निजी यूनिवर्सिटी में वीडियो कांड के सामने आने के बाद मोहाली प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने रविवार सुबह से ही चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (सीयू) में डेरा डाल लिया। शनिवार रात वायरल वीडियो से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सनसनीखेज मामले को दबाने के कारण ही विद्यार्थियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा। छात्र सुरक्षाकर्मियों तक से भिड़ने को तैयार थे। विद्यार्थियों की भीड़ बता रही थी कि उनकी बात को किस तरह लगातार अनसुना किया जा रहा था। उधर, प्रबंधन ने वीडियो जारी कर छात्राओं को न्याय दिलाने की बात कही है।
वीडियो कांड: अपने ही जवाबों में उलझे अधिकारी, विद्यार्थी बोले- दबाया जा रहा मामला, नहीं मिले 7 सवालों के जवाब
पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने के लिए अधिकारी दिनभर प्रेसवार्ता करते रहे। हर अधिकारी को बयान जारी करना पड़ा हालांकि कई बार अधिकारी अपने ही जवाबों में उलझते नजर आए। दिनभर की गतिविधि के बाद छात्रों को लगा कि मामले को दबाने का प्रयास हो रहा है इसलिए एक बार फिर से इकट्ठा होने का मैसेज वायरल किया। सीयू प्रबंधन ने न केवल अपने बल्कि पुलिस की टुकड़ी लगाकर महिला छात्रावास को भी छावनी में तब्दील करा दिया। फिर भी छात्रों को रोकने में नाकाम रहा और वह बड़ी संख्या में विद्यार्थी कैंपस में प्रदर्शन करने पहुंचे। अपने कॅरिअर को दांव पर लगाकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के गुस्से से एक बात स्पष्ट थी कि कहीं न कहीं सीयू प्रबंधन और प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी थी।
पहली प्रेसवार्ता: गर्मी के चलते छात्राएं हुईं बेहोश, किसी ने आत्महत्या नहीं की
पूरे प्रकरण में महिला आयोग की चेयरपर्सन मनीषा गुलाटी सबसे पहले चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी पहुंचीं। उन्होंने कहा कि लड़कियों के आत्महत्या करने की बात बिल्कुल गलत है। विद्यार्थी प्रदर्शन कर रहे थे तो गर्मी बहुत ज्यादा थी। बच्चे घबरा गए थे। ऐसे में एक-दो छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई, ऐसे में एंबुलेंस को बुलाने की नौबत आई। उन्होंने कहा कि लड़की ने सिर्फ अपने वीडियो बॉयफ्रेंड को भेजे थे जबकि चैटिंग और वीडियो में सामने आया है कि आरोपी लड़की ने हॉस्टल की कुछ छात्राओं की भी फोटो खींची थी और वीडियो बनाए थे। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना जांच के अधिकारी अन्य छात्राओं के फोटो व वीडियो वायरल न होने का दावा कैसे कर सकते हैं।
दूसरी प्रेसवार्ता: जब वीडियो वायरल नहीं तो कैसे केस दर्ज किया
घटना को लेकर दूसरी प्रेसवार्ता डीसी अमित तलवार व एसएसपी विवेकशील सोनी ने की। एसएसपी ने साफ तौर पर कहा कि आरोपी लड़की ने किसी अन्य छात्रा का वीडियो अपने बॉयफ्रेंड को नहीं भेजा है। केवल अपना ही वीडियो भेजा है। इस पर सवाल किया गया कि अपना ही वीडियो भेजा है तो केस क्यों दर्ज किया गया। इस पर एसएसपी ने कहा कि प्राथमिक सूचना यही थी कि उसने कुछ अन्य छात्राओं के वीडियो भी भेजे हैं, शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है। फॉरेंसिक जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी।
तीसरी प्रेसवार्ता: एडीजीपी ने वीडियो नहीं देखा और कर डाली प्रेसवार्ता
एडीजीपी गुरप्रीत कौर देव ने छात्राओं से बातचीत करने के बाद प्रेसवार्ता कर कहा कि किसी लड़की ने आत्महत्या नहीं की है और न कोई चोटिल हुआ है। रात को एंबुलेंस आने, उसमें किसी छात्रा को बैठाने और वार्डन के साथ छात्रा की बातचीत के वीडियो वायरल होने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि ये वीडियो मैंने नहीं देखे हैं जबकि ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रेसवार्ता में वह इसी वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगा रहीं थीं। सवाल उठता है कि बिना वीडियो देखे घटना को कैसे अफवाह बताया जा सकता है।
