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...तो हो जाए पिकनिक, चंडीगढ़ के पास ऐसी 6 जगह, एक दिन में जाकर आप वापस आ सकते हैं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 07 Oct 2018 01:48 PM IST
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पिकनिक स्पॉट
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एक छुट्टी और पिकनिक पर जाने का मूड है, तो चंडीगढ़ के पास इन छह जगहों पर जा सकते हैं। यहां से आप एक दिन में ही पिकनिक मनाकर वापस आ सकते हैं।
पिकनिक स्पॉट
शायद ही याद हो कि कब एक दिन के लिए परिवार के सदस्य या दोस्त घर का खाना बनाकर दूर किसी ऐसी जगह पर गए हों, जो शहर के शोरगुल से दूर प्रकृति के गोद में हो। जहां चारों तरफ हरियाली, पक्षियों की कानों में मिसरी घोलने वाली मीठी आवाज, पहाड़, शुद्ध हवा और रोमांच का संगम हो। यदि नहीं गए तो अब तैयारी कर लीजिए। गर्मी, बारिश के बाद जो मौसम आया है, वह पिकनिक के लिए बहुत ही बेहतरीन है। जाना कहां है, उसके लिए भी माथापच्ची करने की जरूरत नहीं है। हम आपको ऐसी जगह बताते हैं, जहां एक दिन की पिकनिक मनाकर आप वापस आ सकते हैं। ....तो भी देर किस बात की हो जाइए तैयार।
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मोरनी का नेचर म्यूजियम
हरियाणा का एक मात्र हिल स्टेशन मोरनी में मुगलकालीन किले को नेचर म्यूजियम में बदल दिया गया है। चंडीगढ़ से करीब 40-45 किलोमीटर यह जगह प्रकृति, कला और जंगल का एक अनूठा संगम है। किले की दीवारों और गुंबद में कुछ इस तरह से स्कल्पचर बनाए गए हैं, मानो आप किसी जानवर के नीचे खड़े हो। मिसाल के तौर पर प्रकृति की उत्पत्ति विकास और विनाश की ओर इशारा करते सात ऐसे म्यूरल बनाए गए हैं, जिन्हें देखकर कोई भी वन्य जीवों पर बढ़ रहे खतरों पर चिंता में पड़ सकता है। यहां पर अपने व्हीकल या बस से आसानी से जाया जा सकता है।
हरियाणा का एक मात्र हिल स्टेशन मोरनी में मुगलकालीन किले को नेचर म्यूजियम में बदल दिया गया है। चंडीगढ़ से करीब 40-45 किलोमीटर यह जगह प्रकृति, कला और जंगल का एक अनूठा संगम है। किले की दीवारों और गुंबद में कुछ इस तरह से स्कल्पचर बनाए गए हैं, मानो आप किसी जानवर के नीचे खड़े हो। मिसाल के तौर पर प्रकृति की उत्पत्ति विकास और विनाश की ओर इशारा करते सात ऐसे म्यूरल बनाए गए हैं, जिन्हें देखकर कोई भी वन्य जीवों पर बढ़ रहे खतरों पर चिंता में पड़ सकता है। यहां पर अपने व्हीकल या बस से आसानी से जाया जा सकता है।
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चंडीगढ़ में सुखना लेक का एक दृश्य
- फोटो : फाइल फोटो
सुखना लेक जैसी लेक यहां भी है
सुखना लेक पर बोटिंग कर के अगर बोर हो चुके हैं तो एक बार मोरनी के टिक्कर ताल का चांस ले सकते हैं। पहाड़ियों के सटी लेक पर बोटिंग के साथ प्रकृति के खूबसूरत नजारे आपकी सारी थकान दूर कर देंगे। खाने के लिए बेहतरीन स्नैक्स बार हैं। इसके लिए दो रास्ते हैं। पहला, नाडा साहिब गुरुद्वारा की तरफ से और दूसरा चंडी मंदिर टोल प्लाजा से राइट टर्न लेकर। चंडीगढ़ से यह करीब 35-40 किलोमीटर दूरी पर है।
सुखना लेक पर बोटिंग कर के अगर बोर हो चुके हैं तो एक बार मोरनी के टिक्कर ताल का चांस ले सकते हैं। पहाड़ियों के सटी लेक पर बोटिंग के साथ प्रकृति के खूबसूरत नजारे आपकी सारी थकान दूर कर देंगे। खाने के लिए बेहतरीन स्नैक्स बार हैं। इसके लिए दो रास्ते हैं। पहला, नाडा साहिब गुरुद्वारा की तरफ से और दूसरा चंडी मंदिर टोल प्लाजा से राइट टर्न लेकर। चंडीगढ़ से यह करीब 35-40 किलोमीटर दूरी पर है।
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सोलन की डगशई जेल
चंडीगढ़ से करीब 60 किलोमीटर दूर सोलन स्थित डगशई जेल है। यहां जाने में सिर्फ दो घंटे लगते हैं। यहां अंग्रेजों की सरकारी जेल हुआ करती थी। महात्मा गांधी भी एक दिन इस जेल में रहे थे। कठोर सजा देने के लिए एक अलग से जेलखाना होता था। इसमें इतनी कम जगह होती थी कि कैदी सिर्फ एक जगह पर खड़े होने को मजबूर होता था। न तो बैठ सकता था और न ही हिल सकता। इसे देखने और पढ़ने के बाद आप समझ पाएंगे कि उस दौर में कितनी कठोर सजा और यातनाएं दी जाती थीं। यहां पर पुराने चर्च, कैंटोनमेंट, जेल सहित कई एतिहासिक स्थल हैं।
चंडीगढ़ से करीब 60 किलोमीटर दूर सोलन स्थित डगशई जेल है। यहां जाने में सिर्फ दो घंटे लगते हैं। यहां अंग्रेजों की सरकारी जेल हुआ करती थी। महात्मा गांधी भी एक दिन इस जेल में रहे थे। कठोर सजा देने के लिए एक अलग से जेलखाना होता था। इसमें इतनी कम जगह होती थी कि कैदी सिर्फ एक जगह पर खड़े होने को मजबूर होता था। न तो बैठ सकता था और न ही हिल सकता। इसे देखने और पढ़ने के बाद आप समझ पाएंगे कि उस दौर में कितनी कठोर सजा और यातनाएं दी जाती थीं। यहां पर पुराने चर्च, कैंटोनमेंट, जेल सहित कई एतिहासिक स्थल हैं।