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'सुपरकॉप' केपीएस गिल की वो आखिरी ख्वाहिश, जिसे पूरा करना चाहेंगे PM मोदी

ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 28 May 2017 09:18 AM IST
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केपीएस गिल - फोटो : Getty Images
पंजाब से आतंकवाद का सफाया करने वाले 'सुपरकॉप' केपीएस गिल की एक आखिरी ख्वाहिश पता चली है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरा करना चाहेंगे।
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किडनी की बीमारी के चलते हुआ निधन
पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल नहीं रहे। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह 82 वर्ष के थे। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी किडनी पूरी तरह खराब हो चुकी थी और उन्हें दिल की बीमारी भी थी। शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। गिल को 18 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका इलाज नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. डीएस राणा के नेतृत्व में चल रहा था।
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कश्मीर से आतंक का सफाया करना चाहते थे गिल
वहीं, इस सुपरकॉप की आखिरी ख्वाहिश थी कि वह कश्मीर से आतंकवाद को खत्म करने में सहयोग दें। पंजाब के सीनियर आईपीएस आईजीपी एके पांडेय के अनुसार, अंतिम समय तक सुपरकॉप कश्मीर में आतंकी हालातों को लेकर विचलित रहते थे। गिल चाहते थे कि गुजरात की तरह उन्हें कश्मीर में आतंकवाद खत्म करने का मौका मिले, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और यही टीस लेकर गिल दुनिया से चले गए।
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डोभाल के साथ बेहतरीन तालमेल से सफल हुआ था ऑपरेशन
पंजाब में आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए तत्कालीन डीजीपी केपीएस गिल का अगर किसी के साथ बेहतर तालमेल था तो वह थे देश के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल। गिल और डोभाल के आपसी तालमेल ने आपरेशन ब्लैक थंडर को कामयाब किया और सूबे से आतंकवाद का खात्मा हो गया। इस आपरेशन का पूरा खाका अजीत डोभाल ने तैयार किया और इसे अंजाम केपीएस गिल ने दिया।
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दरबार साहब की गरिमा को बहाल रखना बड़ी चुनौती थी
पंजाब में 80 के दशक में आतंकवाद चरम पर था। तब सीएम बेअंत सिंह ने आतंकवाद के खात्मे की पूर्ण जिम्मेदारी केपीएस गिल को दी थी। आतंकवादी अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के अहाते में छिपे हुए थे और उनको बाहर निकालकर लाना बहुत बड़ी चुनौती थी। गिल के आगे चुनौती श्री दरबार साहब की गरिमा को बहाल रखना और वहां क्षति को बचाना भी था। अंदर का खाका तैयार करने की जिम्मेदारी अजीत डोभाल ने ली।
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