दिल्ली सीमा पर चल रहे किसानों के आंदोलन के बीच संत बाबा राम सिंह ने गोली मारकर अपनी जान दे दी है। उनके पास से एक नोट भी मिला है। वह किसानों के हालात को लेकर बेहद चिंतित थे। नोट में उन्होंने लिखा कि किसानों का दर्द देखा नहीं जा रहा है। आइए पढ़ते हैं इस नोट में और क्या-क्या लिखा है।
नहीं देखा जा रहा किसानों का दर्द...बहुत दिल दुखा, पढ़ें- संत बाबा राम ने आखिरी नोट में और क्या लिखा
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पंजाबी भाषा में लिखा नोट
संत बाबा राम सिंह के पास से मिले नोट में लिखा है कि कुंडली बॉर्डर पर किसानों का दुख देखा। अपना हक लेने के लिए सड़कों पर परेशान हो रहे हैं। बहुत दिल दुखा है। सरकार न्याय नहीं दे रही। जुल्म है, जुल्म करना पाप है, जुल्म सहना उससे भी बड़ा पाप है। किसी ने किसानों के हक में और जुल्म के खिलाफ कुछ किया और किसी ने कुछ किया।
किसी ने अपने सम्मान वापस किए, मतलब अवार्ड, पुरस्कार वापस करके रोष जताया। दास किसानों के हक में सरकारी जुल्म के रोष में आत्मदाह मतलब सुसाइड कर रहा हूं। ये जुल्म के खिलाफ और कीर्ति किसान के हक में आवाज है।
वाहेगुरु जी का खालसा
वाहेगुरु जी की फतेह।
स्वयं का बलिदान देने की बात कहकर मारी गोली
आसपास के लोगों ने बताया कि धरनास्थल पर कई किसान मौजूद थे। इसी दौरान संत बाबा राम सिंह ने आंदोलन में बलिदान देने की बाते करते हुए अन्य किसानों को स्टेज पर भेज दिया। उसके बाद खुद को अपने वाहन में जाकर गोली मार ली। गोली मारने का पता लगते ही उन्हें घायल अवस्था में पानीपत के निजी अस्पताल में ले जाया गया। जहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
उन्होंने अपने नोट में लिखा कि किसान ठंड में अपनी मांगों को लेकर सड़क पर परेशान हो रहे हैं। जिसके चलते वह रोष स्वरूप बलिदान दे रहे हैं। मामले की सूचना के बाद कुंडली थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।