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नहीं मिली सरकारी मदद: सियाचिन में बेटा हुआ था शहीद, कैंसर पीड़ित मां इलाज को भटक रही...लिखा- 'घर बिकाऊ है'
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 14 Jun 2021 07:37 PM IST
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शहीद बेटे की तस्वीर के साथ कैंसर पीड़ित मां।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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सियाचिन में अपने प्राणों को न्योछावर कर देने वाले शहीद जवान की कैंसर पीड़ित मां इलाज के लिए भटक रही है। पंजाब सरकार ने परिवार को 50 लाख रुपये और नौकरी देने का एलान किया था लेकिन यह वादा अभी तक अधूरा है। मामला पंजाब के बठिंडा जिले का है। शहीद की मां मनजीत कौर को उसके पति ने घर से निकाल दिया तो अंत में अपने मायके गांव महिराज चली गईं।
मायके वालों के पास उपचार के लिए पैसे न होने पर वह अपना घर बेचने के लिए मजबूर हैं। परिवार ने अपने घर के मुख्य गेट पर लिखा है कि कैंसर पीड़ित माता का उपचार करवाने के लिए घर बिकाऊ है। गांव महिराज निवासी मनजीत कौर की शादी काफी वर्ष पहले गांव महमा सर्जा में हुई थी। शादी के दो वर्ष बाद मनजीत कौर ने बेटे को जन्म दिया जो बड़ा होकर भारतीय सेना में भर्ती हो गया था।
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शहीद बेटे की तस्वीर के साथ कैंसर पीड़ित मां।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
करीब आठ वर्ष पहले जब मनजीत कौर को कैंसर की बीमारी हुई तो पति ने उपचार करवाने के बजाय उन्हें घर से निकाल दिया। जिसके बाद मनजीत कौर के देवर ने कैंसर पीड़ित भाभी का उपचार करवाने का प्रयास किया।
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दरवाजे पर लिखा- घर बिकाऊ है।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वह उन्हें बीकानेर के कैंसर अस्पताल ले गए। जहां उपचार के लिए काफी पैसा खर्च किया। जब भाभी ठीक नहीं हुईं तो देवर ने भी हाथ खडे़ कर दिए। मनजीत कौर को आखिरी उम्मीद फौजी बेटे अमरदीप सिंह से थी लेकिन भगवान ने उसे भी इसी साल 28 अप्रैल को मां से हमेशा के लिए छीन लिया।
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शहीद बेटे की तस्वीर के साथ कैंसर पीड़ित मां।
- फोटो : अमर उजाला
अमरदीप सियाचिन में ग्लेशियर गिरने से शहीद हुए थे। इसके बाद पंजाब सरकार ने एलान किया था कि शहीद जवान के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी लेकिन दोनों में से शहीद की मां को कुछ नहीं मिला।
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शहीद जवान अमरदीप सिंह की फाइल फोटो।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अंत में मनजीत कौर अपने मायके चली गईं। मनजीत कौर के मायके वालों के पास उपचार के लिए पैसा न होने पर वह मकान बेचने को मजबूर हैं। शहीद की मां मनजीत कौर का कहना है कि अगर पंजाब सरकार उनका उपचार नहीं करवा सकती तो उन्हें अपने शहीद बेटे के पास ही भेज दे।
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