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रिटायर्ड अफसरों की जुबानी, 1975 की इमरजेंसी के दौरान हुई वो घटनाएं, जो आज भी जेहन में ताजा हैं
विकास सैनी, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 25 Jun 2019 01:44 PM IST
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दो रिटायर्ड अफसरों की जुबानी सुनिए, 1975 में लगी इमरजेंसी के दौरान हुई घटनाओं की कहानी, जो उनके जेहन में आज भी ताजा हैं और वे अकसर उनका जिक्र किया करते हैं।
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कंवर सिंह, उमेद सिंह
- फोटो : अमर उजाला
इमरजेंसी का दौर जीने वाले हरियाणा में रोहतक जिले के रहने वाले सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार डॉ. कंवर सिंह व वीएलडीए उमेद सिंह ने उस समय को याद करते हुए कई किस्से सुनाए। कलालान मोहल्ला में रहने वाले डॉ. कंवर सिंह का कहना है कि 1975 में जब इमरजेंसी लागू हुई थी, उस समय मेरी उम्र 37 वर्ष थी। हालात ऐसे थे कि लोग घर से बाहर निकलने से डरते थे। सड़क छोड़कर खेतों के रास्ते कहीं आया जाया करते थे। घर में भी छिप कर रहते थे।
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अमर उजाला से बात करते हुए डॉ. कंवर सिंह ने बताया कि उस समय अस्पताल में धड़ाधड़ ऑपरेशन हो रहे थे। हर किसी का कोटा फिक्स कर दिया गया था। उम्र का लिहाज तक नहीं रखा जा रहा था। युवा हो या बुजुर्ग सबके ऑपरेशन कर दिए गए थे। कर्मचारियों पर भी प्रशासनिक दबाव था। इसी दबाव में मेरा भी ऑपरेशन हुआ। उस समय मैं चार बच्चों का पिता बन चुका था। इसमें दो बेटे व दो बेटियां शामिल हैं। जबरदस्ती किए जा रहे ऑपरेशन को लेकर लोगों में खासा रोष था।
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कंवर सिंह ने बताया कि उस समय पुलिस ने भी ज्यादती की। लूटपाट भी हुई। दुकानों में घुस कर लोगों ने सामान लूटा। सिखों को पलायन करना पड़ा। सोनीपत के नासिरपुर में 31 अगस्त 1947 को मेरा जन्म हुआ था। उस समय यह क्षेत्र रोहतक जिले में आता था। दसवीं की पढ़ाई के बाद ही 1960 में क्लर्क की नौकरी लग गई थी। पटियाला में कार्यभार संभाल कर जालंधर में पहली नियुक्ति मिली। बाद में स्नातक की। वर्ष 1995 में फरीदाबाद से बतौर नायब तहसीलदार सेवानिवृत्त हुआ।
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रोहतक में सेक्टर तीन निवासी सेवानिवृत्त वीएलडीए उमेद सिंह का कहना है कि इमरजेंसी के दिनों में मेरी ड्यूटी बहादुरगढ़ में थी। सरकार ने योजना बनाई थी कि जो सबसे ज्यादा ऑपरेशन कराएगा, उसे कार दी जाएगी। इलाके के एसडीएम को यह ईनाम मिलना था। लेकिन ईनाम में कार मिलने की पहली रात ही उनका हृदयगति रुकने से निधन हो गया। प्रशासन के दबाव में आठ अक्तूबर 1976 को मेरा भी ऑपरेशन हुआ। उस समय मैं दो बेटों व दो बेटियों का पिता बन चुका था।
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