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15 दिन में 16 श्राद्ध, पिंडदान करते हुए भूल कर भी न करना पांच काम, वरना नाराज होंगे पूर्वज
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 11 Sep 2019 09:09 AM IST
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श्राद्ध
- फोटो : फाइल फोटो
15 दिन में 16 श्राद्ध होंगे, इसलिए पिंडदान करते समय पांच काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए। ज्योतिषियों के अनुसार, ऐसा होने से पूर्वज नाराज हो जाते हैं।
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श्राद्ध
श्राद्ध 2019 की तिथियां
पूर्णिमा का श्राद्ध-13 सितंबर, प्रतिपदा का श्राद्ध-14 सितंबर, द्वितीया का श्राद्ध-15 सितंबर, त़ृतीया का श्राद्ध-17 सितंबर, चतुर्थी का श्राद्ध-18 सितंबर, पंचमी का श्राद्ध-19 सितंबर, षष्ठी का श्राद्ध-20 सितंबर, सप्तमी का श्राद्ध-21 सितंबर, अष्टमी का श्राद्ध-22 सितंबर, नवमी का श्राद्ध-23 सितंबर, दसवीं का श्राद्ध-24 सितंबर, एकादशी का श्राद्ध-25 सितंबर, द्वादशी का श्राद्ध-25 सितंबर, त्रयोदशी का श्राद्ध-26 सितंबर, चतुर्दशी का श्राद्ध-27 सितंबर, अमावस्या का श्राद्ध-28 सितंबर।
पूर्णिमा का श्राद्ध-13 सितंबर, प्रतिपदा का श्राद्ध-14 सितंबर, द्वितीया का श्राद्ध-15 सितंबर, त़ृतीया का श्राद्ध-17 सितंबर, चतुर्थी का श्राद्ध-18 सितंबर, पंचमी का श्राद्ध-19 सितंबर, षष्ठी का श्राद्ध-20 सितंबर, सप्तमी का श्राद्ध-21 सितंबर, अष्टमी का श्राद्ध-22 सितंबर, नवमी का श्राद्ध-23 सितंबर, दसवीं का श्राद्ध-24 सितंबर, एकादशी का श्राद्ध-25 सितंबर, द्वादशी का श्राद्ध-25 सितंबर, त्रयोदशी का श्राद्ध-26 सितंबर, चतुर्दशी का श्राद्ध-27 सितंबर, अमावस्या का श्राद्ध-28 सितंबर।
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श्राद्ध
- फोटो : फाइल फोटो
ये काम नहीं करने चाहिए
श्राद्ध पक्ष में अगर कोई भोजन पानी मांगने आए तो उसे खाली हाथ नहीं जाने दें। कहते हैं पितर कसी भी रूप में अपने परिजनों के बीच में आते हैं और उनसे अन्न पानी की चाहत रखते हैं। गाय, कुत्ता, बिल्ली, कौआ इन्हें श्राद्ध पक्ष में मारना नहीं चाहिए, बल्कि इन्हें खाना देना चाहिए। मांसहारी भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा के सेवन से परहेज करना चाहिए। शराब और नशीली चीजों से बचें। परिवार में आपसी कलह से बचें।
श्राद्ध पक्ष में अगर कोई भोजन पानी मांगने आए तो उसे खाली हाथ नहीं जाने दें। कहते हैं पितर कसी भी रूप में अपने परिजनों के बीच में आते हैं और उनसे अन्न पानी की चाहत रखते हैं। गाय, कुत्ता, बिल्ली, कौआ इन्हें श्राद्ध पक्ष में मारना नहीं चाहिए, बल्कि इन्हें खाना देना चाहिए। मांसहारी भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा के सेवन से परहेज करना चाहिए। शराब और नशीली चीजों से बचें। परिवार में आपसी कलह से बचें।
श्राद्ध
ब्रह्मचर्य का पालन करें, इन दिनों स्त्री पुरुष संबंध से बचना चाहिए। नाखून, बाल एवं दाढ़ी मूंछ नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि श्राद्ध पक्ष पितरों को याद करने का समय होता है। यह एक तरह से शोक व्यक्त करने का तरीका है। पितृपक्ष के दौरान जो भी भोजन बनाएं उसमें से एक हिस्स पितरों के नाम से निकालकर गाय या कुत्ते को खिला दें। भौतिक सुख के साधन जैसे स्वर्ण आभूषण, नए वस्त्र, वाहन इन दिनों खरीदना अच्छा नहीं माना गया है। क्योंकि यह शोक काल होता है।
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श्राद्ध
ये किए बिना पूर्ण नहीं होता श्राद्ध
वीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार, श्राद्ध में पिंड दान और तर्पण करने के बाद पंचवली करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए। पंचवली के बिना श्राद्ध पूर्ण नहीं होता। गौ को पश्चिम दिशा में मुख करके पत्ते पर देना चाहिए। कुत्ते को जमीन पर। कौवा को पृथ्वी पर देवता, मनुष्य, यक्ष आदि को पत्ते पर। कीड़े, मकोड़े और चीटियों को पत्ते पर देना चाहिए।
वीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार, श्राद्ध में पिंड दान और तर्पण करने के बाद पंचवली करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए। पंचवली के बिना श्राद्ध पूर्ण नहीं होता। गौ को पश्चिम दिशा में मुख करके पत्ते पर देना चाहिए। कुत्ते को जमीन पर। कौवा को पृथ्वी पर देवता, मनुष्य, यक्ष आदि को पत्ते पर। कीड़े, मकोड़े और चीटियों को पत्ते पर देना चाहिए।
