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शहीदी दिवसः जानिए आखिर कैसे पड़े थे नाम, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु

Fri, 23 Mar 2018 09:51 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 23 Mar 2018 09:51 AM IST
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Martyrs' Day, story behind shaheed bhagat singh, rajguru and sukhdev name
भगत सिंह शहीदी दिवस
शहीदी दिवस के मौके पर हम आपको सुना रहे हैं, शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव के नामकरण की दिलचस्प कहानी।
Martyrs' Day, story behind shaheed bhagat singh, rajguru and sukhdev name
भगत सिंह शहीदी दिवस
सरदार किशन सिंह और विद्यावती कौर के घर जन्मा एक बालक शहीद-ए-आज़म भगतसिंह कहलाया, लेकिन उनका नाम भगतसिंह कैसे पड़ा, इसके पीछे एक कहानी है। बहुत कम लोग ऐसे जो यह जानते होंगे, आइए सुनते हैं... 
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भगत सिंह शहीदी दिवस
शहीद-ए-आजम भगतसिंह के परिवार में वतन परस्ती कूट-कूट कर भरी हुई थी। उनके पिता सरदार किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह भी स्वतन्त्रता सेनानी थे। 28 सितंबर, 1907 के दिन जब भगत सिंह का जन्म हुआ तो उसी दिन उनके पिता और चाचा जेल से रिहा हो कर घर आए थे। घर में एक नन्हा सा सदस्य आने से पिता और चाचा की घर वापसी हो गई, इससे घर में खुशी का माहौल था।
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भगत सिंह
जब भगत के पिता और चाचा घर आए तो दादी जय कौर ने कहा "ए मुंडा बड़ा ही भाग वाला है।" तभी निर्णय लिया गया कि इस बच्चे का नाम भाग या इससे मिलता जुलता रखेंगे। परिवार में आम सहमति के बाद इस बच्चे का नाम भगत सिंह रखा गया। इसी भगत सिंह ने आगे चल कर मात्र 23 साल की ज़िन्दगी जी कर एक ऐसा स्वर्णिम इतिहास लिख दिखाया जो आज भी हर भारतीय को देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर देता है।
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महान क्रांतिकारी राजगुरु
24 अगस्त, 1908 को खेड़ा पुणे (महाराष्ट्र)  में पण्डित हरिनारायण राजगुरु और पार्वती देवी के घर इस महान क्रांतिकारी और अमर बलिदानी का जन्म हुआ। शिवराम हरिनारायण अपने नाम के पीछे राजगुरु लिखते थे। यह कोई उपनाम नहीं है, बल्कि एक उपाधि है। इनके पिता पण्डित हरिनारायण राजगुरु, पण्डित कचेश्वर की सातवीं पीढ़ी में जन्मे थे। इनका उपनाम ब्रह्मे था। यह प्रकांड ज्ञानी पण्डित थे।
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