानों ने शिविर में बढ़-चढ़कर भाग लिया। बहादुरगढ़ के टीकरी बार्डर पर चल रहे किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच मंगलवार को किसानों ने भारत बंद का आह्वान किया था।
इस मौके पर डिवाइन चैरिटेबल ट्रस्ट ने रक्तदान शिविर लगाया। ये शिविर टीकरी बार्डर के नजदीक दो स्थानों पर तो तीसरा शिविर सेक्टर-9 मोड़ के नजदीक जीवन ज्योति अस्पताल के सामने लगाया गया। शिविर में किसानों ने कहा कि वे खून का हर कतरा देने को तैयार हैं, बस सरकार को उनकी मांगें मान ले। उन्होंने शिविर के दौरान किसान एकता जिंदाबाद और मोदी सरकार मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। शिविरों में काफी संख्या में लोगों ने रक्तदान किया।
महिलाओं ने निकाला मशाल जुलूस
किसान संगठनों के आह्वान पर बंद के दौरान कृषि कानूनों के विरोध में मंगलवार शाम काफी संख्या में महिलाओं ने सिंघु बॉर्डर पर जुलूस निकाला। इस दौरान महिलाओं ने कहा कि वह कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के साथ है। जब तक सरकार की ओर से इन कानूनों को रद्द नहीं किया जाता है, तब तक वह धरने से भी नहीं हटेंगी। वह किसानों के हक की लड़ाई के लिए हाथों में मशाल लेकर धरने पर पहुंची हैं। महिलाएं बोलीं कि सरकार जानबूझकर किसानों के हकों को छीन रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मशाल जुलूस के दौरान राजबाला सैनी, दिल्ली से रंजीत कौर, गुरदासपुर की नीलम ने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में किसान पिछले 10 दिन से सिंघु बॉर्डर पर डटे हैं। ऐसे में उन्होंने भी बॉर्डर पर आकर मोर्चा संभाल लिया है। वह भी किसान परिवार से जुड़ी हुई है। पहले ही मंडियों में फसलों के दाम नहीं मिल रहे। अब कृषि कानून लागू होने से मंडियों को खत्म किया जा रहा है जो पूरी तरह से गलत है।