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कारगिल युद्ध पर बड़ा खुलासा, सेना ने पाक तक पहुंचाई गलत सूचना और यूं जीत ली मश्कोह घाटी

Sat, 19 Dec 2020 03:15 AM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Dec 2020 03:15 AM IST
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Big reveals on Kargil War in Military Literature Festival 2020
मश्कोह घाटी। - फोटो : अमर उजाला

कारगिल युद्ध में द्रास सेक्टर की मश्कोह घाटी में एक ऐसा मोर्चा (4875 प्वाइंट पिंपल कांप्लेक्स) भी था, जिसे जीतने के लिए भारतीय सेना को विशेष रणनीति बनानी पड़ी थी। यह मोर्चा हजारों फुट की ऊंचाई पर दुर्गम पहाड़ियों से घिरा था और इसी मोर्चे पर पाकिस्तान ने सबसे ज्यादा बंकर बनाए थे। यहां पाक सेना के साथ-साथ उनकी मदद के लिए पाक समर्थित आतंकी भी तैनात थे। पाकिस्तान ने इस घाटी को सबसे महत्वपूर्ण पोस्ट के रूप में चुना था। यहां पाक सेना की संख्या और असलाह भी सबसे ज्यादा था। लिहाजा भारतीय सेना को इस मश्कोह घाटी को हर हाल में जीतना लाजिमी था।

Big reveals on Kargil War in Military Literature Festival 2020
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

सेना को इस मोर्च को जीतने के लिए एक विशेष रणनीति बनानी पड़ी। जिसका शिकार दुश्मन हुआ और हमारे 17 जाट रेजिमेंट के वीर सपूतों ने दुश्मन को घेरकर चारों खाने चित कर दिया। इसका खुलासा मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में रक्षा विशेषज्ञ वीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर उमेश सिंह बावा की पुस्तक ‘मश्कोह : कारगिल एज आई सॉ इट’ में हुआ। 

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कारगिल युद्ध (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

बिग्रेडियर बावा ने इस युद्ध में 17 जाट रेजिमेंट की कमान संभाली हुई थी और वह खुद भी युद्ध का हिस्सा थे। ब्रिगेडियर बावा ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान मश्कोह घाटी हमारे लिए रणनीतिक नजरिये से काफी महत्वपूर्ण थी। मेजर जनरल अमरजीत सिंह ने बताया कि यह पुस्तक वास्तव में कारगिल जंग की असली घटनाओं का पहला लिखित वृत्तांत है। यह किताब इस बात का असली विवरण पेश करती है कि उस दौरान मश्कोह घाटी में क्या हुआ था।

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मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट 2020 - फोटो : फाइल फोटो

यह थी इस घाटी को जीतने की रणनीति
कारगिल क्षेत्र की यह घाटी काफी अंदरूनी और दुर्गम इलाकों में है। चूंकि पाक सेना यहां बहुत मजबूत स्थिति में डटी थी, इसलिए भारतीय सेना को भी उनसे मजबूत रणनीति बनानी पड़ी। हमारी सेना के जवान अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए दुश्मन की नजर से बचकर यहां तीन जगहों से चोटी की ओर बढ़े। भारतीय सेना ने दुश्मन को यहां तीन अलग-अलग दिशाओं से घेर लिया गया था। 

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कारगिल युद्ध (फाइल फोटो)

इसी दौरान दुश्मन को इस बात की खुफिया जानकारी उपलब्ध करवाई गई कि भारतीय सेना इस घाटी के पश्चिमी रास्ते से आगे बढ़ रही है। पश्चिमी रास्ते का इस्तेमाल दुश्मन को चकमा देने के लिए किया गया था। जबकि सैनिकों ने वास्तव में दक्षिण और दक्षिण -पूर्वी दिशा से हमला करने का फैसला किया था। चकमा देने की इस योजना के कारण ही दुश्मन को पता नहीं लग सका कि हमला किस तरफ से हो रहा है और यही इस मोर्चे को जीतने में काफी मददगार साबित हुआ। ब्रिगेडियर बावा बताते हैं कि इस दौरान आगे बढ़ रही सेना के लिए निगरानी और चौकसी सबसे महत्वपूर्ण थी।

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