भारतीय वायुसेना का 68 साल पुरान शिकारी फिर से जी उठा है और इस बार उसके हाथ में वो हथियार होगा, जिससे वह अपने दुश्मनों को चुन-चुन का मारेगा, देखिए तस्वीरों में।
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वायुसेना की स्क्वाड्रन
- फोटो : फाइल फोटो
ये शिकारी कोई और नहीं, बल्कि 68 साल पुरानी स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरो’ है, जिसे फोर्थ जेनरेशन के लड़ाकू राफेल के लिए जिंदा किया गया है। जी हां, वेस्टर्न एयर कमांड की ताकत और बढ़ने वाली है। इस कमांड को चिनूक और अपाचे के बाद जल्द ही राफेल मिल जाएगा, जो न केवल एयरफोर्स की, बल्कि इस महत्पूर्ण एयर कमांड की ताकत को भी और बढ़ा देगा। इंडियन एयरफोर्स राफेल के आगमन की तैयारियों में जुट गई है।
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वायुसेना की स्क्वाड्रन
- फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन को दुनिया का बेहतरहीन हेलीकॉप्टर चिनूक मिला। पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन को दुनिया के सबसे घातक अपाचे की स्क्वाड्रन मिली है। अब दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमान राफेल की स्क्वाड्रन अंबाला एयरफोर्स स्टेशन को मिलेगी। विमान की जिम्मेवारी जिस स्क्वाड्रन को दी जा रही है, उस खत्म कर दिया गया था। मगर अब 68 साल पुरानी इस ‘गोल्डन एरो’17 स्कवॉड्रन को राफेल के लिए फिर से जिंदा किया गया है।
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एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ
अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में आयोजित एक कार्यक्रम ‘रेसुररेक्शन सेरेमनी’ के तहत वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने इस स्क्वाड्रन को औपचारिक रूप से पुनर्जीवित किया गया। बताया जा रहा है कि भारत को पहला राफेल विमान विजयदशमी के दिन 8 अक्तूबर को मिलेगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इस लड़ाकू विमान की डिलीवरी लेने अगले महीने खुद फ्रांस जाएंगे। संयोग से 8 अक्तूबर को ही भारतीय वायुसेना का स्थापना दिवस भी है।
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भारतीय वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ
- फोटो : PTI
अंबाला एयरफोर्स स्टेशन उतर भारत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण एयरफोर्स स्टेशन है। मौजूदा हालातों और पड़ोसी देश पाकिस्तान से चल रहे तल्ख संबंधों के चलते इंडियन एयरफोर्स का फोकस इस वक्त वेस्टर्न एयर कमांड को ज्यादा से ज्यादा ताकतवर बनाने की ओर है। इस कमांड पर उत्तर भारत में देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षित रखने की अहम जिम्मेदारी है। यहीं से एयरफोर्स न केवल पाकिस्तान पर, बल्कि चीन पर भी तीखी नजर रखती है।