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फांसी का तख्ता बना मंडप, फंदा वरमाला और मौत उनकी दुल्हन, जानिए कौन थे वो

Fri, 23 Mar 2018 09:51 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 23 Mar 2018 09:51 AM IST
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Martyrs' Day 23 March 1931, shaheed-e-azam bhagat singh life untold facts
शहीद-ए-आजम भगत सिंह
शहीदी दिवस के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं, पाकिस्तान में जन्मे भगत सिंह के जीवन से जुड़ी 10 ऐसी बातें, जो शायद ही आपको पता हो।
Martyrs' Day 23 March 1931, shaheed-e-azam bhagat singh life untold facts
शहीद भगत सिंह
भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले (अब पाकिस्तान) के बंगा गांव में एक सिख परिवार में हुआ था। हालांकि उनके जन्म तारीख पर कुछ विरोधाभास है, लेकिन उनका परिवार 28 सितंबर को ही जन्मदिवस मनाता है। वहीं, कुछ जगहों पर 27 सितंबर को उनके जन्मदिन का जिक्र मिलता है।
Martyrs' Day 23 March 1931, shaheed-e-azam bhagat singh life untold facts
भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव
भगत सिंह के पूर्वजों का जन्म पंजाब के नवांशहर के समीप खटकड़कलां गांव में हुआ था। इसलिए खटकड़कलां इनका पैतृक गांव है। भगत सिंह के दादा सरदार अर्जुन सिंह पहले सिख थे जो आर्य समाजी बने। इनके तीनों सुपुत्र-किशन सिंह, अजीत सिंह व स्वर्ण सिंह प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे। 13 अप्रैल, 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह पर गहरा असर डाला और वे भारत की आजादी के सपने देखने लगे।
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Martyrs' Day 23 March 1931, shaheed-e-azam bhagat singh life untold facts
शहीद-ए-आजम भगत सिंह - फोटो : अमर उजाला
भगत सिंह के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आने का एक बहुत बड़ा कारण था, उनका लाहौर स्थित ‘नर्सरी ऑफ पैट्रिआट्स’ के रूप में विख्यात नैशनल कालेज में सन् 1921 में दाखिला लेना। इस कॉलेज की शुरुआत लाला लाजपत राय ने की थी। कॉलेज के दिनों में भगत ने एक्टर के रूप में कई नाटकों मसलन राणा प्रताप, सम्राट चंद्रगुप्त और भारत दुर्दशा में हिस्सा लिया।
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Martyrs' Day 23 March 1931, shaheed-e-azam bhagat singh life untold facts
भगत सिंह
जानकर हैरानी होगी कि परिजनों ने जब भगत सिंह की शादी करनी चाही तो वह घर छोड़कर कानपुर भाग गए। अपने पीछे जो खत छोड़ गए, उसमें उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपना जीवन देश को आजाद कराने के महान काम के लिए समर्पित कर दिया है। इसलिए कोई दुनियावी इच्छा या ऐशो-आराम उनको अब आकर्षित नहीं कर सकता।
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