पंजाब से हरियाणा के हिस्से का पानी एसवाईएल (सतलुज-यमुना लिंक नहर) में लाने की मुहिम उपवास से शुरू करने वाले दो 'माननीय' धर्म संकट में फंस गए। फंसे भी ऐसे कि ना उगलते बन रहा है और ना निगलते। हरियाणा के कुरुक्षेत्र के सांसद नायब सैनी और विधायक सुभाष सुधा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में वे जलपान करते दिख रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि भाजपा सांसद और विधायक ने एसवाईएल के मुद्दे पर रखे गए उपवास से चंद मिनट पहले जमकर जलपान किया।
उपवास से पहले जलपान करते दिखे भाजपा सांसद व विधायक, वीडियो हुआ वायरल...अब कही ये बात
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खैर यह तो वायरल हुआ घटनाक्रम है। इसके अलावा जिनके खाने के फोटो और वीडियो वायरल हुए हैं, उनका भी अपना एक पक्ष है। पक्ष में कितना दम है, यह लोगों को तय करना है। भाजपा विधायक सुभाष सुधा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि कुरुक्षेत्र में गीता ज्ञान संस्थानम के संस्थापक गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने शनिवार सुबह 10 बजे गीता जयंती के शुभारंभ अवसर गीता जी की पालकी यात्रा का कार्यक्रम रखा था।
इस कार्यक्रम में बतौर यजमान उन्हें व सांसद नायब सैनी को भी आमंत्रित किया गया था। वहीं शनिवार को ही सुबह 10 से शाम चार बजे तक भाजपा कार्यकर्ताओं का एसवाईएल के मुद्दे पर लघु सचिवालय के समक्ष धरना भी रखा गया था। इससे पहले वह और सांसद सैनी गीता जी की पालकी यात्रा में शिरकत करने गीता ज्ञान संस्थानम में पहुंचे थे। इस मौके पर महाराजश्री ने सभी को प्रसाद वितरण किया था। सुधा के मुताबिक उन्होंने पहले तो इनकार किया मगर स्वामी ज्ञानानंद महाराज के विशेष आग्रह पर उन्होंने प्रसाद ग्रहण कर लिया। प्रसाद ग्रहण करते समय के इस वीडियो को ही वायरल किया गया है।
सांसद ने कहा कि महाराज जी ने प्रसाद में पोहा दिया था
कुरुक्षेत्र के सांसद नायब सैनी के मुताबिक जिसने भी फोटो और वीडियो वायरल किया है, उसकी मानसिकता पर तरस आता है। उन्होंने कहा कि पालकी यात्रा के बाद स्वामी ज्ञानानंद महाराज जी ने विशेष आग्रह किया था कि प्रसाद में सुबह के नाश्ते के लिये चाय के साथ पोहा बनाया है। प्रसाद के रूप में उन्होंने इसे ग्रहण किया था। उन्होंने कहा कि हम सामाजिक लोग हैं। हर जगह जाना होता है। ऐसे में प्रसाद को कैसे इनकार कर सकते हैं।
ड्रामे-ढकोसले के साथ उपवास की नई परिभाषा : अरोड़ा
पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा का कहना है कि उन्होंने पहले ही कहा था कि यह उपवास महज ड्रामेबाजी है। लोगों का ध्यान किसान आंदोलन से हटाकर पंजाब और हरियाणा के किसानों में फूट डालने और मतभेद पैदा करने की साजिश है। अरोड़ा ने कहा कि ड्रामे और ढकोसले के बीच इन नेताओं ने उपवास की नई परिभाषा तैयार की है।